अनिल अग्रवाल की वेदांता का ₹9575 करोड़ वाला मास्टरस्ट्रोक! 'नेट जीरो' का है लक्ष्य; देश में आएगी 'ग्रीन क्रांति'!
वेदांता ने बीते वित्त वर्ष में शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन के उपायों पर एक अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा और दक्षता पर जोर दिया ...और पढ़ें

वेदांता ने किया 1 अरब डॉलर का निवेश (AI फोटो)
HighLights
वेदांता ने एक अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया
शुद्ध शून्य उत्सर्जन पर किया निवेश
2030 तक 2.5 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। अरबपति अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal News) की खनन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वेदांता (Vedanta News) ने बुधवार को कहा कि उसने बीते वित्त वर्ष (2025-26) में शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में उपायों पर एक अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया। कंपनी ने यह निवेश नवीकरणीय ऊर्जा, कम कार्बन वाले ईंधन, ऊर्जा दक्षता और प्रौद्योगिकी आधारित उपायों में किया।
कंपनी के अनुसार, इस बदलाव के तहत 2025-26 में समूह द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग सालाना आधार पर 52 प्रतिशत बढ़कर 400 करोड़ यूनिट हो गया। यह करीब तीन करोड़ भारतीय परिवारों की सालाना बिजली खपत के बराबर है।
2030 तक का लक्ष्य तय किया
वेदांता के पास अब करीब 2,000 मेगावाट की स्थापित और अनुबंधित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता है। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक चौबीसों घंटे उपलब्ध 2.5 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। कंपनी ने बयान में कहा कि इन उपायों और कार्बन उत्सर्जन कम करने के अन्य कदमों से 2025-26 में करीब 30 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन को रोका गया।
रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस
वेदांता ग्रुप के धातु और खनन उत्पादन में हरित गृह गैस उत्सर्जन की तीव्रता 2020-21 के आधार वर्ष की तुलना में करीब 14 प्रतिशत कम हुई है। भारत ने 2030 तक स्वच्छ ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता को 500 गीगावाट तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही देश का लक्ष्य अपनी ऊर्जा जरूरतों का 50 प्रतिशत नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करना और 2070 तक शुद्ध रूप से शून्य उत्सर्जन हासिल करना है।
बड़े निवेश की जरूरत
वेदांता ने कहा कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, पारेषण, बिजली ग्रिड, ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश की जरूरत होगी। इससे इस बुनियादी ढांचे के लिए जरूरी धातुओं और खनिजों की दीर्घकालिक मांग बढ़ेगी।
