ट्रक ड्राइवर की बेटी का कमाल: गया की खुशबू ने BPSC में लहराया परचम, अब IAS बनने का है सपना
फतेहपुर, गया की खुशबू कुमारी ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बीपीएससी परीक्षा में 853वीं रैंक हासिल कर बाल संरक्षण पदाधिकारी का पद प्राप्त किया है।

गया की खुशबू ने BPSC में लहराया परचम, अब IAS बनने का है सपना
HighLights
खुशबू कुमारी ने बीपीएससी में 853वीं रैंक हासिल की।
ट्रक चालक की बेटी बनीं बाल संरक्षण पदाधिकारी।
सरकारी संस्थानों से पढ़ाई कर हासिल किया यह मुकाम।
हिमांशु गौतम, फतेहपुर (गया)। जिंदगी ने कम उम्र में ही खुशबू कुमारी के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दीं। पढ़ाई और खेलकूद की उम्र में मां का साया सिर से उठ गया।
परिवार की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि हर सपना आसानी से पूरा हो सके, लेकिन खुशबू ने कठिन परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बनाया।
पिता ने ट्रक चलाकर परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं, तो बेटी ने मेहनत और लगन से सफलता की राह तैयार की।
आज फतेहपुर प्रखंड के मनहोना गांव की खुशबू ने बीपीएससी परीक्षा में 853वीं रैंक हासिल कर बाल संरक्षण पदाधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया है।
फिलहाल, वह पटना के बाद सिक्किम में प्रशिक्षण ले रही है। उनकी सफलता क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है।
सरकारी संस्थानों में पढ़ाई कर हासिल किया मुकाम
कठौतिया केवाल पंचायत के मनहोना गांव निवासी खुशबू ने प्रारंभिक शिक्षा से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई सरकारी शिक्षण संस्थानों में पूरी की।
उन्होंने झारखंड के बसेढ़िया स्थित डॉ. बसंत नारायण सिंह उच्च विद्यालय से मैट्रिक और राम सहाय उच्च विद्यालय, फतेहपुर से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की।
इसके बाद गया के जगजीवन कालेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी रहीं।
मां की याद और पिता का संघर्ष बनी ताकत
वर्ष 2021 में मां के निधन ने खुशबू को गहरा आघात पहुंचाया। इस मुश्किल दौर में पिता उमेश प्रसाद यादव ने परिवार को संभाला। वह ट्रक चलाकर बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च उठाते रहे।
पत्नी के निधन के बाद उन्होंने ट्रक चलाना छोड़ दिया और गांव में रहकर खेती-किसानी के सहारे परिवार की जिम्मेदारी संभाली। पिता का संघर्ष और बेटी पर उनका भरोसा खुशबू के लिए प्रेरणा बना।
पिता को बेटी की उपलब्धि पर गर्व है, लेकिन उन्हें इस बात की कसक भी है कि काश, उसकी मां आज यह दिन देखने के लिए जीवित होतीं।
दूसरे प्रयास में सफलता, अब आईएएस बनने का सपना
तीन बहनों में सबसे बड़ी खुशबू को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में बड़े भाई संदीप कुमार का भी सहयोग मिला। उत्तर प्रदेश पुलिस में एसआइ संदीप ने बहन का हौसला बढ़ाया और हर कदम पर साथ दिया।
खुशबू ने दूसरे प्रयास में बीपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी प्रतिभा साबित की। अब उनका लक्ष्य आईएएस अधिकारी बनना है।
उनकी कहानी बताती है कि अभाव और विपरीत परिस्थितियां मंजिल की राह रोक नहीं सकतीं, बशर्ते इरादे मजबूत हों और मेहनत लगातार जारी रहे।
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