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खेत बेचकर शादी का था दबाव: रोहतास की बेटी ने पहले ही प्रयास में पास की परीक्षा, दिल्ली पुलिस में बनीं SI

Published: Wed, 04 Nov 2026 09:30 AM (IST)

रश्मि किरण ने नक्सल प्रभावित गांव से निकलकर, पारिवारिक त्रासदी और आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर का पद हासिल किया।

दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर रश्मि किरण। (जागरण)

दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर रश्मि किरण। (जागरण)

HighLights

  1. नक्सल प्रभावित गांव से दिल्ली पुलिस सब-इंस्पेक्टर बनीं रश्मि।

  2. पारिवारिक त्रासदी और आर्थिक चुनौतियों को पार कर हासिल की सफलता।

  3. ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई पूरी की, बनीं प्रेरणास्रोत।

संवाद सहयोगी, डेहरी आन सोन (रोहतास)। गर हौसला बुलंद हो तो आसमां में सुराग कर सकते हो तबीयत से एक पत्थर तो उछालो यारो।

कविता को चरित्रार्थ कर दिखाई सुदूर नक्सल प्रभावित नौहट्टा प्रखंड के खैरवा खुर्द गांव की रश्मि किरण। ग्रामीण वर्ष 2011 में इंटरमीडिएट में रश्मि पढ़ रही थी।

घर खर्च अवकाश प्राप्त शिक्षक राम व्यास तिवारी (दादाजी) के पेंशन से पढ़ाई कर रही थी। पिता कृषक थे। घर में एक वर्ष में दादा-दादी और पिता अजय तिवारी की मौत हो गई।

घर गृहस्ती बैठ सा गया। रिश्तेदार कहने लगे कि खेत बेंचकर बेटी की विवाह कर दीजिए। सबकी बातों को नजरअंदाज कर ट्यूशन पढ़ा कर सासाराम शंकर महाविद्यालय में इंटरमीडिएट वर्ष 2012 में पास कर अपना पढ़ाई निरंतर जारी रखी।

वर्ष 2015 में स्नातक प्रतिष्ठा पास कर सरकारी नौकरी की तैयारी करने लगी। एक तरफ घर और पढ़ाई के लिए खर्च इकठ्ठा करना दूसरे तरफ पढ़ाई पूरी करते रही।

रश्मि कहती है कि आदर्श विद्यालय से आठवीं कक्षा पास कर महादेव पूरी उच्च विद्यालय भदारा से मैट्रिक पास कर पढ़ाई जारी रखी। हमारे सामने दुखों का पहाड़ आ पड़ा।

हमें लगा कि अब तो सब कुछ खत्म सा हो गया। अब हमारे पास कुछ भी नहीं रहा। वह समय ऐसा था कि जब हमारे साथ हमें कोई हौसला देने के लिए भी नहीं था और मेरी मां के कंधे पर हाथ रखने वाला कोई रिश्तेदार नहीं आता था।

ट्यूशन पढ़ाकर करती थी तैयारी

यही लोग कहते थे कि बड़ी पढ़ाने चली थीं बेटियों को। अब कैसे पढ़ाएगी देखेंगे। लेकिन मेरी मां हिम्मत नहीं हारी और हमें बोला कि मैं गांव में किसी भी प्रकार रह लूंगी। तुम जाओ और पढ़ो और हमने अपनी पढ़ाई जारी रखी।

यहां तक कि हमारे गांव के लोग, रिश्तेदार कहने लगे अब रहने दो पढ़ाई, शादी कर दो। लेकिन मेरी मां किसी की नहीं सुनी। मैं उसके बाद ट्यूशन पढ़ाने लगी और पांच वर्ष तक 1 से लेकर 10वीं तक के बच्चों को मैं ट्यूशन पढ़ती थी।

SSC के माध्यम से हुआ चयन

उसी क्रम में सरकारी नौकरी की तैयारी करती थी। एसएससी के तहत केंद्रीय पुलिस ऑर्गेनाइजेशन की 2017 का फॉर्म भरी और उसमें प्रथम बार में ही मेरा चयन हो गया और मेरी रैंक अच्छी आई थी।

जिससे मुझे दिल्ली पुलिस में अवर निरीक्षक पद पर चयन हो गया। वर्ष 2019 से दिल्ली पुलिस में कार्यरत हूं और अपने अनुज भाईयो को भी पढ़ा रही हूं।

वर्तमान में पहाड़गंज थाना में कार्यरत हूं। अब उसी समाज के लोग जो कभी मेरी मां पर हास्य व्यंग करते थे। आज गांव के लोग अपने लड़कियों को मेरे जैसा बनना चाहते हैं। भाई अभिषेक तिवारी सरकारी नौकरी की तैयारी और अभिजीत बीटेक कर रहा है।

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