10 हजार के कर्ज से बदली किस्मत, किशनगंज की प्रतिमा दीदी गोलगप्पे-चाट बेचकर हर महीने कमा रहीं 15 हजार रुपये
किशनगंज की प्रतिमा देवी ने जीविका समूह से 10 हजार का ऋण लेकर गोलगप्पे-चाट का व्यवसाय शुरू किया। आज वह ...और पढ़ें

किशनगंज के पोठिया में अपनी चलंत गोल-गप्पा सह चाट दुकान पर काम करतीं जीविका दीदी प्रतिमा देवी।
HighLights
जीविका समूह से 10 हजार का ऋण लेकर शुरू किया गोलगप्पा व्यवसाय।
प्रतिमा देवी गोलगप्पे-चाट बेचकर कमा रहीं 15 हजार रुपये मासिक आय।
गरीबी से निकलकर बनीं सफल उद्यमी, खरीदी जमीन, बच्चों को अच्छी शिक्षा।
संवाद सहयोगी, किशनगंज। दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन मिले तो गरीबी और तंगहाली भी तरक्की के रास्ते में रोड़ा नहीं बन सकती। इसे साबित कर दिखाया है किशनगंज जिले के पोठिया प्रखंड की रहने वाली प्रतिमा देवी (दीदी) ने।
कभी पति के साथ मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पेट पालने वाली प्रतिमा दीदी आज जीविका समूह के सहयोग से एक सफल महिला उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।
जीविका स्वयं सहायता समूह से मात्र 10 हजार रुपये का ऋण लेकर शुरू किए गए गोल-गप्पा और चाट के कारोबार ने न केवल उनके परिवार को गरीबी के दलदल से बाहर निकाला, बल्कि उनके सपनों को एक नई उड़ान भी दी है।
मजदूरी के दिनों को पीछे छोड़ शुरू किया स्वरोजगार
प्रतिमा दीदी बताती हैं कि एक समय उनका पूरा परिवार भयंकर गरीबी में जीवन व्यतीत करने को मजबूर था। वे अपना खुद का कोई स्वरोजगार शुरू करना चाहती थीं, लेकिन पूंजी का अभाव सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ था। वर्ष 2019 में उनके जीवन में नया मोड़ तब आया जब वे जीविका समूह से जुड़ीं।
समूह से 10 हजार रुपये का आसान ऋण लेकर उन्होंने गोल-गप्पा और चाट की एक चलंत (मोबाइल) दुकान की शुरुआत की। हर रोज सुबह से ही उनकी तैयारी शुरू हो जाती है। मेहनत का फल यह मिला कि आज इस छोटी सी दुकान से उन्हें हर महीने 12 से 15 हजार रुपये तक की पक्की आमदनी हो रही है।
खरीदी जमीन, बच्चों को मिल रही बेहतर शिक्षा
आर्थिक स्थिति सुधरने से प्रतिमा दीदी के परिवार का रहन-सहन पूरी तरह बदल गया है। अपनी दुकान की बचत से उन्होंने हाल ही में दो कट्ठा जमीन भी खरीदी है। अब वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला पा रही हैं।
आत्मविश्वास से लबरेज प्रतिमा दीदी बताती हैं कि जीविका से जुड़ने के बाद उनका क्षमतावर्धन हुआ और उन्हें बैंकिंग, ऋण प्रबंधन व बचत का व्यावहारिक ज्ञान मिला।
अब वे अपनी इस दुकान का और विस्तार करने को लेकर काफी उत्साहित हैं तथा जल्द ही एक नया फास्ट फूड काउंटर भी शुरू करने जा रही हैं। मजदूर से उद्यमी बनने का उनका यह सफर क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गया है।
