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12 की उम्र में Padmini की मासूमियत, लता दीदी की गायिकी; 48 साल बाद भी जन्माष्टमी पर घर-घर में बजता है ये भजन

Updated: Thu, 03 Sep 2026 09:10 AM (GMT+05:30)

4 सितंबर को देशभर में जन्माष्टमी की धूम देखने को मिलेगी।  इस मौके लता मंगेशकर का गाया भजन पिछले 48 सालों से हर घर में बजता है।

जन्माष्टमी पर 48 साल बाद भी पहली पसंद है ये भजन/ फोटो- इंस्टाग्राम

जन्माष्टमी पर 48 साल बाद भी पहली पसंद है ये भजन/ फोटो- इंस्टाग्राम

HighLights

  1. 48 सालों से जन्माष्टमी पर बना हुआ है पहली पसंद 

  2. पद्मिनी कोल्हापुरे पर फिल्माया गया था यह गीत

  3. लता मंगेशकर और मन्ना डे ने गाया यह सुरीला भजन

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। जन्माष्टमी आते ही कान्हा पर फिल्माए गए गानों और भजनों की गूंज हर गली मोहल्लों में सुनाई देती है। एक तरफ जहां मंदिरों में रात को 12 बजे पूरे जोरों-शोरों के साथ कान्हा के जन्मोंत्सव मनाया जाता है, तो वहीं दही हांडी कम्पीटिशन की तैयारियां हफ्ते भर से पहले से शुरू हो जाती हैं।

जन्माष्टमी के त्योहार में चार चांद लगा देते हैं, कान्हा से जुड़े गाने। बॉलीवुड फिल्मों में भी कृष्ण भक्ति पर कई गाने बने हैं। हालांकि, एक कल्ट भजन तो ऐसा है, जो पिछले 48 सालों से इस मौके पर घर-घर में बजता ही बजता है। यह भक्ति से भरपूर गीत आज भी बाल-गोपाल के जन्मोत्सव की जान है।

48 सालों से जन्माष्टमी का है नंबर वन भजन

जन्माष्टमी के खास मौके पर जिस भजन की धुन लोगों को भक्ति भावना से ओत-प्रोत कर देती है, उसे लता मंगेशकर और मन्ना डे ने अपनी सुरीली आवाज से और भी खास बनाया है। गाने के लिरिक्स हैं 'यशोमती मैया से बोले नंदलाला राधा क्यूं गोरी मैं क्यों काला'। भजन के लिरिक्स पंडित नरेंद्र शर्मा ने लिखे और इसका म्यूजिक लक्ष्मीकांत प्यारे लाल ने दिया।

यह भजन 48 साल पहले बाल कलाकार के रूप में फिल्मों में एंट्री करने वालीं पद्मिनी कोल्हापुरे पर फिल्माया गया था, जिन्होनें सत्यम शिवम सुंदरम में रूपा (जीनत अमान) के बचपन का किरदार अदा किया था, जो बचपन से ही मंदिर में जाकर सुबह-सुबह कृष्ण भक्ति करती है। इस सीन में एक छोटी सी लड़की की अटूट श्रद्धा देख गांव वाले भी हैरान रह जातै हैं।

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सत्यम शिवम सुंदरम है कल्ट क्लासिक

सत्यम शिवम सुंदरम साल 1978 में रिलीज हुई हिंदी सिनेमा की वन ऑफ द बेस्ट फिल्मों में से एक है। जिसकी कहानी रूपा के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका आधा चेहरा जला होता है। फिल्म में शशि कपूर का किरदार रूपा की महज आवाज सुनकर ही उस पर दिल हार बैठता है, लेकिन जब उसकी जली हुई शक्ल देखता है, तो वह उससे दूर भागता है और ऐसे ही कहानी आगे बढ़ती है।

 Video Credit: Dard Bhare Song

राज कपूर ने अपनी इस फिल्म में समाज को बाहरी खूबसूरती और आंतरिक खूबसूरती का एक आइना दिखाया था। मूवी के निर्देशन की कमान भी राज कपूर ने ही संभाली थी। फिल्म में जीनत अमान और शशि कपूर मुख्य भूमिका में थे। 

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