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The Odyssey Review: जबरदस्त है 'द ओडिसी' का क्लाइमैक्स, ऑस्कर वाली है एक्टर्स की एक्टिंग; पढ़ें रिव्यू

By Smita SrivastavaEdited By: Tanya Arora
Updated: Wed, 15 Jul 2026 09:40 PM (IST)

'द ओडिसी' जल्द ही सिनेमाघरों में दस्तक देगी। इंडिया में भी क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म को लेकर जबरदस्त क्रेज है। क्या वाकई यह फिल्म दर्शकों के लिए पैसा वसूल होगी, नीचे पढ़ें रिव्यू।

'द ओडिसी' मूवी रिव्यू/ फोटो- Jagran Graphics

'द ओडिसी' मूवी रिव्यू/ फोटो- Jagran Graphics

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संक्षेप में पढ़ें

स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। प्राचीन यूनानी कवि होमर के महाकाव्य ओडिसी की कालजयी कल्पना को निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन ने जिस भव्यता, संवेदनशीलता और सिनेमाई कौशल के साथ बड़े पर्दे पर जीवंत किया है, वह प्रशंसनीय है। नोलन ने न केवल इस महाकाव्य की आत्मा और गरिमा को अक्षुण्ण रखा है, बल्कि उसे आधुनिक तकनीक के सहारे ऐसी दृश्यात्मक भव्यता दी है कि हर फ्रेम में सौंदर्य और भव्यता का अद्भुत संतुलन दिखाई देता है।

यह फिल्म सिर्फ एक वीर योद्धा की रोमांचक घर-वापसी की यात्रा नहीं, बल्कि साहस, धैर्य, निष्ठा, परिवार, प्रेम और मानवीय संघर्ष जैसे सार्वभौमिक मूल्यों की भी गहन पड़ताल करती है। फिल्म को अत्याधुनिक आईमैक्स कैमरों पर शूट किया गया है, जिसकी वजह से विशाल समुद्र, प्राकृतिक दृश्य और एक्शन सीक्वेंस अभूतपूर्व विस्तार और यथार्थ के साथ पर्दे पर उभरते हैं।

क्या है 'द ओडिसी' की कहानी?

इस महाकाव्य की कहानी इथाका के राजा ओडीसियस के इर्द-गिर्द घूमती है। ट्राय का युद्ध जीत चुका ओडीसियस अपनी पत्नी पेनेलोप और बेटे टेलीमेकस के पास घर लौटना चाहता है। इस सफर के दौरान भोजन की तलाश में ओडीसियस से एक बड़ी भूल हो जाती है। वह एक-आंख वाले दैत्य साइक्लोप्स पालीफेमस को अंधा कर देता है। पालीफेमस समुद्र के देवता पोसीडान का पुत्र होता है। नाराज पोसीडान शाप देता है कि ओडीसियस आसानी से अपने घर नहीं पहुंच पाएगा। इसकी वजह से उसे घर पहुंचने में दस वर्ष लग जाते हैं।

फिल्‍म की शुरुआत पेनेलोप (ऐन हैथवे) की जिंदगी को दिखाने से होती है। महल में कैद पेनेलोप से सैकड़ों राजकुमार विवाह करना चाहते हैं। इनमें एंटीनस (रॉबर्ट पैटिनसन) अग्रणी है। एंटीनस उन सूटर्स (वर पात्रों) का नेता है, जो ओडीसियस (मैट डेमन) के महल में रहते हैं, उसके धन का दुरुपयोग करते हैं और पेनेलोप पर शादी का दबाव बनाते हैं। दूसरी ओर ओडीसियस सात वर्षों से कैलिप्सो (शार्लीज थेरान) के साथ रह रहा है।

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वहां से ओडीसियस के अतीत की परतें खुलना आरंभ होती हैं। उधर, टेलीमेकस (टाम हालैंड) अपनी मां पेनेलोप से झूठ बोलकर अपने पिता की खोज में निकलता है। एंटीनस उसकी हत्या की साजिश रचता है, ताकि सत्ता पर उसका दावा खत्म हो जाए। फिर ओडीसियस भिखारी का वेष धारण कर इथाका लौटता है।

छोटे-बड़े हर पात्र को गंभीरता से कहानी में गढ़ा

क्रिस्टोफर नोलन ने द ओडिसी को जिस विस्तार, संवेदनशीलता और भव्यता के साथ रूपांतरित किया है, वह विस्मित कर देता है। ओडीसियस की यात्रा में जादूगरनी सर्सी द्वारा उसके साथियों को सूअर बना देने का प्रसंग हो, सायरन का अपने मोहक गीतों से नाविकों को मृत्यु के मुंह तक खींच ले जाने वाला दृश्य हो या फिर समुद्री खतरों के बीच से गुजरने वाला प्रसंग, हर दृश्य को उन्होंने असाधारण बारीकी और सिनेमाई कौशल के साथ रचा है। कई क्षण ऐसे आते हैं, जब लगता है मानो होमर की कालजयी रचना शब्दशः नहीं, बल्कि उसकी आत्मा सहित पर्दे पर जीवंत हो उठी हो।

