मन की बात में बोले PM नरेन्द्र मोदी- 'ग्रीस तक पहुंचा पूर्णिया का मखाना'; बिहार के किसानों को मिला वैश्विक बाजार
Mann Ki Baat PM Modi Purnea Makhana: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' में बिहार के मखाना की वैश्विक ...और पढ़ें

Mann Ki Baat PM Modi Purnea Makhana: पूर्णिया में तैयार सुपरफूड मखाना और 'मन की बात' के जरिए वैश्विक पटल पर इसकी सफलता की सराहना करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
HighLights
PM मोदी ने 'मन की बात' में मखाना का जिक्र किया।
पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस के बाजारों तक पहुंचा।
'वोकल फॉर लोकल' से किसानों को मिला वैश्विक बाजार।
डिजिटल डेस्क, पूर्णिया/भागलपुर। Mann Ki Baat PM Modi Purnea Makhana: बिहार के सीमांचल की आबोहवा में तैयार होने वाले 'सफेद सोने' यानी मखाना की चमक अब वैश्विक पटल पर छा गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में बिहार के मखाना की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग का विशेष उल्लेख किया।
उन्होंने गर्व के साथ देशवासियों को बताया कि किस तरह 'वोकल फॉर लोकल' की भावना और आधुनिक पैकेजिंग के बल पर बिहार के पूर्णिया का मखाना अब यूरोपीय देश ग्रीस (यूनान) के बाजारों तक अपनी मजबूत दस्तक दे चुका है।
'मन की बात' में गूंजा पूर्णिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्योहारों के मौसम में देशवासियों से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए कहा कि जब हम अपने कारीगरों और किसानों की उपज खरीदते हैं, तो उनका आत्मबल बढ़ता है।
किसानों के लिए दुनिया में खुले नए द्वार
पीएम मोदी ने कहा,"त्योहारों के इस मौसम में आप सभी ने अपने आस-पास एक बदलाव जरूर महसूस किया होगा। अब लोग खरीदारी करते समय स्वदेशी उत्पादों को बहुत महत्व देने लगे हैं। 'वोकल फॉर लोकल' की ये भावना अब हमारे उत्पादों को दुनिया के बाजारों तक पहुंचा रही है।
बिहार का मखाना: खेत से विदेश तक
पीएम नरेन्द्र मोदी का संबोधन: 'मन की बात' (25 अक्टूबर 2026)।
वैश्विक गंतव्य: बिहार के पूर्णिया का मखाना सीधे यूरोपीय देश ग्रीस (यूनान) तक निर्यात।
सीमांचल की हिस्सेदारी: देश के कुल मखाना उत्पादन का 85% से अधिक हिस्सा बिहार में होता है; पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज इसके सबसे बड़े उत्पादन व प्रसंस्करण केंद्र हैं।
सफलता का मंत्र: 'वोकल फॉर लोकल', अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैकेजिंग, उच्च गुणवत्ता और स्थानीय किसानों का एफपीओ (FPO) मॉडल।
अन्य उल्लेख: कर्नाटक के कलबुर्गी की तूर/अरहर दाल का मालदीव निर्यात।
बिहार के पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस पहुंच रहा है। कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल अब मालदीव जा रही है, यानी भारत के किसानों के लिए दुनिया में नए बाजार खुल रहे हैं।" प्रधानमंत्री ने स्थानीय उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग को इस निर्यात क्रांति का प्रमुख आधार बताया।
देश का 85% से अधिक उत्पादन
वैश्विक स्तर पर 'सुपरफूड' के रूप में विख्यात मखाना के उत्पादन में बिहार का कोई सानी नहीं है। विश्व और देश के कुल मखाना उत्पादन का 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा अकेले बिहार से आता है। इसमें भी पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया समेत सीमांचल का इलाका सबसे अग्रणी भूमिका निभाता है।
पूर्णिया-कटिहार बना मखाना राजधानी
विशेष रूप से पूर्णिया मखाना के थोक व्यापार, ग्रेडिंग, फोड़ने (पॉपिंग) और पैकेजिंग का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। यहां की नम दोमट मिट्टी, जलजमाव वाले प्राकृतिक तालाब और किसानों की पारंपरिक कुशलता ने पूर्णिया और कटिहार को देश का सबसे बड़ा मखाना गलियारा बना दिया है।
पहले जहां मखाना केवल स्थानीय स्तर पर कच्चा बिकता था, वहीं अब किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और युवा उद्यमियों के प्रयासों से इसे प्रोसेस्ड और उच्च गुणवत्ता वाली पैकेजिंग के साथ सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जा रहा है।
वोकल फॉर लोकल से आत्मनिर्भर भारत की राह
प्रधानमंत्री ने त्योहारों पर स्वदेशी उत्पादों को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि त्योहारों में खरीदारी करते समय स्थानीय कारीगरों और किसानों के उत्पादों को प्रमुखता दें। उन्होंने कहा,"आपकी खरीदारी से उनका उत्साह बढ़ेगा। आपका यह अपनापन 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को और आगे ले जाएगा, और जितना यह अभियान आगे बढ़ेगा, उतनी ही तेजी से आत्मनिर्भर भारत का सपना भी पूरा होगा।"
पूर्णिया के मखाना का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय संघ के मानकों के अनुरूप प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के चलते ही यह उत्पाद ग्रीस जैसे कड़े गुणवत्ता मानकों वाले देशों में स्वीकार किया गया है, जो बिहार के सीमांचल के लाखों किसानों की आय में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।
यह भी पढ़ें- कटिहार में मखाना बना समृद्धि की चाबी! मखदुमपुर में घर-घर प्रोसेसिंग से बढ़ी कमाई, ऑनलाइन विदेश तक पहुंचा बाजार
यह भी पढ़ें- कोसी के मखाने की देशभर में बढ़ी मांग, सहरसा से हर दिन दूसरे राज्यों में जा रहा 50 बोरा मखाना
यह भी पढ़ें- बिहार में देसी मछलियों का संकट: मखाना की खेती और कीटनाशक बन रहे विलुप्ति का कारण
