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MLC Election का रिजल्ट आने में क्यों लग गए 24 घंटे से ज्यादा समय, समझिए काउंटिंग का पूरा प्रोसेस

Published: Wed, 28 Oct 2026 01:06 PM (IST)Updated: Wed, 28 Oct 2026 01:37 PM (IST)

एमएलसी चुनाव के नतीजे आने में 24 घंटे से अधिक का समय क्यों लगता है, यह जानने के लिए मतगणना ...और पढ़ें

एमएलसी चुनाव के एक काउंटिंग सेंटर की तस्वीर।

एमएलसी चुनाव के एक काउंटिंग सेंटर की तस्वीर।

HighLights

  1. मतपत्रों को मिलाकर बंडल बनाने में लगता है समय।

  2. अवैध मतों की छंटनी और जीत का कोटा निर्धारण।

  3. वरीयता के आधार पर वोटों का ट्रांसफर जटिल प्रक्रिया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के चार राज्यों में विधान परिषद (MLC) के शिक्षक और स्नातक (Teachers & Graduates) निर्वाचन क्षेत्रों में 27 अक्तूबर से ही मतगणना जारी है। उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और केरल में हो रही एमएलसी चुनाव की मतगणना में आखिर 24 घंटे से भी ज्यादा समय क्यों लग रहा है और आखिर विधान परिषद चुनाव बैलेट से क्यों होते हैं, जानने के लिए पढ़ें विस्तार से...

विधान परिषद चुनाव में कैसे होती है वोटिंग?

एमएलसी का चुनाव अन्य चुनावों से काफी अलग होता है। इसमें ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote System) के तहत वरीयता (Preference) के आधार पर गिनती की जाती है।

चरणवार तरीके से होती है मतगणना

1.मतपत्रों को मिक्स कर बंडल बनाना (Mixing and Bundling)

वोटिंग के बाद सभी बैलट बॉक्स को काउंटिंग सेंटर पर लाया जाता है। गोपनीयता बनाए रखने के लिए सभी बूथों के बैलेट पेपर्स को एक बड़े ड्रम/टेबल पर आपस में मिला दिया जाता है, ताकि यह पता न चले कि किस बूथ से किस प्रत्याशी को कितने वोट मिले। इसे मिक्सिंग कहते हैं।

इसके बाद बैलेट पेपर्स के 25-25 या 50-50 के बंडल तैयार किए जाते हैं। इस प्रोसेस में लंबा समय लगता है। इस बार कई सीटों पर इस प्रक्रिया में 27 अक्तूबर की शाम हो गई थी।

2. अवैध मतों की छंटनी (Invalid Votes Removal)

बंडल बन जाने के बाद उनमें से अवैध मतपत्रों को अलग किया जाता है। कोई वोट कैंसिल होने के तीन मुख्य कारण होते हैं-

चुनाव आयोग द्वारा दिए गए विशेष बैंगनी स्केच पेन के अलावा किसी अन्य पेन या पेंसिल का प्रयोग अगर वोट देने के लिए किया गया हो तो वो वोट कैंसिल हो जाता है।

  • पहली पसंद के रूप में एक से अधिक प्रत्याशियों के आगे '1' लिख देना।
  • नंबर की जगह शब्दों में (जैसे 'One' या 'एक') लिखना या कोई पहचान का चिह्न छोड़ना।

3. जीत का कोटा तय करना

छांटकर वैध वोट निकालने के बाद जीत के लिए जरूरी न्यूनतम वोटों का 'कोटा' निर्धारित किया जाता है।

इसके लिए निम्न फॉर्मूला अपनाते हैं-

कोटा= (कुल वैध वोट/कुल सीटें+1)+1

उदाहरण के लिए

अगर एक सीट के लिए कुल 10 हजार वोट वैध हैं तो-
कोटा= (10000/1+1)+1= 50001 वोट

यानी जीतने वाले प्रत्याशी को 5,001 वोट पाना अनिवार्य है।

4. प्रथम वरीयता के वोटों की गिनती

  • कोटा तय हो जाने के बाद प्रथम वरीयता के वोटों की गिनती होती है। यानी उन बैलेट पेपर्स की गिनती जिनमें 1 नंबर लिखा गया हो।
  • अगर कोई प्रत्याशी ऐसा है जो पहली ही गिनती में निर्धारित कोटा जितने वोट हासिल कर लेता है तो उसे वहीं पर तुरंत विजेता घोषित कर दिया जाता है।
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5. एलिमिनेशन और द्वितीय/तृतीय वरीयता का ट्रांसफर

यदि प्रथम वरीयता की गिनती में किसी को भी कोटा नहीं मिलता, तो एलिमिनेशन राउंड शुरू होता है:

  1. सबसे कम वोट पाने वाले प्रत्याशी को दौड़ से बाहर कर दिया जाता है।
  2. बाहर किए गए प्रत्याशी के बैलेट पेपर्स को दोबारा देखा जाता है और उन पर दर्ज दूसरी वरीयता यानी नंबर 2 के वोटों को संबंधित प्रत्याशियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
  3. वोटों के जुड़ने के बाद फिर से देखा जाता है कि क्या किसी प्रत्याशी ने कोटा पार किया।
  4. यदि फिर भी कोई कोटा हासिल नहीं कर पाता, तो यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है-
  • जब तक कोई प्रत्याशी कोटा प्राप्त न कर ले।
  • या फिर बचे हुए कुल प्रत्याशियों में से सिर्फ एक ही प्रत्याशी मैदान में न रह जाए।

रिजल्ट में देरी का कारण

वरीयता अंकों के आधार पर मतपत्रों को बार-बार छांटने, री-चेकिंग करने और वोटों के ट्रांसफर की प्रक्रिया लंबी चलने के कारण एमएलसी चुनाव के अंतिम नतीजे आने में कई घंटे या 1-2 दिन तक का समय लग जाता है। जो इस बार भी चार राज्यों के एमएलसी चुनाव में लग रहा है।

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