कब कम होंगे चीनी के दाम? सप्लाई, स्टॉक और इथेनॉल से चीनी की कमी पर ISMA ने खोले सारे राज!
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने स्पष्ट किया है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त उत्पादन व स्टॉक उपलब्ध है। त्योहारों से पहले कच्चे ...और पढ़ें
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चीनी की कमी और कीमतों पर उठ रहे सवालों पर ISMA ने दिए सारे जवाब
HighLights
देश में चीनी की कोई कमी नहीं, पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध।
त्योहारों से पहले 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात की अनुमति।
इथेनॉल कार्यक्रम से किसानों और मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| देश में इन दिनों चीनी की आपूर्ति में कमी की अटकलें और बढ़ती कीमतें आम उपभोक्ता के साथ सरकार के लिए भी चिंता का कारण है। 24 अगस्त, सोमवार को इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, जिसमें चीनी को लेकर उठ रहे सवालों पर ठोस जानकारी दी है।
देश में वाकई है चीनी की कमी?
ISMA के DG दीपक बल्लानी ने कहा कि मौजूदा सीज़न में हमारा प्रोडक्शन लगभग 279 लाख टन होने की उम्मीद है, क्योंकि दक्षिण कर्नाटक और तमिलनाडु में अभी स्पेशल सीजन चल रहा है। यह सीजन 30 सितंबर को खत्म होगा और हमें उम्मीद है कि हम लगभग 279 लाख टन नेट चीनी का प्रोडक्शन करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। हमारे पास चीनी का पर्याप्त स्टॉक है और हम इस सीजन के आखिर तक 35 लाख टन चीनी के स्टॉक के साथ रहेंगे।
त्योहारी सीजन में कैसी रहेगी सप्लाई?
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) के प्रेसिडेंट नीरज शिरगांवकर ने कहा कि अभी अगस्त का महीना चल रहा है। 1 अगस्त तक लगभग साढ़े तीन महीने का स्टॉक मौजूद था, इसलिए इस महीने घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। सितंबर-अक्टूबर में त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से पहले सरकार ने 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री कच्ची चीनी (raw sugar) के इंपोर्ट की इजाजत दी है। यह पहले से उठाया गया एहतियाती कदम है। इसे ड्यूटी-फ्री करने से यह सीमित समय के लिए सच में एक कॉम्पिटिटिव सप्लाई ऑप्शन बन जाता है, जिससे हमारे अनुमानित क्लोजिंग स्टॉक में लगभग 25-29 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है और कीमतों को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी।
इथेनॉल है चीनी में कमी का कारण?
दीपक बल्लानी ने बताया कि हाल ही में हुई कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। सरकार की पहली प्राथमिकता चीनी की घरेलू खपत है। जब सरकार को यह भरोसा हो जाता है कि घरेलू खपत के लिए पर्याप्त चीनी है, तभी इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का इस्तेमाल किया जाता है।
अनुमान है कि 2025-26 में कुल इथेनॉल आपूर्ति में अनाज आधारित इथेनॉल का हिस्सा 75% होगा, जबकि 2021-22 में यह केवल 17% था। वहीं, चीनी आधारित इथेनॉल का हिस्सा घटकर 25% रह गया है। अनुमान है कि 2025-26 में कुल इथेनॉल आपूर्ति लगभग 1,197 करोड़ लीटर होगी, जिसमें मिश्रण दर 20% तक होगी।
इथेनॉल कार्यक्रम से किसानों को फायदा
एथेनॉल कार्यक्रम चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति और नकदी प्रवाह को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिससे वे किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान कर पा रहे हैं। बल्लानी ने बताया कि 20 अगस्त 2026 तक 2025-26 के लिए लगभग 97% गन्ने का बकाया भुगतान पहले ही किया जा चुका था। एथेनॉल उत्पादन कार्यक्रम द्वारा दिए गए एक्स्ट्रा रेवेन्यू और कैश फ्लो की मदद के बिना, चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति और समय पर गन्ने का भुगतान करना बड़ी चुनौती होती।
खुदरा बाजारों में कब कम होंगे चीनी के दाम?
ISMA के मुताबिक देश में चीनी की कमी नहीं है, ये Artificial shortage की अफवाहें हैं। इससे कुछ हद तक मार्केट प्रभावित हुआ है। कई लोगों ने पैनिक बॉइंग भी की है। हालांकि मिलों में अब थोक कीमतों में भारी गिरावट आनी शुरू हुई है, और आने वाले 1 हफ्ते में खुदरा बाजारों में भी कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।
