दीवाली से पहले मोदी कैबिनेट का बड़ा कदम, एनर्जी स्टोरेज के लिए VGF योजना के लिए मंजूर किए 14500 करोड़ रुपये
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ईएसएस) के विकास के लिए 14,500 करोड़ रुपये की वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) ...और पढ़ें

14,500 करोड़ की VGF योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ईएसएस) के विकास के लिए 14,500 करोड़ रुपए की वायबिलिटी गैप फंडिंग (viability gap funding scheme) योजना को मंजूरी दे दी है।
वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहने वाली इस योजना का उद्देश्य देशभर में 92 गीगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करना है। सरकार का कहना है कि यह योजना भारत के बिजली क्षेत्र को अधिक मजबूत, लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
411 गीगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता हासिल करने का लक्ष्य
कैबिनेट ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि यह योजना देश में वर्तमान ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण क्षमता की तुलना में करीब 170 प्रतिशत नई क्षमता जोड़ने में मदद करेगी और वर्ष 2031-32 तक आवश्यक 411 गीगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी, जिसके जरिए नवीकरणीय ऊर्जा के बड़े पैमाने पर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और चौबीसों घंटे विश्वसनीय एवं किफायती बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
बयान के अनुसार, योजना के तहत कुल 92 गीगावाट क्षमता में से 60 गीगावाट हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं, 30 गीगावाट बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) और 2 गीगावाट उभरती ऊर्जा भंडारण तकनीकों के लिए विकसित की जाएगी। इन परियोजनाओं में कुल मिलाकर लगभग 97,600 करोड़ रुपए के निवेश का अनुमान है।
सरकार का कहना है कि वीजीएफ सहायता से इन परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता बेहतर होगी और बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण अवसंरचना के विकास में तेजी आएगी।
इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य भारत में ऊर्जा भंडारण प्रणाली के घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना भी है। इसके तहत बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) परियोजनाओं के लिए कम से कम 40 प्रतिशत घरेलू सामग्री (घरेलू सामग्री आवश्यकता-डीसीआर) अनिवार्य की गई है।
सरकार का मानना है कि इससे भारतीय उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे, बैटरी निर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा और आयातित उपकरणों पर निर्भरता कम होगी। यह पहल ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती देगी।
सौलर और विंड एनर्जी पर हो रहा काम
भारत तेजी से सौर और पवन ऊर्जा क्षमता बढ़ा रहा है, लेकिन इन स्रोतों से उत्पादन मौसम और समय के अनुसार बदलता रहता है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणाली अतिरिक्त बिजली को संग्रहित कर जरूरत पड़ने पर ग्रिड में उपलब्ध कराएगी। इससे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की अनियमितता की समस्या कम होगी और पारंपरिक बिजली उत्पादन स्रोतों पर निर्भरता घटेगी।
बयान के अनुसार, ग्रिड-स्केल स्टोरेज सिस्टम बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर, विश्वसनीय और किफायती बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
ऊर्जा भंडारण क्षमता का आवंटन टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। बैटरी स्टोरेज और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां वीजीएफ सहायता प्राप्त कर सकेंगी। वहीं नई और वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों पर आधारित परियोजनाओं को सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की अन्य संस्थाओं द्वारा लागू किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, यह योजना ग्रिड स्थिरता बढ़ाने, नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग, घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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