सितंबर में महंगाई का बड़ा झटका, CPI बढ़कर 5.54% हुई, 23 महीने का रिकॉर्ड टूटा
सितंबर 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर (CPI) बढ़कर 5.54% हो गई, जो पिछले 23 महीनों में सबसे अधिक ...और पढ़ें

सितंबर में महंगाई का बड़ा झटका, CPI बढ़कर 5.54% हुई, 23 महीने का रिकॉर्ड टूटा
HighLights
सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई दर 5.54% पर पहुंची।
यह आंकड़ा पिछले 23 महीनों का उच्चतम स्तर है।
खाने-पीने की चीजों की महंगाई 7.74% रही।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। सोमवार को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) यानी भारत की खुदरा महंगाई सितंबर 2026 में बढ़कर 5.54% हो गई, जो पिछले 23 महीनों में सबसे ज्यादा है।
सितंबर में कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) से मापी गई खाने-पीने की चीजी की महंगाई दर 7.74% रही। खाने-पीने की चीजों की कीमतों का कुल महंगाई दर पर दबाव बना रहा।
महंगाई का दबाव ग्रामीण और शहरी, दोनों इलाकों में दिखा। सितंबर में ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 6.08% हो गई, जबकि शहरी इलाकों में यह 4.88% रही। ग्रामीण और शहरी इलाकों में खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर क्रमशः 8.06% और 7.18% रही।
अगस्त में 2.61% रही हाउसिंग महंगाई दर बढ़कर 2.74% हो गई। पिछले महीने के 3.56% के मुकाबले कपड़े और जूते-चप्पलों की महंगाई दर भी बढ़कर 3.93% हो गई। ये ताज़ा आंकड़े 'ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स' पर आधारित हैं, जिसमें 2024 को आधार वर्ष (बेस ईयर) माना गया है। ये आंकड़े शुरुआती हैं और इनमें ग्रामीण और शहरी बाज़ारों में कीमतों में आए बदलाव शामिल हैं।
MoSPI ने बताया कि कीमतों के आंकड़े अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,407 शहरी बाज़ारों (ऑनलाइन बाज़ारों सहित) और 1,465 गांवों से इकट्ठा किए गए। सितंबर के दौरान ग्रामीण और शहरी, दोनों बाज़ारों में रिस्पॉन्स रेट 100% रहा।
अक्टूबर 2026 के लिए CPI महंगाई दर के आंकड़े 12 नवंबर को जारी किए जाएंगे, या अगर उस दिन छुट्टी हुई तो अगले कामकाजी दिन जारी किए जाएंगे।
क्या बोले विशेषज्ञ?
CPI डेटा पर आनंद राठी ग्रुप के चीफ इकोनॉमिस्ट और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, श्री सुजान हाजरा ने कहा कि-
भारत की CPI महंगाई दर अगस्त के 4.83% से बढ़कर सितंबर 2026 में 5.54% हो गई। यह हमारे पहले के अनुमान (5.4%) और रॉयटर्स के आम अनुमान से थोड़ी ज़्यादा है, लेकिन मोटे तौर पर हमारी सोच की पुष्टि करती है। निकट भविष्य में महंगाई दर के ऊंचे स्तर पर बने रहने की संभावना है, क्योंकि खाने-पीने की चीज़ों की कीमतें, $100/bbl से ऊपर कच्चा तेल और रुपये की गिरती कीमत महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा कर रहे हैं। हमारा मानना है कि महंगाई बढ़ने का जोखिम बना हुआ है, जिससे मॉनेटरी पॉलिसी में ढील देने की गुंजाइश तब तक सीमित रहेगी जब तक कि कीमतों के दबाव (अंडरलाइंग और सीक्वेंशियल) में कमी के साफ संकेत न मिलें।
