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दुनिया का पहली इलेक्ट्रिक कार कब और किसने बनाई थी? जानिए कैसे रातों-रात सड़कों से हो गईं गायब

Updated: Tue, 18 Aug 2026 09:00 PM (IST)

World First EV Car: इलेक्ट्रिक कारें आज का नहीं बल्कि 1890 के दशक का आविष्कार है। शुरुआत में लोकप्रियता के बाद पेट्रोल कारों के आने से ये गायब हो गईं।

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ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। आज जब हम सड़कों पर शांत और पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक गाड़ियां देखते हैं तो हमें लगता है कि यह 21वीं सदी का कोई मॉडर्न आविष्कार है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इतिहास उतना ही पुराना है जितना कि कारों का इतिहास। आज से 135 साल पहले यानी 1890 के दशक में ही दुनिया की पहली इलेक्ट्रिक कार बनकर तैयार हो चुकी थी।

इलेक्ट्रिक कार का शुरुआती दौर

1880 और 1890 के दशक में जब गाड़ियों का दौर शुरू हो चुका था तब स्टीम, पेट्रोल और इलेक्ट्रिक तीनों तकनीकों पर एक साथ काम चल रहा था। 1890 में अमेरिका के अयोवा राज्य में William Morrison नाम के केमिस्ट ने 6 लोगों के बैठने वाली एक इलेक्ट्रिक गाड़ी बनाई। इसकी टॉप-स्पीड 22kmph थी और इसे पहली व्यावहारिक इलेक्ट्रिक कार माना गया।

क्यों पसंद की गईं इलेक्ट्रिक गाड़ियां?

साल 1900 के आसपास अमेरिका में बनी कुल गाड़ियों में से लगभग एक-तिहाई इलेक्ट्रिक ही थीं और उस जमाने में लोग इन्हें बेहद पसंद करते थे। ऐसा इसलिए था क्योंकि पेट्रोल गाड़ियों की तरह इनमें से तेज आवाज और जहरीला धुआं नहीं निकलता था। इसके अलावा, उस समय पेट्रोल गाड़ियों को स्टार्ट करने के लिए भारी क्रैंक घुमाना पड़ता था। शहर के अंदर छोटी-मोटी यात्राओं के लिए ये सबसे कंफर्टेबल ऑप्शन मानी जाती थीं।

कैसे गायब हुई ये कारें?

1920 के दशक तक आते-आते इलेक्ट्रिक कारों का क्रेज अचानक खत्म होने लगा। इसके पीछे दो बड़ी वजहें थी, पहला था Henry Ford द्वारा सस्ती कीमतों में पेट्रोल कारों का बड़े स्तर पर उत्पादन। दूसरा, दुनिया भर में कच्चे तेल की खोज जिससे फ्यूल काफी सस्ता हो गया। पेट्रोल कारें एक बार में लंबा सफर तय कर सकती थीं जबकि उस समय बैटरी चार्जिंह इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी थी।

फिर इलेक्ट्रिक की मांग

लगभग एक सदी के बाद आज प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की वजह से दुनिया फिर से उसी मोड़ पर आकर खड़ी हो गई है। बैटरी तकनीक में सुधार के साथ इलेक्ट्रिक कारें एक बार फिर सड़कों पर वापसी कर चुकी हैं।

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