Gold Silver Price Today: अब जनवरी का रिकॉर्ड तोड़ेगा सोना, चांदी भी चमकेगी; खरीदें या नहीं, अजय केडिया से समझें
Gold Silver Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में दिन भर गिरावट के बाद अचानक जोरदार उछाल आया, जहां ...और पढ़ें
-1789656430085_m.webp)
सोने चांदी की कीमतों में अचानक उछाल फेड रेट हाइक के बावजूद जानें दिवाली तक के लक्ष्य

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में दिनभर की गिरावट के बाद अचानक जोरदार तेजी देखने को मिली। गुरुवार शाम करीब 6-7 बजे के आसपास कुछ ही घंटों में सोने का भाव करीब ₹3000 और चांदी का भाव करीब ₹6200 तक चढ़ गया। खबर लिखे जाने तक सोना 1,53,444 रुपए (gold price today) प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत 2,38,678 रुपए प्रति किलोग्राम (silver price today) हो गई।
फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े फैसले के बाद पहले सोने में दबाव दिखा, लेकिन इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेज रिकवरी हुई। डॉलर इंडेक्स में गिरावट, ग्लोबल ब्याज दरों की दिशा, कच्चे तेल की चाल और जियोपॉलिटिकल तनाव ने कीमती धातुओं को सपोर्ट दिया।
गोल्ड-सिल्वर में अचानक आई इस तेजी के बात सवाल है कि क्या यह तेजी बरकरार रहेगी? क्या अब सोना और चांदी खरीदने का सबसे सही समय है? और सबसे अहम सवाल- दीवाली तक सोने और चांदी के दाम कहां तक जा सकते हैं? जागरण बिजनेस ने केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया से खास बातचीत की। जिसमें उन्होंने सोना-चांदी खरीदने की सलाह दी। साथ ही दीवाली तक के गोल्ड-सिल्वर के टारगेट प्राइस (gold silver price outlook) भी दिए।
सवाल-1: फेड रेट हाइक के बाद भी सोने और चांदी के दाम क्यों नहीं टूटे?
अजय केडियाः फेड की ब्याज दर बढ़ने के बाद आम तौर पर सोने पर दबाव आता है। इसकी वजह यह है कि ब्याज दर बढ़ने पर बॉन्ड यील्ड आकर्षक हो जाती है और निवेशक बिना ब्याज वाले सोने की जगह बॉन्ड को प्राथमिकता दे सकते हैं।
लेकिन इस बार बाजार पहले ही रेट हाइक की उम्मीद कर रहा था। यानी यह खबर पहले ही कीमतों में काफी हद तक शामिल थी। इसलिए फैसले के बाद सोने में बड़ी और टिकाऊ गिरावट नहीं आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड एक समय करीब 100 डॉलर टूटा, लेकिन जल्द ही रिकवर कर गया। भारत में सुबह सोने की कीमतों पर रुपए की मजबूती का असर पड़ा। अब बाजार आगे की दरों की दिशा और संभावित रेट कट पर नजर रख रहा है। अगर भविष्य में दरों में कटौती का दौर शुरू होता है तो इससे सोने को अतिरिक्त सपोर्ट मिल सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक के पास 785 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार है और रुपए को सपोर्ट मिलने से घरेलू बाजार में सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में कुछ दबाव में रहीं। हालांकि, बाद में ग्लोबल संकेतों के कारण खरीदारी लौट आई।
सवाल-2: क्या डॉलर इंडेक्स ने भी गोल्ड-सिल्वर को सहारा दिया?
अजय केडिया: हां, बिल्कुल। डॉलर इंडेक्स फिर 100 के नीचे फिसला है। इसका सीधा फायदा सोने जैसी डॉलर में कीमत वाली कमोडिटी को मिला। इसके अलावा ब्रिटेन और जापान की ब्याज दरों से जुड़े संकेतों ने भी डॉलर पर दबाव बनाया। ऐसे माहौल में गोल्ड में नई खरीदारी देखने को मिली।
सबसे खास बात यह है कि हाल में क्रिप्टो से जुड़ा एक बिल फेल होने के बाद अमेरिका से निकलने वाला पैसा इक्विटी और कमोडिटी बाजार की ओर जा सकता है। इससे भी सोने और चांदी जैसी कमोडिटीज को सपोर्ट मिल रहा है।
सवाल-3: सोने और चांदी की कीमतों को बढ़ाने में क्रूड ऑयल का क्या रोल है?
