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CAS ट्रेडिंग नियम पर लग सकती है 1 साल की रोक, शेयर बाजार के 20000 निवेशकों के सुझाव का बड़ा असर

Published: Mon, 05 Oct 2026 07:44 PM (IST)

भारत का मार्केट रेगुलेटर SEBI डेरिवेटिव्स सेटलमेंट के लिए 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) को कम से कम एक साल के ...और पढ़ें

SEBI डेरिवेटिव्स सेटलमेंट के CAS नियम पर एक साल की रोक लगाने पर विचार कर रहा है

SEBI डेरिवेटिव्स सेटलमेंट के CAS नियम पर एक साल की रोक लगाने पर विचार कर रहा है

HighLights

  1. SEBI डेरिवेटिव्स सेटलमेंट के लिए CAS को एक साल के लिए निलंबित कर सकता है।

  2. एक्सपायरी के दिनों में डेरिवेटिव्स में भारी उतार-चढ़ाव के कारण समीक्षा।

  3. अंतिम 30 मिनट के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस का उपयोग किया जाएगा।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत का मार्केट रेगुलेटर कम से कम एक साल के लिए डेरिवेटिव्स सेटलमेंट की कीमतें तय करने के लिए 'क्लोजिंग ऑक्शन' का इस्तेमाल बंद कर सकता है। यह उन नए तरीकों में आंशिक बदलाव होगा जिन्हें उसने मुख्य शेयरों और डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की क्लोजिंग कीमतें तय करने के लिए शुरू किया था।

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने अगस्त में 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) नाम का एक नया तरीका शुरू किया था। यह उन शेयरों के लिए था जिनसे फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स जुड़े हुए हैं।

इस सिस्टम के तहत, ट्रेडिंग के दिन के आखिर में एक छोटा ऑक्शन होता है जिससे शेयर की क्लोजिंग कीमत तय करने में मदद मिलती है। यह नया तरीका अमेरिका और हांगकांग जैसे ग्लोबल बाजारों में इस्तेमाल होने वाले तरीके जैसा ही है। हालांकि, इसकी वजह से एक्सपायरी के दिनों में डेरिवेटिव्स की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया, जिसके बाद रेगुलेटर ने इसकी समीक्षा करने का फैसला किया।

वीकेंड पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में SEBI ने कहा कि उसे पिछले महीने जारी कंसल्टेशन पेपर के जवाब में नियमों में बदलाव के लिए 20,000 सुझाव मिले हैं।

सूत्रों ने बताया कि इसके बजाय, डेरिवेटिव की कीमत तय करने के लिए ट्रेडिंग के आखिरी 30 मिनट के 'वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस' (वॉल्यूम के आधार पर औसत कीमत) का इस्तेमाल किया जाएगा।

सूत्रों ने कहा कि कम लिक्विडिटी वाले कैश मार्केट में अंडरलाइंग शेयरों के लिए दिन के आखिर की कीमत तय करने के लिए अभी भी क्लोजिंग ऑक्शन का इस्तेमाल किया जाएगा। इन सूत्रों ने अपनी पहचान जाहिर नहीं करने का अनुरोध किया क्योंकि उन्हें मीडिया से बात करने की इजाजत नहीं है।

उम्मीद है कि SEBI इस महीने के आखिर तक ये बदलाव लागू कर देगा। SEBI के प्रवक्ता ने टिप्पणी के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया।

इस नए तरीके से भारत के बाजार अमेरिका और यूरोप के बाजारों के और करीब आ जाएंगे। वहां डेरिवेटिव्स सेटलमेंट अक्सर खास प्राइसिंग तरीकों से तय होता है, जिसमें एक ही क्लोजिंग ऑक्शन के बजाय तय ट्रेडिंग अवधि के दौरान वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस का इस्तेमाल किया जाता है।

पूरी तरह लागू करने का रोडमैप

रेगुलेटर ने सितंबर में अपनी समीक्षा योजनाओं में यह भी प्रस्ताव दिया था कि 10 मिनट की CAS विंडो के दौरान इंडेक्स की इंडिकेटिव वैल्यू (संभावित मूल्य) पब्लिश करना बंद कर दिया जाए और सिर्फ अलग-अलग शेयरों की इंडिकेटिव कीमतें ही पब्लिश की जाएं। उसका तर्क था कि इंडेक्स की वैल्यू अभी भी तय हो रही होती है।

सूत्रों ने बताया कि मिले ज्यादातर फीडबैक कमेंट्स में कहा गया कि एडवांस्ड ट्रेडिंग डेस्क उन वैल्यूज़ को खुद से दोबारा बना सकते हैं और उन्हें हटाने से हेरफेर की चिंताओं को दूर किए बिना पारदर्शिता कम हो जाएगी।

दूसरे सूत्र ने कहा, "रेगुलेटर इस बात से सहमत है, लेकिन वह निवेशकों के बीच इस बारे में जागरूकता बढ़ाने पर ज़ोर देगा कि अंडरलाइंग इंडेक्स की कीमत सिर्फ 10 मिनट की विंडो के आखिर में तय होती है।"

फीडबैक में मौजूदा समय-सारणी को मोटे तौर पर वैसा ही बनाए रखने का भी समर्थन किया गया, जिसमें रेगुलर ट्रेडिंग दोपहर 3:30 बजे तक और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग दोपहर 3:45 बजे तक जारी रहेगी, क्योंकि इससे कीमत तय करने में मदद मिलेगी और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को कैश मार्केट के बंद होने की प्रक्रिया के साथ बेहतर ढंग से तालमेल बिठाने में आसानी होगी।

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