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'भारत बनेगा ग्लोबल हब', AI डेटा सेंटर पर अनिल अग्रवाल का बड़ा दावा; बोले- 'US-Europe भी पीछे, क्योंकि...'

Published: Mon, 26 Oct 2026 01:28 PM (IST)

Anil Agarwal on India AI Data Center: वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत AI डेटा सेंटर का वैश्विक ...और पढ़ें

अनिल अग्रवाल का दावा: भारत बनेगा AI डेटा सेंटर का ग्लोबल हब, US-Europe भी पीछे

अनिल अग्रवाल का दावा: भारत बनेगा AI डेटा सेंटर का ग्लोबल हब, US-Europe भी पीछे

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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| आज के समय में पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के लिए डेटा सेंटर बनाने में जुटी है। ऐसे में भारत इस रेस में सबसे आगे निकलने की पूरी क्षमता रखता है। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal Vedanta) ने भारत को AI डेटा सेंटर का ग्लोबल हब बनाने पर बड़ा बयान दिया है।

उनका कहना है कि भारत के पास कम लागत, रिन्यूएबल एनर्जी और विशाल भौगोलिक स्थिति जैसी कई बेजोड़ खूबियां मौजूद हैं।

वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि, भारत में डेटा सेंटर बनाने की लागत दुनिया में सबसे कम है। भारत में डेटा सेंटर के निर्माण की प्रति वॉट लागत सिर्फ 6.83 अमेरिकी डॉलर है, जो अमेरिका (12.08 डॉलर) और यूरोप (12.75 डॉलर) के मुकाबले लगभग आधी है।

इसके अलावा कतर, ताइवान, यूएई और वियतनाम जैसे देशों की तुलना में भी भारत में निर्माण लागत सबसे कम है।

हम अपने लक्ष्यों से चल रहे आगे

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के पास पावर जनरेशन, विशेषकर रिन्यूएबल एनर्जी की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। हम अपने तय लक्ष्यों से काफी आगे चल रहे हैं और रिन्यूएबल एनर्जी के मामले में दुनिया के तीसरे सबसे बड़े देश बन चुके हैं।

डेटा सेंटर का भविष्य समुद्र के भीतर होने वाला है और भारत इस मामले में बेहद भाग्यशाली है, क्योंकि हमारे देश के तीन तरफ समुद्र है और हमारी समुद्री क्षेत्रीय सीमाएं हमारे कुल भूभाग का 70 प्रतिशत हिस्सा कवर करती हैं। हमारे पास एक बहुत बड़ा और विशाल भूगोल है।

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1.5 अरब लोगों का मजबूत डेटा

अनिल अग्रवाल ने आगे बताया कि भारत के पास 1.5 अरब लोगों का मजबूत डेटा बेस है, जिनकी जरूरत के सभी सामानों और सेवाओं की खपत दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ रही है। इन तमाम खूबियों को देखते हुए दुनिया भर के निवेशकों को भारत की इस आकर्षक अर्थव्यवस्था में खुलकर निवेश करना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि, आज वैश्विक स्तर पर कंपनियां डेटा सेंटर चलाने के लिए 20 साल तक के लंबे पावर समझौते कर रही हैं। यह पूरी डेटा सेंटर इकोनॉमी एक सनराइज सेक्टर है, जो देश में बड़े पैमाने पर नई नौकरियां पैदा करेगा और भारत की भविष्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।