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अफसर हो तो ऐसा: भागलपुर DACO खुद सिखा रहे कैमरे की बारीकियां, आम्रपाली केंद्र में 40 युवाओं को मिल रही फ्री ट्रेनिंग

Updated: Wed, 19 Aug 2026 11:49 PM (IST)

भागलपुर के जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन युवाओं को निःशुल्क फोटोग्राफी का प्रशिक्षण दे रहे हैं। यह अनूठी पहल आम्रपाली केंद्र में 40 से अधिक छात्रों को स्वरोजगार के लिए कैमरे की बारीकियां सिखा रही है।

शास्त्रीय संगीत व नृत्य के साथ अब फोटोग्राफी सिखाने वाला बिहार का इकलौता केंद्र बना भागलपुर; 40 युवा ले रहे नि:शुल्क प्रशिक्षण

शास्त्रीय संगीत व नृत्य के साथ अब फोटोग्राफी सिखाने वाला बिहार का इकलौता केंद्र बना भागलपुर; 40 युवा ले रहे नि:शुल्क प्रशिक्षण

HighLights

  1. DCO अंकित रंजन निःशुल्क फोटोग्राफी प्रशिक्षण दे रहे हैं।

  2. आम्रपाली केंद्र में 40 युवा कैमरे की बारीकियां सीख रहे।

  3. प्रशिक्षण से स्वरोजगार और करियर के अवसर खुलेंगे।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। प्रशासनिक सेवा में अधिकारी तो बहुत आते हैं, लेकिन कुछ अपनी तैनाती को महज दफ्तरी औपचारिकता तक सीमित न रखकर अपने व्यक्तिगत हुनर से समाज में नई मिसाल कायम करते हैं। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी (DACO) अंकित रंजन भी ऐसे ही अधिकारियों में शामिल हैं।

भागलपुर में वर्ष 2024 में पदभार ग्रहण करने के बाद से उन्होंने कला और संस्कृति के संवर्धन के लिए कई अभिनव प्रयोग किए हैं, जिनमें सबसे खास है—फोटोग्राफी को सरकारी प्रशिक्षण की मुख्यधारा से जोड़ना।

सरकारी सेवा में आने से पूर्व पेशेवर फोटोग्राफर और प्राध्यापक रहे अंकित रंजन अब अपने इस हुनर को जिले के युवाओं तक पूरी तरह नि:शुल्क पहुंचा रहे हैं। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के अंतर्गत संचालित 'आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्रों' में अब तक केवल शास्त्रीय नृत्य, सुगम गायन और वाद्य वादन का प्रशिक्षण दिया जाता रहा है।

भागलपुर का आम्रपाली केंद्र पूरे बिहार का इकलौता ऐसा केंद्र बन गया है, जहां इन पारंपरिक विधाओं के साथ-साथ विधिवत फोटोग्राफी का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। मई 2026 से शुरू हुए इस विशेष कोर्स में हर छह माह पर नया बैच शुरू किया जाएगा।

40 से अधिक युवा सीख रहे कैमरे की तकनीकी बारीकियां

वर्तमान में आम्रपाली केंद्र में 40 छात्र-छात्राएं और युवा कैमरे की बारीकियां सीख रहे हैं। अंकित रंजन ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान केवल कैमरा चलाना ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि तकनीकी रूप से शटर स्पीड, अपर्चर, आइएसओ (ISO), फोकस, एक्सपोजर, फ्रेमिंग, कंपोजिशन, प्रकाश की दिशा, लेंस का चयन और डेप्थ ऑफ फील्ड जैसी जटिल तकनीकों को प्रायोगिक तरीके से समझाया जाता है।

इसके साथ ही पोर्ट्रेट, लैंडस्केप, स्ट्रीट और डॉक्यूमेंट्री फोटोग्राफी के माध्यम से 'तस्वीर से कहानी बयां करने' (Visual Storytelling) की कला विकसित की जा रही है, ताकि यह हुनर युवाओं के लिए सिर्फ शौक न रहकर भविष्य में सम्मानजनक स्वरोजगार और करियर का मजबूत आधार बन सके।

फील्ड में फोटो वॉक, प्रदर्शनी और मिलेगा सरकारी सर्टिफिकेट

प्रशिक्षण को केवल क्लासरूम तक सीमित न रखकर समय-समय पर 'फोटो वॉक' और 'फोटो टॉक' का आयोजन किया जाता है। प्रशिक्षुओं को ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों पर ले जाकर लाइव फोटोग्राफी कराई जाती है। हाल ही में विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला के दौरान करीब दो दर्जन युवाओं को मेला क्षेत्र का भ्रमण कराकर विभिन्न मानवीय और सांस्कृतिक गतिविधियों को कैमरे में कैद कराया गया।

प्रशिक्षुओं द्वारा खींची गई तस्वीरों की बाकायदा प्रदर्शनी भी लगाई जाती है, जिसमें अब तक पिंटू कुमार, कृष्णा और चांदनी कुमारी के छायाचित्रों की प्रदर्शनी लग चुकी है। कोर्स पूरा होने के बाद सभी प्रशिक्षुओं को कला एवं संस्कृति विभाग का अधिकृत सर्टिफिकेट मिलेगा, जो मीडिया, विज्ञापन और फ्रीलांसिंग के क्षेत्र में रोजगार के अवसर खोलेगा।

अध्यापन से लेकर पीएचडी तक का सफर

अंकित रंजन ने लखनऊ विश्वविद्यालय से मास्टर इन विजुअल आर्ट (फोटोग्राफी) की उच्च शिक्षा प्राप्त की है और वे फोटोग्राफी विषय में ही पीएचडी भी कर रहे हैं। प्रशासनिक सेवा में आने से पूर्व वे निफ्ट (NIFT) पटना और एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अतिथि संकाय (गेस्ट फैकल्टी) के रूप में अध्यापन करा चुके हैं। उनका यह प्रयास प्रशासनिक संवेदनशीलता और युवाओं के कौशल विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है।