सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Gold Silver Price Crash: केविन वॉर्श ने ऐसा क्या कह दिया, जो औंधे मुंह गिर गया सोना चांदी? अगले 48 घंटे क्यों हैं अहम

Updated: Fri, 28 Aug 2026 11:20 PM (IST)

Gold Silver Price Today: केविन वॉर्श के जैक्सन हॉल मीटिंग में भाषण के बाद अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में सोने-चांदी ...और पढ़ें

केविन वॉर्श की स्पीच के बाद Gold-Silver Crash

केविन वॉर्श की स्पीच के बाद Gold-Silver Crash

HighLights

  1. केविन वॉर्श के भाषण से सोना-चांदी क्रैश हुआ।

  2. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3%, चांदी 3.5% टूटी।

  3. MCX पर सोना ₹2817, चांदी ₹4807 सस्ती हुई।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| जैक्सन हॉल मीटिंग में अमेरिकी फेड रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच के बाद सोना-चांदी क्रैश (gold silver price crash) हो गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 3 फीसदी और चांदी करीब साढ़े तीन फीसदी तक टूट गई। कोमेक्स पर सोना 134 डॉलर (भारतीय करेंसी में करीब 4100 रुपए प्रति 10 ग्राम) टूटकर 4529 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करने लगा। जबकि चांदी 2.37 डॉलर (भारतीय रुपए में करीब 7200 रुपए प्रति किलोग्राम) सस्ती होकर 67 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करने लगी।

MCX पर भी औंधे मुंह गिरी कीमतें

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर अक्टूबर डिलीवरी वाले गोल्ड की कीमत 2817 रुपए टूटकर 1,56,179 रुपए (gold price today) प्रति 10 ग्राम पर आ गई। इसमें करीब 1.75 फीसदी तक की गिरावट दर्ज हुई। जबकि चांदी की कीमत 4807 रुपए टूटकर 2,35,844 रुपए प्रति किलोग्राम (silver price today) पर आ गई। चांदी में करीब 1.85 फीसदी की कमी देखी गई।

केविन वॉर्श ने ऐसा क्या कहा, जो क्रैश हो गया सोना-चांदी?

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने महंगाई को लेकर बड़ा और सख्त संदेश दिया है। वॉर्श ने साफ कहा है कि अमेरिका में अंडरलाइंग यानी मूल महंगाई के रुझान में अभी कोई खास सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि,

जब तक फेडरल रिजर्व को इस बात का पूरा भरोसा नहीं हो जाता कि महंगाई तेजी से और साफ तौर पर 2% के लक्ष्य की तरफ बढ़ रही है, तब तक केंद्रीय बैंक का काम खत्म नहीं हुआ है।"

वॉर्श ने दोहराया कि महंगाई को 2% पर वापस लाना फेड का साफ और तय लक्ष्य है। अगर महंगाई उस लक्ष्य की तरफ पर्याप्त तेजी से नीचे नहीं आती है, तो फेड को आगे और कदम उठाने पड़ सकते हैं।

शुक्रवार को जैक्सन होल इकोनॉमिक पॉलिसी सिम्पोसियम (Jackson Hole Economic Policy Symposium) में अपने मुख्य भाषण के दौरान केविन वॉर्श ने कहा कि फेड का सबसे बड़ा फोकस कीमतों में स्थिरता (Price Stability) बनाए रखना होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि इस समय अमेरिका में फाइनेंशियल कंडीशन्स बहुत ज्यादा सख्त नहीं हैं और ब्याज दर (Policy Rate) अभी भी फेड के पास सबसे अहम हथियार है।

सीएमई फेडवॉच टूल (CME FedWatch Tool) के मुताबिक, 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25% की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना अब 55% से ज्यादा हो गई है। इससे एक दिन पहले यह संभावना करीब 35% थी। यानी सिर्फ एक दिन में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद में बड़ा उछाल देखने को मिला है।

जैक्सन होल में आखिर है क्या और पूरी दुनिया की नजर यहां क्यों रहती है?