अजय केडिया: कच्चे तेल की कीमतें गोल्ड-सिल्वर के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 102 डॉलर तक पहुंच चुका है, जबकि WTI भी 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंचने के करीब है। मिडिल ईस्ट में तनाव और सप्लाई से जुड़े जोखिमों के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। अगर कच्चा तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो महंगाई को लेकर चिंता बनी रह सकती है। यही कारण है कि बाजार फेड की अगली चाल के साथ-साथ तेल की कीमतों पर भी नजर रख रहा है।
सवाल-4: दीवाली तक गोल्ड-सिल्वर कितना महंगा हो सकता है?
अजय केडियाः दीवाली 2026 तक ग्लोबल मार्केट में सोना 5000 डॉलर प्रति औंस के लेवल को छू सकता है।
भारतीय बाजार में सोना ₹1.80 लाख के पिछले हाई को छू सकता है और उसके ऊपर भी जा सकता है, अगर रुपया मौजूदा स्तरों के आसपास रहता है। ग्लोबल मार्केट में चांदी का टारगेट 90 डॉलर प्रति औंस रहेगा। अगर चांदी 90 डॉलर तक पहुंचती है तो घरेलू बाजार में करीब ₹3 लाख का स्तर पार होने की संभावना बन सकती है।"
हालांकि, यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सोने-चांदी की कीमतें डॉलर, रुपए, ब्याज दरों, कच्चे तेल, वैश्विक तनाव और निवेश मांग जैसे कई फैक्टर से प्रभावित होती हैं।
सवाल-5: सोने की कीमतें बढ़ाने में चीन समेत दुनिया के सेंट्रल बैंकों का क्या रोल है?
अजय केडिया: सोने की तेजी के पीछे डी-डॉलराइजेशन भी एक बड़ा कारण है। कई देश अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी में अपनी हिस्सेदारी कम करके सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं।
चीन लगातार कई महीनों से सोने की खरीद कर रहा है और कुछ महीनों में उसकी खरीद करीब 20 टन प्रति माह तक रही है। इससे ग्लोबल गोल्ड डिमांड को सपोर्ट मिलता है।
इसके अलावा आम निवेशकों के बीच भी सोने का इस्तेमाल बदल रहा है। पहले सोने को मुख्य रूप से खपत यानी ज्वैलरी के नजरिए से देखा जाता था, लेकिन अब यह एक फाइनेंशियल एसेट के तौर पर भी तेजी से इस्तेमाल हो रहा है। मल्टी-एसेट म्यूचुअल फंडों में करीब 18-20 फीसदी तक सोने का एलोकेशन देखने को मिल रहा है।
2008, 2022 और 2026 का पैटर्न
अजय केडिया ने एक दिलचस्प डेटा भी शेयर किया और साल 2008, 2022 और 2026 में कच्चे तेल और सोने की कीमतों के बीच एक समानता का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इन वर्षों में कच्चा तेल 100 डॉलर या उससे ऊपर गया और उसके बाद करीब छह महीने तक सोने में दबाव देखा गया। इसके बाद सोने में बड़ी तेजी आई।
उन्होंने 2008 का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय कच्चे तेल के 130 डॉलर तक पहुंचने के बाद सोना कुछ महीनों तक दबाव में रहा और बाद में 640 डॉलर के आसपास से बढ़कर 2011 में करीब 1920 डॉलर तक पहुंच गया।
2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कच्चा तेल करीब 130 डॉलर तक गया। इसके बाद सोना करीब 2100 डॉलर से गिरकर 1600 डॉलर के आसपास आया और फिर लंबी तेजी देखने को मिली।
केडिया के मुताबिक, 2026 में भी कच्चे तेल के 120 डॉलर तक पहुंचने के बाद करीब छह महीने का पैटर्न देखा गया है। उनका मानना है कि अक्टूबर के आसपास सोने में तेजी का अगला चरण शुरू हो सकता है।
