जसीडीह आउटर पर नहीं रुकेंगी ट्रेनें! 293 करोड़ की रेल बाईपास लाइन तैयार, देवघर-पटना रूट पर बचेंगे 45 मिनट, इंजन बदलने का झंझट खत्म
Jasidih Deoghar Rail Bypass Line: जसीडीह जंक्शन पर ट्रेनों के आउटर जाम और इंजन रिवर्सल की समस्या को खत्म करने ...और पढ़ें

Jasidih Deoghar Rail Bypass Line: कुमड़ाबाद-देवघर 5 किमी रेल बाईपास का CRS निरीक्षण पूरा, जसीडीह में नहीं बदलेगा इंजन; 45 मिनट बचेंगे
HighLights
293 करोड़ की 5 किमी रेल बाईपास लाइन पूरी।
जसीडीह में आउटर जाम, इंजन रिवर्सल से मिलेगी मुक्ति।
यात्रियों का 45 मिनट से 1 घंटा समय बचेगा।
संवाद सूत्र, सिमुलतला (जमुई)।Jasidih Deoghar Rail Bypass Line: पटना, जमुई, झाझा, बांका, भागलपुर और मुंगेर क्षेत्र के लाखों रेल यात्रियों के सफर को सुगम और तेज बनाने की दिशा में भारतीय रेल ने एक बड़ा मील का पत्थर पार कर लिया है। कुमड़ाबाद रोहिणी से देवघर लिंक केबिन के बीच 293 करोड़ रुपये की भारी लागत से निर्मित 5 किलोमीटर लंबी रेल बाईपास लाइन का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। गुरुवार को पूर्वी सर्किल (कोलकाता) के रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने मोटर ट्रॉली के जरिए ट्रैक का चप्पा-चप्पा खंगाला और गहन संरक्षा निरीक्षण किया।
इस दौरान रेलवे के अत्याधुनिक ओएमएस-2000 (ऑसिलेशन मॉनिटरिंग सिस्टम) तकनीक के जरिए ट्रैक की मजबूती, सिग्नलिंग सिस्टम और स्पीड ट्रायल की गहनता से परख की गई। सभी तकनीकी मानकों पर खरा उतरने के बाद सुरक्षा क्लीयरेंस मिलने की औपचारिकता शेष है। अधिकारियों के मुताबिक, हरी झंडी मिलते ही सितंबर के अंत तक इस नए और महत्वपूर्ण रेलखंड पर ट्रेनों का नियमित परिचालन शुरू कर दिया जाएगा।
आउटर के जाम और इंजन रिवर्सल के झंझट से मुक्ति
इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का सबसे सीधा और प्रभावी लाभ जमुई, झाझा, सिमुलतला और आसपास के उपनगरीय व ग्रामीण इलाकों के यात्रियों को मिलेगा। झाझा-जमुई के रास्ते बांका और देवघर की ओर जाने वाली ट्रेनों को अक्सर जसीडीह जंक्शन पर प्लेटफॉर्म खाली न होने के कारण आउटर सिग्नल पर 30 से 45 मिनट तक अकारण खड़ा रहना पड़ता था। इस बाईपास लाइन के चालू होने से ट्रेनों को आउटर पर रोके जाने की यह पुरानी समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।
- कुमड़ाबाद रोहिणी से देवघर लिंक केबिन के बीच 293 करोड़ रुपये की लागत से 5 किमी लंबी रेल बाईपास लाइन बनकर तैयार
- पूर्वी सर्किल (कोलकाता) के रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) ने मोटर ट्रॉली और आधुनिक OMS-2000 तकनीक से किया संरक्षा व स्पीड ट्रायल
- जसीडीह जंक्शन पर इंजन रिवर्सल (दिशा बदलने) और आउटर पर 45 मिनट तक खड़े रहने की मजबूरी से मुसाफिरों को मिली निजात
- झाझा, जमुई, सिमुलतला, बांका, भागलपुर और मुंगेर के रेल यात्रियों के सफर में बचेगा 45 मिनट से 1 घंटे तक का कीमती समय
इसके अलावा, अब तक हावड़ा, कोलकाता या रांची से देवघर होकर आने वाली ट्रेनों को आगे रवाना करने के लिए जसीडीह में इंजन की दिशा बदलने (इंजन रिवर्सल) में 40 से 45 मिनट की अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती थी। नए बाईपास के अस्तित्व में आने से ट्रेनें बिना जसीडीह में इंजन बदले सीधे अपने गंतव्य की ओर सरपट दौड़ सकेंगी। इससे पूरे सफर में यात्रियों का लगभग 45 मिनट से लेकर 1 घंटे तक का बहुमूल्य समय बचेगा।
मेन लाइन पर दबाव घटेगा, ट्रेनों की पंक्चुएलिटी में होगा सुधार
पटना से खुलकर लखीसराय, जमुई, झाझा के रास्ते बांका, गोड्डा और दुमका की ओर जाने वाली ट्रेनों के साथ-साथ मुंगेर व भागलपुर क्षेत्र के जो यात्री जसीडीह-देवघर रूट होकर पटना अथवा हावड़ा की यात्रा करते हैं, उनके लिए यह बाईपास वरदान साबित होगा। जसीडीह जंक्शन पर ट्रेनों का बेवजह ठहराव समाप्त होने से प्लेटफॉर्म पर होने वाली जाम की स्थिति से बड़ी राहत मिलेगी।
