US-Iran Conflict: फ्लाइट कैंसिल हुई तो नहीं मिलेगा 1 भी रुपया! ईरान युद्ध के बीच यात्रियों को बड़ा झटका
अमेरिका-ईरान तनाव से वैश्विक हवाई यात्रा प्रभावित हुई है, जिससे 3,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। अधिकांश ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसियां युद्ध संबंधी नुकसान कवर नहीं करतीं, जिससे यात्रियों को बड़ा झटका लगा है।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक हवाई यात्रा पर साफ दिखने लगा है। पिछले कुछ दिनों में दुनिया भर में 3,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं और हजारों यात्री अनिश्चितता की स्थिति में फंसे हैं। खास चिंता की बात यह है कि अधिकांश अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसियां युद्ध जैसे हालात से जुड़े नुकसान को कवर नहीं करतीं।
खाड़ी क्षेत्र में हवाई मार्ग प्रभावित
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी हमलों के बाद कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र आंशिक या पूर्ण रूप से बंद कर दिए हैं। इसके चलते एयरलाइंस को उड़ानें रद्द करनी पड़ रही हैं या उन्हें लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है।
दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट हब पर परिचालन दबाव काफी बढ़ गया है। ये शहर एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बीच प्रमुख कनेक्टिंग पॉइंट हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में रोजाना 1,200 से अधिक उड़ानें रद्द की जा रही हैं।
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बीमा दावों को लेकर असमंजस
एविएशन और बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट इसलिए जटिल है क्योंकि अधिकतर ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसियों में ‘वॉर एक्सक्लूजन’ क्लॉज होता है। यानी युद्ध, सैन्य कार्रवाई या नागरिक अशांति से जुड़े नुकसान का मुआवजा नहीं दिया जाता।
बीमा कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि अगर हालात लंबे समय तक बने रहे तो मिडिल ईस्ट रूट्स पर ‘वॉर-रिस्क प्रीमियम’ स्थायी रूप से बढ़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय टिकटों की कीमतों पर असर पड़ेगा।
भारत में भी असर
भारत के लिए खाड़ी देश प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रूट हैं। दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट पर पीक आवर्स में 150 से अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द होने की खबर है। भारतीय एयरलाइंस जैसे IndiGo और Air India ने यात्रियों के लिए रीबुकिंग और रिफंड की सुविधा दी है, लेकिन होटल बुकिंग, टूर पैकेज या आगे की कनेक्टिंग यात्रा के खर्च की भरपाई की गारंटी नहीं है।
बढ़ती लागत और अनिश्चितता
एयरलाइंस को अब प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र से बचने के लिए लंबा मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे उड़ान समय में दो से तीन घंटे तक की बढ़ोतरी हो रही है। इससे ईंधन खपत और परिचालन लागत बढ़ रही है। उद्योग के अनुमान के अनुसार, यदि तनाव जारी रहता है तो भारतीय एयरलाइंस को अल्पकाल में सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।
''असली आर्थिक नुकसान केवल उड़ानों की रद्दीकरण से नहीं, बल्कि अनिश्चितता से होता है। बार-बार के भू-राजनीतिक झटके पूरे अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल इकोसिस्टम में जोखिम की कीमत को फिर से तय करने पर मजबूर कर रहे हैं।''- एविएशन अर्थशास्त्री मनीष वोरा
यात्रियों के सामने चुनौतियां
ट्रांजिट शहरों में फंसे यात्रियों को महंगे होटल, सीमित कनेक्टिविटी और लंबा इंतजार झेलना पड़ रहा है। यूरोप और एशिया के कई देशों ने अपने नागरिकों को उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो इस वित्तीय वर्ष के दौरान वैश्विक विमानन उद्योग में टिकट कीमतों, बीमा लागत और नेटवर्क योजना में अस्थिरता बनी रह सकती है। लगातार व्यवधान से लंबी दूरी की यात्रा पर उपभोक्ता विश्वास भी कमजोर पड़ सकता है।
