भागलपुर : बच्चों को खेल सिखाने वाले शिक्षक खुद रोजी की दौड़ में, कोई झालमुड़ी बेच रहा तो कोई अगरबत्ती
भागलपुर के शारीरिक शिक्षा अनुदेशक चार माह से मानदेय न मिलने के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। स्कूल के बाद वे झालमुड़ी बेचने, फूड डिलीवरी करने और अगरबत्ती बेचने जैसे काम करने को मजबूर हैं।

जिले के 95 से अधिक शारीरिक शिक्षक-स्वास्थ्य अनुदेशकों का वेतन बकाया; ₹16 हजार के अल्प मानदेय से परिवार चलाना हुआ दूभर
HighLights
भागलपुर में शारीरिक शिक्षकों को 4 माह से मानदेय नहीं मिला।
शिक्षक झालमुड़ी बेचकर, डिलीवरी कर परिवार पालने को मजबूर।
शिक्षा विभाग ने नया आवंटन मिलने पर भुगतान का आश्वासन दिया।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। सुबह स्कूल के मैदान में बच्चों को पीटी कराने वाले हाथ, ड्यूटी खत्म होते ही परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए रोजी की तलाश में निकल पड़ते हैं। भागलपुर में वर्ष 2022 में नियुक्त शारीरिक शिक्षक एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों की जिंदगी की यह तस्वीर सरकारी व्यवस्था की एक ऐसी विडंबना सामने लाती है, जिस पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सन्हौला के अमडंडा मध्य विद्यालय में कार्यरत निशांत कुमार स्कूल में करीब दो घंटे ड्यूटी के बाद विद्यालय के बाहर झालमुड़ी और स्टेशनरी की दुकान लगाते हैं। जिन बच्चों को कुछ देर पहले वह मैदान में पीटी करा रहे होते हैं, वही बच्चे उनकी दुकान पर झालमुड़ी खरीदते दिखाई देते हैं।
राजांदीपुर मध्य विद्यालय में कार्यरत अमित कुमार स्कूल के बाद बाइक से जोमैटो की डिलीवरी करते हैं। वहीं लोदीपुर उर्दू विद्यालय के मणिकांत कुमार घूम-घूमकर अगरबत्ती बेचकर परिवार चलाते हैं। तीनों की नियुक्ति वर्ष 2022 में हुई थी। अनुदेशकों का कहना है कि पूर्णकालिक नियुक्ति और सम्मानजनक मानदेय मिले तो बच्चों को खेल सिखाने वाले इन शिक्षकों को परिवार का पेट पालने के लिए अतिरिक्त काम नहीं करना पड़ेगा। निशांत के अनुसार, नियुक्ति के समय आठ हजार रुपये मानदेय मिलता था, जो संघर्ष के बाद बढ़कर 16 हजार रुपये हुआ।
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रोज 300 से 400 रुपये की अतिरिक्त कमाई
निशांत बताते हैं कि स्कूल में करीब दो घंटे की ड्यूटी के बाद वह विद्यालय के बाहर झालमुड़ी और स्टेशनरी की दुकान लगाते हैं। इससे प्रतिदिन करीब 300 से 400 रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो जाती है। शुरुआत में दुकान लगाने में उन्हें काफी संकोच होता था, लेकिन परिवार की जरूरतों ने उन्हें यह काम करने के लिए मजबूर किया। निशांत का कहना है कि यदि उन्हें पूर्णकालिक किया जाए और सम्मानजनक वेतन मिले तो उन्हें अतिरिक्त काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनका कहना है कि जिले में कई शारीरिक शिक्षक दूसरे छोटे-मोटे काम कर परिवार चलाने को मजबूर हैं।
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95 से अधिक शिक्षक, चार माह से भुगतान लंबित
जिले में करीब 95 से अधिक शारीरिक शिक्षक एवं स्वास्थ्य अनुदेशक कार्यरत हैं। आवंटन नहीं होने के कारण पिछले चार माह से इन्हें मानदेय की राशि नहीं मिली है। शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक संघ के जिला अध्यक्ष अभय मिश्रा ने कहा कि चार वर्षों से पूर्णकालिक नियुक्ति और सम्मानजनक मानदेय की मांग लंबित है।
कम मानदेय के बावजूद चार महीने से वेतन नहीं मिला है। आर्थिक संकट में शिक्षक झालमुड़ी, डिलीवरी और अगरबत्ती बेचने को मजबूर हैं। सरकार जल्द मांगें पूरी करे। जिला शिक्षा विभाग के अनुसार, शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों के लिए एक वर्ष का आवंटन भेजा गया था। मई तक आवंटन प्राप्त होने के कारण उस अवधि तक की राशि का भुगतान कर दिया गया है। अब लंबित मानदेय का भुगतान नए आवंटन के प्राप्त होने के बाद ही किया जाएगा।
