दिल्ली पुलिस में 'बगावत', मुख्यालय में पहली बार गूंजे विरोध के नारे; महिला कर्मियों के आगे आला अधिकारी बेबस
दिल्ली पुलिस के जवानों ने वकीलों के दबाव में एसीपी और इंस्पेक्टर के निष्क्रिय यूनिटों में तबादले के विरोध में ...और पढ़ें
HighLights
वकीलों के दबाव में एसीपी, इंस्पेक्टर का तबादला।
दिल्ली पुलिस जवानों ने मुख्यालय का घेराव किया।
उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की गई।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। वकीलों के दबाव में आकर पूर्वी दिल्ली में एक एसीपी और एक इंस्पेक्टर का निष्क्रिय यूनिटों में तबादला किए जाने के विरोध में दिल्ली पुलिस के जवानों ने पुलिस मुख्यालय का घेराव किया। पुलिस जवानों का कहना था कि यह कार्रवाई पूरी तरह से अनुचित है और इससे पुलिसबल का मनोबल गिरता है।
पहली बार मुख्यालय के अंदर पुलिसकर्मियों ने लगाए नारे
दोपहर होने तक यह मामला और गहराने लगा। पुलिस मुख्यालय के अंदर धरने पर बैठकर पूरे मामले से नाराज पुलिकर्मियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान सारे अधिकारी विवश दिखे। यह पहला मामला है जब मुख्यालय के अंदर आकर पुलिसकर्मियों ने विद्रोह शुरू कर दिया है। इस बीच पुलिस एकता के नारे लगते रहे।
अधिकारियों को पहली बार करनी पड़ी ऐसी वार्ता
मामला गहराता देख दिल्ली पुलिस के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब पुलिसकर्मियों की बात सुनने के लिए पुलिस आयुक्त समेत सभी विशेष आयुक्तों को बैठक करनी पड़ी। पुलिस मुख्यालय के आदर्श ऑडोटोरियम में पुलिसकर्मियों से बातचीत की गई। देखते ही देखते ऑडिटोरियम पूरा भर गया।
वहीं, इस बीच पुलिसकर्मियों का सादे कपड़ों में मुख्यालय में पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। बैठक में पुलिसकर्मी खुलकर अपनी बातें रखते देखे गए।
वहीं, मीडिया कर्मियों के प्रवेश पर पाबंदी कर दी गई। इस दौरान पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार समेत तमाम विशेष आयुक्त मंच पर बैठकर पुलिसकर्मियों से संवाद करते रहे।
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महिला पुलिसकर्मी भी प्रदर्शन में आईं आगे
हर जिले पुलिसकर्मियों का मुख्यालय पहुंचने का सिलसिला जारी है। अधिकारियों को समझ में नहीं आ रहा है कि इस मामले को कैसे हैंडल किया जाए। कोई पुलिसकर्मी किसी अधिकारी की सुनने को तैयार नहीं हो रहा है। उन्हें डर नहीं लग रहा है उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।
इस दौरान सभी बारी-बारी से वकीलों के बारे में अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। धीरे-धीरे पुलिस कर्मियों का गुस्सा और तेज होता दिखा। दिन चढ़ने के साथ ही बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मी भी प्रदर्शन में शामिल होने लगी हैं।
क्याें दिल्ली पुलिस में हो रही बगावत?
बता दें कि तीस हजारी कोर्ट परिसर में हुई हिंसा की घटना के बाद यह दूसरा मौका है जब दिल्ली पुलिस के कर्मियों ने अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए सीधे तौर पर पुलिस मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया है।
महकमे में नारेबाजी से मचा हड़कंप
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस मुख्यालय के आसपास भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया था। प्रदर्शन कर रहे जवानों ने उच्च अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप करने और पुलिसकर्मियों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई रोकने की मांग की। इस अप्रत्याशित प्रदर्शन से महकमे में हड़कंप मच गया है।
एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने क्या रखीं तीन मांगें?
पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के साथ बैठक में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने कई मांग रखी, जिनमें से एक शर्त थी कि वकीलों के खिलाफ दर्ज केस रद नहीं की जानी चाहिए। दूसरी मांग बार काउंसिल सदस्य का नाम केस से नहीं हटाया जाना चाहिए था। तीसरी मांग यह थी कि जो भी पुलिसकर्मी सोमवार के प्रदर्शन में शामिल हुए हैं, उनके खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने कहा, 'अगर पुलिस विभाग निलंबन से लेकर और भी कोई सख्त कार्रवाई करना है तो केवल मेरे खिलाफ की जाए।'
किसी भी आईपीएस की बात सुनने को नहीं तैयार
हालांकि, पहले राउंड की बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल सका। इससे सभी पुलिसकर्मी ऑडिटोरियम से बाहर आ गए। कुछ देर बाद खबर आई कि अब फिर दूसरी बार बैठक शुरू होने वाली है। बता दें कि यूं तो दिल्ली पुलिस बहुत ही अनुशासित पुलिस मानी जाती है, लेकिन इस मसले को लेकर पुलिसकर्मियों में गुस्सा इतना ज्यादा है कि वे पुलिस आयुक्त समेत किसी भी आईपीएस की कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं हो रहे हैं।
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