इंटेलीसिस वेंचर्स के फाउंडर और सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एंड कमोडिटी एक्सपर्ट अमित सुरेश जैन के मुताबिक,

जैक्सन होल (Jackson Hole) फेडरल रिजर्व की कोई नियमित बैठक या सिर्फ फाइनेंशियल मार्केट मीटिंग नहीं है। यह अमेरिका के वायोमिंग स्टेट में होने वाला एक बड़ा आर्थिक सम्मेलन है। लेकिन इस सम्मेलन में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जो कुछ कहते हैं, उसका असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहता। दुनियाभर के वित्तीय बाजार इन बयानों पर नजर रखते हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि करीब 15 सितंबर के आसपास, फेड की मौद्रिक नीति बैठक से जुड़े मिनट्स और आगे के कम्युनिकेशन से यह तस्वीर और साफ हो सकती है कि ब्याज दरों में कटौती होगी या बढ़ोतरी।"

जैक्सन होल मीटिंग से फिलहाल जो बड़ा संदेश सामने आया है, वह यह है कि अमेरिका का महंगाई लक्ष्य करीब 2% है, जबकि महंगाई फिलहाल करीब 3.7% के आसपास है। यानी महंगाई अभी भी फेड के लक्ष्य से काफी ऊपर है और फेड इसे 2% से ऊपर बने रहने देना नहीं चाहता।

आज करीब शाम 7 बजे जो संदेश दिया गया, उसका सीधा मतलब यह है कि अगर महंगाई के आंकड़े काबू में नहीं आते, यानी महंगाई करीब 3.7% से घटकर 2% की तरफ नहीं बढ़ती, तो ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखना पड़ सकता है।

इतना ही नहीं, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। और अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो इसका असर सिर्फ अमेरिकी बाजार पर नहीं पड़ेगा। ग्लोबल बॉन्ड मार्केट, क्रिप्टोकरेंसी मार्केट, सोना, चांदी, अमेरिकी डॉलर और दुनिया की दूसरी करेंसी सभी में बड़ी वोलैटिलिटी देखने को मिल सकती है।"

अगर सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में वास्तव में बढ़ोतरी होती है, जैसा कि आज के संकेतों से संभावना बन रही है और जिसकी कुछ हद तक पहले से उम्मीद भी की जा रही थी, तो सोने, चांदी और दूसरे वित्तीय बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए इस समय बाजार में सावधानी के साथ चलने की जरूरत है।

यह भी पढ़ें- Gold में फिर आ सकता है ऐतिहासिक उछाल? जनवरी की तरह शुरू हो चुकी सुपरसाइकिल; अजय केडिया ने कर दी बड़ी भविष्यवाणी!

गोल्ड के के लिए जरूरी लेवल क्या होंगे?

अमित सुरेश जैन के मुताबिक, अब सोने और चांदी की कीमतों पर नजर रखने की जरूरत है। 28 अगस्त 2026 को रात 10:30 बजे के आसपास, सोना करीब ₹1,56,500 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। लेकिन अब बाजार की नजर एक बेहद अहम स्तर पर है- ₹1,56,000। अगर सोना ₹1,56,000 के नीचे कारोबार करना शुरू करता है, तो बाजार आने वाली अनिश्चितताओं को पहले से कीमतों में शामिल करना शुरू कर सकता है। और अगर सोना 48 घंटे से ज्यादा समय तक ₹1,56,000 के नीचे स्थिर बना रहता है, तो अभी तक का बुलिश यानी तेजी वाला मार्केट स्ट्रक्चर धीरे-धीरे बेयरिश यानी मंदी वाले रुख में बदलना शुरू हो सकता है।

क्योंकि बाजार आमतौर पर भविष्य में होने वाले संभावित बदलावों को पहले से ही कीमतों में शामिल करना शुरू कर देते हैं। इसलिए अगर सोना ₹1,56,000 के नीचे टिका रहता है, तो तेजी में आक्रामक तरीके से खरीदारी करने से बचना चाहिए। ऐसी स्थिति में सोने में ₹1,53,000 से लेकर ₹1,50,000 तक करेक्शन की संभावना बन सकती है। अगर सोने में ₹1,56,000 के नीचे लगातार कारोबार बना रहता है, तो बाजार का बेयरिश टोन आगे भी जारी रह सकता है।