हिमाचल में रोपवे से जुड़ेंगे 4 धार्मिक व पर्यटन स्थल, भारी बर्फ में भी पहुंच सकेंगे लोग; DPR प्रक्रिया शुरू
हिमाचल प्रदेश में पर्वतमाला परियोजना के तहत सिरमौर, कांगड़ा और चंबा के चार धार्मिक व पर्यटन स्थलों को रोपवे से जोड़ने के लिए डीपीआर प्रक्रिया शुरू हो गई है।

हिमाचल प्रदेश में 4 रोपवे प्रोजेक्ट बनेंगे। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
केंद्र सरकार की पर्वतमाला परियोजना के तहत पहल।
सिरमौर, कांगड़ा, चंबा के 4 स्थल रोपवे से जुड़ेंगे।
भारी बर्फबारी में भी पहुंच आसान, पर्यटन को बढ़ावा।
जागरण संवाददाता, मंडी। हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को पंख लगाने और दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर श्रद्धालुओं के सफर को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तहत कार्यरत राष्ट्रीय राजमार्ग लाजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) ने पर्वतमाला परियोजना के तहत हिमाचल के सिरमौर जिले में शिरगुल महादेव मंदिर, कांगड़ा में आदि हिमानी चामुंडा मंदिर, पालमपुर-थथरी-चुंजा ग्लेशियर व चंबा जिले के भरमौर में भरमाणी माता मंदिर को रोपवे से जोड़ने के लिए कदम बढ़ाए हैं।
इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इन चार परियोजनाओं के दायरे में आने वाले क्षेत्र अपनी आध्यात्मिक और प्राकृतिक विशिष्टता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं।
शिरगुल महादेव मंदिर
सिरमौर और शिमला जिले की सीमा पर स्थित चूड़धार चोटी पर लगभग 3,647 मीटर की ऊंचाई पर भगवान शिव के रूप में पूजे जाने वाले ईष्टदेव शिरगुल महादेव का पवित्र और ऐतिहासिक स्थल है।
आदि हिमानी चामुंडा मंदिर
कांगड़ा में धौलाधार पर्वत शृंखला की गोद में लगभग 3,185 मीटर की ऊंचाई पर स्थित आदि हिमानी चामुंडा मंदिर नंदिकेश्वर धाम मां चामुंडा का मूल एवं प्राचीन स्थान है।
भरमाणी माता मंदिर
चंबा जिले के भरमौर से करीब चार किलोमीटर दूर और 2,700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित भरमाणी माता मंदिर का भी विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि मणिमहेश यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यहां दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है।
पालमपुर का चुंजा ग्लेशियर
इसके अलावा, कांगड़ा जिले के पालमपुर के पास स्थित चुंजा ग्लेशियर क्षेत्र अपने कठिन ट्रैकिंग रास्तों, हरी-भरी वादियों और बर्फ से ढकी चोटियों के कारण साहसिक पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। कंसल्टेंट्स को अत्याधुनिक तकनीक, भू-तकनीकी जांच, स्थलाकृतिक सर्वेक्षण और यातायात मांग का गहन आकलन करने का जिम्मा सौंपा गया है।
भारी हिमपात में भी जारी रहेगा सफर
पर्यावरण और वन स्वीकृतियों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। इन रोपवे परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से भारी हिमपात के दौरान बंद रहने वाले रास्तों की समस्या से निजात मिलेगी। साथ ही, वृद्ध व असमर्थ श्रद्धालु भी आसानी से इन पवित्र स्थलों के दर्शन कर सकेंगे। रोजगार के नए अवसर सृजित होने से स्थानीय आर्थिकी मजबूत होगी।
रोपवे नेटवर्क से जुड़ेंगे ये चार रूट
- सिरमौर : शिरगुल महादेव मंदिर से चूड़धार (7.9 किलोमीटर)
- कांगड़ा : चामुंडा से आदि हिमानी चामुंडा (6.5 किलोमीटर)
- चंबा : भरमौर से भरमाणी माता मंदिर (1.6 किलोमीटर)
- कांगड़ा : पालमपुर-थथरी-चुंजा ग्लेशियर (5.7 किलोमीटर)
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