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'पत्नी ठीक हो जाए, बस यही सपना था', मंगोलपुरी अग्निकांड में खाक हुईं प्रेमचंद की उम्मीदें; बच्चों के सिर से उठा साया

Published: Sun, 01 Nov 2026 01:59 PM (IST)Updated: Sun, 01 Nov 2026 02:03 PM (IST)

बाहरी दिल्ली के मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र की जूता फैक्ट्री में लगी आग ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस ...और पढ़ें

मंगोलपुरी हादसे से टूट गया परिवार। जागरण

मंगोलपुरी हादसे से टूट गया परिवार। जागरण

HighLights

  1. मंगोलपुरी फैक्ट्री आग ने कई परिवारों की खुशियां छीनीं।

  2. प्रेमचंद, अशोक जैसे श्रमिकों की मौत, परिवार हुए बेसहारा।

  3. बच्चों के सिर से उठा पिता का साया, भविष्य अंधकारमय।

राजीव रंजन, बाहरी दिल्ली। बाहरी दिल्ली में मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र की जूता फैक्ट्री में लगी आग ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। किसी ने अपने परिवार का सहारा खो दिया तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया।

इस हादसे में जान गंवाने वालों में प्रेमचंद की कहानी दिल को झकझोरने वाली है। वह पिछले 20 वर्षों से इसी फैक्ट्री में काम कर रहा था। उसकी पत्नी नीलम देवी कैंसर से पीड़ित है। परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं।

पत्नी के इलाज और बच्चों के पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी प्रेमचंद के कंधों पर थी। पत्नी स्वस्थ हो जाए, इसी उम्मीद में वह दिन-रात मेहनत करता था। लेकिन शुक्रवार रात फैक्ट्री में आग लगी तो वह लपटों के बीच घिर गया। काफी संघर्ष के बावजूद बाहर नहीं निकल सका।

अब दुनिया में नहीं रहा

प्रेमचंद के परिवार के लिए उसकी मौत किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। जिस व्यक्ति के सहारे पत्नी अपने इलाज और बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद लगाए बैठी थी, वही अब इस दुनिया में नहीं रहा।

वहीं, उनकी बहू अंशू ने बताया कि परिवार के सामने अब इलाज और रोजमर्रा के खर्च का संकट खड़ा हो गया है। नालंदा जिले के हिलसा थाना क्षेत्र के मिल्कीपर गांव के रहने वाले अशोक की हादसे में मौत हो गई, जबकि उनका चचेरा भाई विकास जीवन व मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। अशोक की पत्नी गर्भवती है और उसके दो बच्चे हैं।

गांव जाने की कर रहे थे तैयारी

विकास भी शादीशुदा था और उसके दो छोटे बच्चे हैं। अशोक के फूफा उमेश ने बताया कि वह 16 साल पहले अशोक को दिल्ली लेकर आए थे और इसी फैक्ट्री में काम दिलवाया था। डेढ़-दो महीने पहले अशोक के कहने पर ही विकास भी दिल्ली आया था। दोनों छठ पर गांव जाने की तैयारी कर रहे थे।

हादसे से कैसे उबरेंगे

परिवार में इस बात को लेकर खुशी थी, लेकिन हादसे ने सारे सपने तोड़ दिए। हरिहर भी करीब 20 साल से फैक्ट्री में काम कर रहे थे। वह पैकिंग का ठेका संभालते थे। उनके स्वजन को समझ नहीं आ रहा है कि हादसे से वह कैसे उबरेंगे। उनके तीन बच्चे हैं। देवरिया के रहने वाले लालबाबू भी करीब 15 वर्षों से यहां काम कर रहे थे। उनके परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं।

हादसे के बाद सभी परिवारों में मातम पसरा है। किसी की पत्नी ने अपना जीवनसाथी खो दिया तो किसी के बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। मृतकों में प्रेमचंद बिहार के मधुबनी व अशोक नालंदा और लालबाबू उत्तर प्रदेश के देवरिया व हरिहर हरदोई के रहने वाले थे।

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