इम्तियाज अली से सीखे गुर, बॉबी-तापसी से जाने संघर्ष: दिल्ली में थमा JFF का कारवां, अब UP में जमेगा रंग
जागरण फिल्म फेस्टिवल (JFF) दिल्ली में GenZ की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने सिनेमा के प्रति युवा पीढ़ी के गहरे प्रेम को साबित किया। जानिए दिल्ली में आयोजित JFF में क्या खास रहा...

अगले पड़ाव की ओर बढ़ा जागरण फिल्म फेस्टिवल।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
स्वदेश कुमार, जागरण नई दिल्ली। कोरोना काल के बाद भले ही यह अटकलें लगती रही हों कि सिनेमाघरों में सिर्फ बड़े बजट की फिल्में ही दर्शकों को खींच पाएंगी या फिर उन्हें आकर्षित करने के लिए कुछ अलग करना होगा, लेकिन राजधानी में चार दिन तक चले जागरण फिल्म फेस्टिवल (जेएफएफ) में GenZ की बड़ी संख्या में मौजूदगी और उनके जुनून ने इन तमाम आशंकाओं को खारिज कर दिया।
इसने साबित किया कि सिनेमा के प्रति युवा पीढ़ी का प्रेम आज भी उतना ही गहरा है।
GenZ को समझने आईं तापसी
फेस्टिवल में आई अभिनेत्री तापसी पन्नू (Taapsee Pannu) ने भी कहा था कि नई जनरेशन सिनेमा को कैसे फील कर रही है, क्या उम्मीद कर रही, क्या देखना चाह रही है? यही फील लेकर जाना चाह रही हूं। युवा दर्शकों की इसी नब्ज को समझने और उनके सिनेमा प्रेम को करीब से महसूस करने का मौका जेएफएफ ने भी दिया।
फिल्म फेस्टिवल का अगला पड़ाव
दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस स्थित अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में दिल्ली के सिनेप्रेमियों के दिलों पर राज करने के बाद जेएफएफ अगले साल फिर से आने का वादा कर विदा हो गया। अब इस फेस्टिवल का अगला पड़ाव लखनऊ व कानपुर होगा।
दिल्ली में चार दिन खास रहा JFF
जेएफएफ में चार दिनों तक देसी-विदेशी सिनेमा की स्क्रीनिंग के साथ कई फिल्मों का वर्ल्ड प्रीमियर भी हुआ। मधुर भंडारकर, सुधीर मिश्रा, इम्तियाज अली (Imtiaz Ali), पेन नलिन जैसे फिल्मकारों से सिनेप्रेमियों को फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखने का मौका मिला तो टेस जोसेफ और मुकेश छावड़ा जैसे कास्टिंग डायरेक्टरों ने सिनेमाई दुनिया में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं की शंकाओं को समाधान किया।
सितारों ने सुनाई जिंदगी की दास्तां
वहीं, अभिनेता बॉबी देओल (Bobby Deol), मकरंद देशपांडे और अभिनेत्रियों तापसी पन्नू, मौसमी चटर्जी के साथ संवाद ने उनके संघर्षों के साथ उनकी फिल्मी और निजी जिंदगी में झांकने का एक अवसर मिला।

फेस्टिवल से दर्शक सिर्फ फिल्मों की यादें लेकर नहीं लौटे, बल्कि सिनेमा को देखने का नया नजरिया भी साथ लेकर गए। सवालों और संवादों से सजा माहौल यह संदेश दे गया कि सिनेमा सिर्फ पर्दे पर दिखाई देने वाली कहानी नहीं, बल्कि उसे समझने, महसूस करने और उससे कुछ सीखने का भी जरिया है। माध्यम और उपकरण चाहे जितने बदल जाएं, सिनेमा का मूल आधार हमेशा रचनात्मकता, कल्पना और मानवीय संवेदनाएं ही रहेंगी।
एल मुरुगन ने की घोषणा
जेएफएफ के 14वें संस्करण के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय सूचना व प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल मुरुगन ने घोषणा की कि ऑरेंज इकोनॉमी से देश में अगले चार सालों में 20 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। ऑरेंज इकोनॉमी में रचनात्मकता, कला, संस्कृति और मनोरंजन से जुड़ी आर्थिक गतिविधियां शामिल हैं। बहरहाल, इन वादों के साथ जेएफएफ अपनी कई खुशनुमा यादों को देकर विदा हो गया।
खास बातें
- मधुर भंडारकर, सुधीर मिश्रा, इम्तियाज अली, पेन नलिन जैसे फिल्मकारों से सिनेप्रेमियों को फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखने का मौका मिला
- बाबी देओल, मकरंद देशपांडे, तापसी पन्नू, मौसमी चटर्जी आदि के साथ संवाद ने उनकी फिल्मी और निजी जिंदगी में झांकने का दिया अवसर
- टेस जोसेफ, मुकेश छावड़ा जैसे कास्टिंग डायरेक्टरों ने सिनेमाई दुनिया में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं की शंकाओं को किया समाधान
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