दिल्ली के लाखों घरों और दुकानों पर मंडराया खतरा, 2007 से पहले बनी लाखों बिल्डिंगो पर हो सकती है कार्रवाई
दिल्ली में 2007 से पहले निर्मित लाखों आवासीय और व्यावसायिक भवनों पर 2026 के बाद कार्रवाई का खतरा है, क्योंकि उनकी अस्थायी कानूनी सुरक्षा समाप्त हो रही है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
2007 से पहले के लाखों भवनों पर कार्रवाई का खतरा।
अस्थायी कानूनी संरक्षण 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होगा।
ट्रेडर्स एसोसिएशन ने स्थायी समाधान तक राहत मांगी।
संजय कुमार, बाहरी दिल्ली। दिल्ली में वर्ष 2007 से पहले बने लाखों आवासीय और व्यावसायिक भवनों पर नगर निगम अगले वर्ष से कार्रवाई शुरू कर सकता है। इन संपत्तियों को मिला अस्थायी कानूनी संरक्षण 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाला है। ऐसे में कमला नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि स्थायी समाधान लागू होने तक इस राहत को आगे बढ़ाया जाए।
एसोसिएशन के प्रधान नितिन गुप्ता ने इस संबंध में दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि इन संपत्तियों को पहले भी दो बार अस्थायी राहत दी जा चुकी है, लेकिन इस दौरान इनके लिए स्थायी समाधान नहीं निकल सका। राहत की अवधि बार-बार बढ़ने से व्यापारियों और आम लोगों में अपनी संपत्तियों और कारोबार के भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है।
गुप्ता ने पत्र में कहा कि दिल्ली के पारंपरिक बाजार राजधानी की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। इन बाजारों से लाखों व्यापारियों, दुकानदारों, कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका जुड़ी है।
इसलिए पात्र दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लंबे समय तक कानूनी सुरक्षा देने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। उन्होंने स्थायी समाधान तैयार होने और लागू किए जाने तक मौजूदा राहत जारी रखने की मांग की है। उन्होंने पात्र व्यावसायिक संपत्तियों को नियमित करने के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और व्यावहारिक नीति बनाने का सुझाव दिया है।
संयुक्त समिति बनाने का सुझाव
एसोसिएशन ने स्थायी समाधान तलाशने के लिए सरकार, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), संबंधित नियोजन प्राधिकरणों और बाजार संगठनों के प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति बनाने का सुझाव दिया है। समिति व्यापारियों की समस्याओं पर विचार कर समयबद्ध समाधान की सिफारिश कर सकती है। एसोसिएशन ने सरकार से इस मामले में स्पष्ट कार्ययोजना घोषित करने और व्यापारियों को भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता से राहत देने की मांग की है।
