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अमेरिकी जॉब रिपोर्ट से बाजार में भूचाल, सोना-चांदी क्रैश; एक झटके में ₹7700 तक टूटे दाम, भारत पर क्या असर?

Published: Fri, 04 Sep 2026 07:58 PM (IST)Updated: Fri, 04 Sep 2026 08:17 PM (IST)

Gold Silver Price Crash Today: US Job Report के मजबूत आंकड़ों के बाद वैश्विक और भारतीय बाजारों में सोने-चांदी की ...और पढ़ें

अमेरिकी जॉब रिपोर्ट से बाजार में भूचाल, सोना-चांदी धड़ाम

अमेरिकी जॉब रिपोर्ट से बाजार में भूचाल, सोना-चांदी धड़ाम

HighLights

  1. अमेरिकी जॉब रिपोर्ट के बाद सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट।

  2. भारत में सोना ₹4500 और चांदी ₹7700 से अधिक टूटी।

  3. मजबूत अमेरिकी डेटा ने फेड की ब्याज दर कटौती की उम्मीदों को प्रभावित किया।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| फेड रिजर्व की मीटिंग से ठीक पहले अमेरिकी जॉब रिपोर्ट के डेटा ने बाजार हिला दिया। डेटा आते ही सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट (gold silver price crash) आई। ग्लोबल मार्केट में सोना 1.70% और चांदी 2.19% से ज्यादा टूट गई। अमेरिकी डेटा (us job data) का असर भारत पर भी पड़ा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना एक झटके में 4500 रुपए से ज्यादा टूट गया और कीमत 1,51,262 रुपए प्रति 10 ग्राम के साथ दिन भर के लो लेवल पर चली गई। वहीं चांदी की कीमत 7777 रुपए टूटकर 2,34,572 रुपए के लो लेवल पर चली गई।

US जॉब डेटा ने दुनिया को क्यों चौंकाया?

अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने अगस्त के महीने में उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हुए 1,62,000 नई नौकरियां (Non-Farm Payrolls) जोड़ी हैं, जबकि बेरोजगारी दर 4.1% पर स्थिर बनी हुई है। यूएस ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स (BLS) द्वारा जारी यह डेटा सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है। 15-16 सितंबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अहम पॉलिसी बैठक से ठीक पहले आए इन मजबूत आंकड़ों ने ब्याज दरों में बड़ी कटौती की उम्मीदों पर नया पेंच फंसा दिया है।

कहां मिलीं नौकरियां, कहां हुई छंटनी?

अगस्त में सबसे ज्यादा उछाल हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में देखने को मिला। रेस्टोरेंट और बार में 59,000 नई नौकरियां जुड़ीं, जो पिछले 12 महीनों के औसत 12,000 से लगभग पांच गुना ज्यादा है।

  • लोकल गवर्नमेंट एजुकेशन: 42,000 पदों की बढ़ोतरी।
  • मैन्युफैक्चरिंग: 16,000 नए रोजगार।
  • कंस्ट्रक्शन व हेल्थकेयर: कंस्ट्रक्शन में 22,000 और हेल्थकेयर में 13,000 नौकरियां बढ़ीं।

वहीं, दूसरी तरफ टेक और इंफॉर्मेशन सेक्टर पर दबाव साफ दिखा। आईटी, डेटा प्रोसेसिंग, वेब होस्टिंग और ब्रॉडकास्टिंग से जुड़े इंफॉर्मेशन सेक्टर में 23,000 नौकरियां घटी हैं। राहत की बात यह रही कि जून और जुलाई के आंकड़ों को ऊपर की ओर संशोधित कर 55,000 अतिरिक्त नौकरियां जोड़ी गईं। कर्मचारियों की औसत प्रति घंटा कमाई भी 0.3% बढ़कर $37.75 हो गई है, जो सालाना आधार पर 3.1% की बढ़त दिखाती है।

रिपोर्ट पर क्या बोले गोल्डमैन के एक्सपर्ट?

गोल्डमैन सैक्स एसेट मैनेजमेंट के इनोवेटर ईटीएफ के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट टिम अर्बानोविज ने बताया कि,

"आज की रिपोर्ट बेहद मजबूत रही। मुमकिन है कि बाजार पहले तुरंत प्रतिक्रिया दे और सवाल बाद में पूछे। लेकिन जब धूल छंटेगी, तो निवेशकों को समझ आएगा कि लेबर मार्केट का संतुलन बनाने का दायरा अभी भी बरकरार है।"

भारत समेत दुनिया के बाजारों पर क्या असर?

सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एंड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने बताया कि अमेरिकी जॉब रिपोर्ट का असर भारत के स्टॉक मार्केट और कमोडिटी मार्केट पर पड़ सकता है। उन्होंने इसे अलग-अलग करके आसान भाषा में समझाया।

1. स्टॉक मार्केट: अमेरिकी जॉब मार्केट मजबूत रहने से यह साफ हो गया है कि अमेरिकी मंदी (US Recession) का तात्कालिक खतरा टल गया है, जो इक्विटी मार्केट्स के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, मजबूत लेबर मार्केट के कारण यूएस फेड अब ब्याज दरों में 50 बेसेस पॉइंट्स तक की आक्रामक कटौती करने से बच सकता है। इससे भारतीय शेयर बाजार (Sensex-Nifty) और वैश्विक इक्विटी में शुरुआत में थोड़ी नर्वसनेस या वोलेटिलिटी दिख सकती है, लेकिन लॉन्ग-टर्म में अमेरिकी खपत बने रहने से भारतीय आईटी और फार्मा एक्सपोर्टर्स को सीधा फायदा मिलेगा।

2. कमोडिटी मार्केट: मजबूत रोजगार डेटा का सबसे तात्कालिक असर डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर पड़ता है, जिनमें मजबूती देखने को मिलती है। जब डॉलर मजबूत होता है और ब्याज दरें ऊंची रहने का अनुमान बढ़ता है, तो सोने और चांदी जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियां दबाव में आ जाती हैं। जिससे बुलियन मार्केट में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती मांग बने रहने का संकेत देती है, जिससे क्रूड ऑयल और इंडस्ट्रियल मेटल्स (कॉपर, जिंक) को निचले स्तरों पर सपोर्ट मिलेगा।

अमेरिकी डेटा का असर दुनिया पर क्यों?

अनुज गुप्ता ने बताया कि अमेरिका का नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी का डेटा यह तय करता है कि फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरें बढ़ाएगा या घटाएगा। अगर अमेरिकी लेबर मार्केट का डेटा मजबूत आता है, तो ब्याज दरें बहुत आक्रामक तरीके से नहीं बढ़ेंगी, जिससे कीमती धातुओं को राहत मिलती है।

वहीं अगर महंगाई और रोजगार के आंकड़े ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दबाव बनाते हैं, तो डॉलर मजबूत होता है और निवेशक सोने से पैसा निकालकर सुरक्षित रिटर्न वाले अमेरिकी बॉन्ड्स में लगाने लगते हैं।

फिलहाल, अब दुनियाभर के नीति-निर्माताओं और निवेशकों की नजरें अगले हफ्ते आने वाले अमेरिकी महंगाई दर (CPI) के आंकड़ों पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि फेड ब्याज दरों पर क्या रुख अपनाता है।

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