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भारत ने 5 महीने में की ताबड़तोड़ दालों की खरीद! 15% तक महंगी हुई अरहर, कैसी रहेगी रिटेल सप्लाई?

Published: Mon, 26 Oct 2026 03:00 PM (IST)

भारत में दालों का आयात चालू वित्त वर्ष के पहले 5 महीनों में 67% बढ़कर 20.6 लाख टन हो गया, ...और पढ़ें

5 महीने में दालों के आयात में तेज बढ़ोतरी

5 महीने में दालों के आयात में तेज बढ़ोतरी

HighLights

  1. चालू वित्त वर्ष के पहले 5 महीनों में दाल आयात 67% बढ़ा।

  2. मसूर और पीली मटर के आयात में सबसे अधिक उछाल।

  3. अरहर और उड़द दाल की कीमतें सालाना 15% तक बढ़ीं।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| घरेलू बाजारों में दालों की आपूर्ति के लिए भारत विदेशी व्यापार पर निर्भर है। भारत में दालों का आयात चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले 5 महीनों यानी अप्रैल से अगस्त के दौरान सालाना आधार पर 67% बढ़कर 20.6 लाख टन पहुंच गया। घरेलू उत्पादन में संभावित गिरावट की आशंका और अल नीनो के खतरे के बीच इंपोर्ट में यह बढ़ोतरी देखने को मिली है। व्यापार से जुड़े मीडिया सूत्रों के मुताबिक आने वाले महीनों में दालों का आयात धीमा पड़ सकता है, क्योंकि कनाडा से आने वाली पीली मटर और मसूर की कीमतों में पिछले महीने बढ़ोतरी हुई है।

इन दालों के आयात में सबसे ज्यादा उछाल

चालू फाइनेंशियल ईयर के पहले 5 महीनों में मसूर और पीली मटर के इंपोर्ट में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। मसूर का आयात पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 200% बढ़कर 6.4 लाख टन हो गया। वहीं, पीली मटर का आयात 114% बढ़कर 6.2 लाख टन पहुंच गया। इस दौरान अरहर के आयात में 10% की बढ़ोतरी देखी गई और आंकड़ा 3.5 लाख टन रहा। इसके उलट उड़द के आयात में 3% की गिरावट आई और यह 2.7 लाख टन रह गया।

व्यापारियों के मुताबिक, रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण रूस से सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते कनाडा से आने वाली पीली मटर और मसूर की कीमतों में पिछले महीने तेजी आई है। माना जा रहा है कि कीमतें बढ़ने से आने वाले महीनों में आयात की रफ्तार धीमी हो सकती है।

कम बारिश से खरीफ दालों की फसल पर असर

खरीफ सीजन में दालों की बुवाई पूरी हो चुकी है। इस साल दालों का कुल बुवाई क्षेत्र बढ़कर 1.184 करोड़ हेक्टेयर हो गया, जो पिछले साल के मुकाबले 1.42% अधिक है। हालांकि, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में कम बारिश के कारण फसल प्रभावित हुई है।

आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। सर्दियों के दौरान बारिश और तापमान का रुख चना और मसूर जैसी रबी सीजन की दालों की बुवाई को प्रभावित कर सकता है। अल नीनो की आशंका के बीच घरेलू उत्पादन को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

एक साल में 15% तक महंगी हुई अरहर और उड़द

उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी प्रकोष्ठ (Price Monitoring Cell) के मुताबिक, शनिवार को अरहर की औसत खुदरा कीमत ₹132.75 प्रति किलो रही। यह एक साल पहले की तुलना में 15% अधिक है। चने की कीमत ₹93.48 प्रति किलो रही, जो सालाना आधार पर 7.5% ज्यादा है। वहीं, उड़द की औसत कीमत ₹125.46 प्रति किलो पहुंच गई, जो पिछले साल की समान अवधि से 10% अधिक है।

दालों की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सरकार की ओर से इंपोर्ट ड्यूटी घटाए जाने की संभावना कम है। सूत्रों के मुताबिक, अल नीनो की आशंका के बावजूद खरीफ की घरेलू फसलों की संभावनाओं पर अब तक कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में दालों की पर्याप्त उपलब्धता और देश में करीब 45 लाख टन का बफर स्टॉक होने से आपूर्ति की स्थिति को लेकर कुछ राहत है।

किन दालों में कितनी इंपोर्ट ड्यूटी?

सरकार ने नवंबर 2025 में पीली मटर पर 30% इंपोर्ट ड्यूटी लगाई थी। पीली मटर का इस्तेमाल चने के सस्ते विकल्प के रूप में भी किया जाता है। इसके साथ ही दिसंबर 2023 से जारी इस दाल के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की व्यवस्था समाप्त हो गई। मार्च 2025 में मसूर पर भी 10% इंपोर्ट ड्यूटी लगाई गई थी। इन दोनों शुल्कों को वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक बढ़ा दिया गया है।

सबसे अधिक कौन सी दाल मंगाता है भारत?

भारत अपनी सालाना दाल खपत का करीब 18 से 20% हिस्सा आयात करता है। अरहर, उड़द, मसूर, पीली मटर और चने का आयात कनाडा, रूस, ब्राजील, म्यांमार और अफ्रीकी देशों से किया जाता है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत ने कुल 60 लाख टन दालों का आयात किया था। इसमें 25% हिस्सेदारी अरहर की रही। इसके बाद मसूर की हिस्सेदारी 19%, पीली मटर की 18% और उड़द की 16% थी।

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वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का दाल आयात सालाना आधार पर 34% घटकर 363 करोड़ डॉलर रह गया था। व्यापार से जुड़े सूत्रों ने इसकी वजह घरेलू बाजार में अपेक्षाकृत कमजोर मांग और अच्छी घरेलू फसल को बताया था। इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में दालों का आयात रिकॉर्ड 554 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया था।