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इन तारीखों पर जन्मे लोग दुनिया की चकाचौंध से रहते हैं दूर, जानिए मूलांक 7 और केतु का यह गहरा कनेक्शन

Updated: Tue, 14 Jul 2026 01:18 PM (IST)

अंक ज्योतिष के अनुसार, मूलांक 7 वाले लोग भीड़ में भी अकेला महसूस करते हैं, क्योंकि उनका मन भौतिक दुनिया से भर जाता है और वे केतु के प्रभाव में होते है ...और पढ़ें

कैसे होते हैं मूलांक 7 वाले लोग? (Picture Credit- AI)

कैसे होते हैं मूलांक 7 वाले लोग? (Picture Credit- AI) 

HighLights

  1. मूलांक 7 वाले भीड़ में भी खुद को अकेला महसूस करते हैं।

  2. इन पर केतु का गहरा प्रभाव होता है, जो वैराग्य देता है।

  3. केतु के अशुभ प्रभाव हेतु गणेश जी की पूजा करें।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अंक ज्योतिष में मूलांक का अधिक महत्व है। व्यक्ति की जन्म तारीख की मदद से मूलांक का पता लगाया जाता है। अंक ज्योतिष के अनुसार, व्यक्ति के मूलांक से उसकी कमजोरी और खूबियों के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है।

एक ऐसा मूलांक है, जो भीड़ में भी खुद को अकेला महसूस करता है और बहुत सारे लोगों के बीच रहने से इनकी ऊर्जा कम होने लगती है। अब आपके मन से सवाल आ रहा होगा कि वो कौन सा मूलांक है, जिनका मन भौतिक दुनिया से भर जाता है। ऐसे में आइए इस मूलांक के बारे में जानते हैं।

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कौन सा है वो मूलांक?

अंक ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो उनका मूलांक 7 होता है। इस मूलांक के ग्रह स्वामी केतु है। इसलिए मूलांक 7 वालों पर केतु का प्रभाव अधिक रहता है। इस मूलांक के लोग भीड़ में भी खुद को अकेला महसूस करते हैं।

केतु का होता है प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र में केतु को गहराई और वैराग्य का कारक माना जाता है। इसी वजह से मूलांक 7 वाले लोगों का मन भौतिक दुनिया के दिखावे से भर जाता है और ये फिर लोग अकेला महसूस करते हैं। ऐसा माना जाता है कि मूलांक 7 वाले अपनी बातों को किसी से साझा नहीं करते हैं। इनके मन में क्या चल रहा है। ये समझ पाना बहुत मुश्किल होता है।

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भरोसा करने में समय लेना- ये लोग किसी पर अधिक भरोसा नहीं करते हैं। इनकी दोस्ती बहुत ही कम लोगों के साथ होती है। जब तक भीड़ में इनको कोई भरोसेमंद व्यक्ति नहीं मिलता, तो ये लोग खुद भीड़ में अकेला महसूस करते हैं।

करनी पड़ती है अधिक मेहनत- इन लोगों को धन को कमाने के लिए करियर में मेहनत करनी पड़ती है। अधिक मेहनत की वजह से इनको करियर में सफलता प्राप्त होती है।

कैसे करें केतु को प्रसन्न?

केतु के अशुभ प्रभाव और प्रसन्न करने के लिए भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है।
अगर आप केतु के अशुभ प्रभाव को दूर करना चाहते हैं, तो बुधवार के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करें। इस दौरान प्रभु को दूर्वा अर्पित करें। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से कुंडली में केतु का अशुभ प्रभाव दूर होता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।