इसका सीधा और सकारात्मक असर पटना-हावड़ा मुख्य रेलमार्ग की लंबी दूरी की राजधानी, दुरंतो, सुपरफास्ट, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के समयपालन (पंक्चुएलिटी) पर देखने को मिलेगा। सबसे अहम बात यह है कि भविष्य में यदि पटना-हावड़ा मेन लाइन पर कभी कोई तकनीकी खराबी या अवरोध आता है, तो यह नया बाईपास मार्ग जमुई, बांका और अंग क्षेत्र के लिए एक मजबूत और सुरक्षित वैकल्पिक लाइफलाइन साबित होगा, जिससे ट्रेनों को घंटों डायवर्ट करने की नौबत नहीं आएगी।
सिमुलतला (जमुई)। पटना, जमुई, झाझा, बांका, भागलपुर और मुंगेर क्षेत्र के लाखों रेल यात्रियों के सफर को सुगम और तेज बनाने की दिशा में भारतीय रेल ने एक बड़ा मील का पत्थर पार कर लिया है। कुमड़ाबाद रोहिणी से देवघर लिंक केबिन के बीच 293 करोड़ रुपये की भारी लागत से निर्मित 5 किलोमीटर लंबी रेल बाईपास लाइन का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। गुरुवार को पूर्वी सर्किल (कोलकाता) के रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने मोटर ट्रॉली के जरिए ट्रैक का चप्पा-चप्पा खंगाला और गहन संरक्षा निरीक्षण किया।
इस दौरान रेलवे के अत्याधुनिक ओएमएस-2000 (ऑसिलेशन मॉनिटरिंग सिस्टम) तकनीक के जरिए ट्रैक की मजबूती, सिग्नलिंग सिस्टम और स्पीड ट्रायल की गहनता से परख की गई। सभी तकनीकी मानकों पर खरा उतरने के बाद सुरक्षा क्लीयरेंस मिलने की औपचारिकता शेष है। अधिकारियों के मुताबिक, हरी झंडी मिलते ही सितंबर के अंत तक इस नए और महत्वपूर्ण रेलखंड पर ट्रेनों का नियमित परिचालन शुरू कर दिया जाएगा।
[सब-हेडिंग: आउटर के जाम और इंजन रिवर्सल के झंझट से मुक्ति]
इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का सबसे सीधा और प्रभावी लाभ जमुई, झाझा, सिमुलतला और आसपास के उपनगरीय व ग्रामीण इलाकों के यात्रियों को मिलेगा। झाझा-जमुई के रास्ते बांका और देवघर की ओर जाने वाली ट्रेनों को अक्सर जसीडीह जंक्शन पर प्लेटफॉर्म खाली न होने के कारण आउटर सिग्नल पर 30 से 45 मिनट तक अकारण खड़ा रहना पड़ता था। इस बाईपास लाइन के चालू होने से ट्रेनों को आउटर पर रोके जाने की यह पुरानी समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।
इसके अलावा, अब तक हावड़ा, कोलकाता या रांची से देवघर होकर आने वाली ट्रेनों को आगे रवाना करने के लिए जसीडीह में इंजन की दिशा बदलने (इंजन रिवर्सल) में 40 से 45 मिनट की अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती थी। नए बाईपास के अस्तित्व में आने से ट्रेनें बिना जसीडीह में इंजन बदले सीधे अपने गंतव्य की ओर सरपट दौड़ सकेंगी। इससे पूरे सफर में यात्रियों का लगभग 45 मिनट से लेकर 1 घंटे तक का बहुमूल्य समय बचेगा।
[सब-हेडिंग: मेन लाइन पर दबाव घटेगा, ट्रेनों की पंक्चुएलिटी में होगा सुधार]
पटना से खुलकर लखीसराय, जमुई, झाझा के रास्ते बांका, गोड्डा और दुमका की ओर जाने वाली ट्रेनों के साथ-साथ मुंगेर व भागलपुर क्षेत्र के जो यात्री जसीडीह-देवघर रूट होकर पटना अथवा हावड़ा की यात्रा करते हैं, उनके लिए यह बाईपास वरदान साबित होगा। जसीडीह जंक्शन पर ट्रेनों का बेवजह ठहराव समाप्त होने से प्लेटफॉर्म पर होने वाली जाम की स्थिति से बड़ी राहत मिलेगी।
इसका सीधा और सकारात्मक असर पटना-हावड़ा मुख्य रेलमार्ग की लंबी दूरी की राजधानी, दुरंतो, सुपरफास्ट, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के समयपालन (पंक्चुएलिटी) पर देखने को मिलेगा। सबसे अहम बात यह है कि भविष्य में यदि पटना-हावड़ा मेन लाइन पर कभी कोई तकनीकी खराबी या अवरोध आता है, तो यह नया बाईपास मार्ग जमुई, बांका और अंग क्षेत्र के लिए एक मजबूत और सुरक्षित वैकल्पिक लाइफलाइन साबित होगा, जिससे ट्रेनों को घंटों डायवर्ट करने की नौबत नहीं आएगी।