भले ही आप इस महाकाव्य की कहानी से परिचित हों, लेकिन उसे बड़े पर्दे पर साकार होते देखना रोमांचकारी और यादगार अनुभव है। फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह भी है कि नोलन ने केवल नायक ही नहीं, बल्कि हर छोटे-बड़े पात्र को समान गंभीरता से गढ़ा है। यहां तक कि ओडीसियस का वफादार कुत्ता आर्गोस, जब उससे मिलता है तो वह फिल्म के सबसे मार्मिक दृश्यों में से एक बन जाता है।

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छह अलग-अलग देशों में शूट हुई 'द ओडिसी'

फिल्‍म की सबसे बड़ी खासियत है इसके शानदार विजुअल्‍स। इसके लिए सिनेमेटोग्राफर होयटे वैन होयटेमा (Hoyte van Hoytema) की तारीफ बनती है। फिल्‍म को छह अलग अलग देशों में शूट किया गया है। होयटे ने प्राकृतिक सुंदरता और ओडीसियस के सफर को इतनी खूबसूरती और जीवंतता के साथ कैद किया है कि कई दृश्य लंबे समय तक स्मृति में बसे रहते हैं। वहीं लुडविग गोरान्सन का संगीत हर दृश्‍य के भाव के अनुरुप है। फिल्‍म के प्रोडक्‍शन टीम की भी तारीफ बनती है जिसने उस युग के परिवेश को बहुत बारीकी से गढ़ा है।

फिल्‍म का एक्‍शन भी काबिले तारीफ है। ओडीसियस की घर वापसी के दौरान आने वाली हर चुनौती को जिस रोमांच और तीव्रता के साथ पर्दे पर उतारा गया है, वह दर्शकों को सीट से बांधे रखता है। चाहे एक आंख वाले दैत्‍य को शिकस्‍त देना हो या विशालयकाय लोगों से भिडंत हर एक्‍शन दृश्‍य रोमांचक है। खास तौर पर क्‍लाइमैक्‍स में पारंपरिक हथियारों के साथ लड़ाई का दृश्‍य।

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ऑस्कर अवॉर्ड विनिंग है सबकी एक्टिंग 

कलाकारों में मैट डेमन ओडीसियस के रूप में सिर्फ एक महान योद्धा नहीं, बल्कि संवेदनशील पति, स्नेही पिता और जिम्‍मेदार नेता के रूप में भी गहरी छाप छोड़ते हैं। पत्नी और पुत्र से वर्षों दूर रहने की पीड़ा हो, घर लौटने की अटूट चाह, युद्ध के मैदान का साहस या अपने साथियों के प्रति उनका अपनापन वह हर भाव को पूरी शिद्दत और सहजता के साथ पर्दे पर साकार करते हैं। वह ओडीसियस के बाहरी पराक्रम के साथ उसके आतंरिक द्वंद्व को भी उतने ही प्रभावशाली तरीके से व्‍यक्‍त करते हैं

य‍ह अभिनय उन्‍हें अगले साल प्रतिष्ठित ऑस्‍कर अवार्ड भी जीता सकता है। ऐन हैथवे ने पेनेलोप के धैर्य, प्रेम और अटूट विश्वास को बड़ी सहजता और गरिमा के साथ पर्दे पर जीवंत किया है। टेलीमेकस की मासूमियत और जोश को टाम हालैंड सधे तरीके से पर्दे पर साकार करते हैं। हालांकि वर्षों बाद पिता से मिलन वाले दृश्‍य को थोड़ा और मार्मिक बनाने की गुंजाइश थी। शार्लीज थेरान, लुपीटा न्योंगो, जेंडया भी अपनी भूमिकाओं में याद रह जाती हैं।

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द ओडिसी अंत में देती है खास संदेश

द ओडिसी का संदेश बेहद स्पष्ट और मानवीय है कि सिर्फ शारीरिक शक्ति ही किसी इंसान को महान नहीं बनाती, बल्कि बुद्धिमत्ता, धैर्य, निष्ठा और विपरीत परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता ही उसकी असली पहचान होती है। कुल मिलाकर ‘द ओडिसी’ केवल ओडीसियस की यात्रा नहीं, बल्कि हर उस इंसान का सफर बन जाती है, जो तमाम संघर्षों के बाद अपनों के पास लौटना चाहता है।

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