लखीसराय मंदिर हादसा: कमजोर बैरिकेडिंग और बिजली पोल पर उठे सवाल, भीड़ नियंत्रण के दावों की खुली पोल
Lakhisarai Ashokdham Temple Stampede: अशोकधाम में सावन की तीसरी सोमवारी को हुई भगदड़ में सात महिलाओं की मौत हो गई और 27 श्रद्धालु घायल हुए।

अशोकधाम में भगदड़ के बाद क्षतिग्रस्त बैरिकेडिंग देखते पुलिस जवान। (जागरण)
HighLights
7 महिलाओं की मौत, 27 श्रद्धालु घायल हुए भगदड़ में।
कमजोर बांस की बैरिकेडिंग और बिजली पोल बना हादसे की वजह।
प्रशासनिक सुरक्षा इंतजामों और भीड़ नियंत्रण पर गंभीर सवाल।
संवाद सहयोगी, लखीसराय। Ashokdham Temple Stampede: अशोकधाम में सावन की तीसरी सोमवारी की सुबह हुई भगदड़ ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए किए गए प्रशासनिक इंतजाम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि एक पुरुष सहित 27 श्रद्धालु घायल हुए हैं। मौके की स्थिति और सामने आए तथ्यों से प्रथमदृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि भीड़ नियंत्रण के लिए किए गए इंतजाम ही हादसे के दौरान जानलेवा साबित हुए।
श्रद्धालुओं की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए लगाए गए बैरिकेडिंग में मजबूत संरचना के बजाय कमजोर बांस का इस्तेमाल किया गया था।

घटनास्थल के पास ही गिरा विद्युत पोल और तार।
बैरिकेडिंग के दूसरी तरफ खेत की ओर खाई थी। सबसे गंभीर बात यह रही कि बैरिकेडिंग को सहारा देने के लिए एक बिजली पोल को भी खंभे के रूप में इस्तेमाल कर लिया गया था। यानी जिस स्थान पर हजारों श्रद्धालुओं के दबाव को नियंत्रित करने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत थी, वहां अस्थायी और कमजोर इंतजाम किए गए थे।
सुबह जैसे-जैसे भीड़ का दबाव बढ़ा, कमजोर बांस की बैरिकेडिंग दबाव नहीं झेल सकी और टूट गई। इसी दौरान बैरिकेडिंग के खंभे के रूप में इस्तेमाल किया गया बिजली पोल भी खेत की तरफ गिर गया।
इसके बाद बिजली के तार से चिंगारी निकलने और करंट के झटके की स्थिति उत्पन्न होने की बात सामने आई। अचानक चिंगारी और बिजली के झटके से श्रद्धालुओं में भय फैल गया। घनी भीड़ के बीच लोगों को सुरक्षित निकलने का रास्ता समझ में नहीं आया और बचने की कोशिश में भगदड़ मच गई।
भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था पर उठे सवाल
हादसे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब प्रशासन को पहले से सोमवारी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान था तो बैरिकेडिंग की मजबूती की जांच क्यों नहीं की गई।

टूटी बैरिकेडिंग और बिखरे हुए कपड़े।
जिस स्थान पर खेत की तरफ खाई थी, वहां भीड़ के दबाव की स्थिति में वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग या मजबूत अवरोध की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
बिजली के पोल को बैरिकेडिंग के सहारे के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति किस स्तर पर दी गई, यह भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है। इतनी बड़ी भीड़ वाले धार्मिक आयोजन में अस्थायी बैरिकेडिंग के साथ बिजली व्यवस्था को जोड़ना सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चूक मानी जा रही है।
यदि भीड़ बढ़ने से पहले बैरिकेडिंग और बिजली लाइन की तकनीकी जांच कर ली जाती तथा आपात स्थिति में श्रद्धालुओं के निकलने के लिए पर्याप्त सुरक्षित रास्ता रखा जाता तो हादसे की भयावहता को कम किया जा सकता था।
अब जांच में केवल भगदड़ की वजह तलाशना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी तय करना जरूरी है कि सुरक्षा योजना तैयार करने, उसे मौके पर लागू करने और उसकी निगरानी करने में किस स्तर पर चूक हुई।
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