हिमाचल सरकार ने फिर लिया 600 करोड़ का कर्ज, राज्य का कुल ऋण एक लाख करोड़ पार
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने वित्तीय संकट के चलते बाजार से 600 करोड़ रुपये का नया ऋण लेने का ...और पढ़ें
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हिमाचल सरकार ले रही 600 करोड़ का ऋण, कुल ऋण 1.04 लाख पार हुआ।
HighLights
हिमाचल सरकार ने वित्तीय संकट के कारण 600 करोड़ का ऋण लिया।
राज्य का कुल कर्ज अब 1.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक हुआ।
यह इस वित्त वर्ष का छठा ऋण है, ब्याज दर 7.78% होगी।
राज्य ब्यूरो, शिमला। आर्थिक संकट से जूझ रही हिमाचल की सुक्खू सरकार ने एक बार फिर बाजार से त्रण लेने का फैसला किया है। वित्त विभाग के प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन की ओर से 600 करोड़ रुपये के नए ऋण के लिए अधिसूचना जारी कर दी है।
सरकार 7.78 प्रतिशत ब्याज दर वाला एसजीएस-2044 स्टाक दोबारा जारी करेगी। 6 अक्टूबर को रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) मुंबई में ई-कुबेर सिस्टम से नीलामी करेगा और 7 अक्टूबर को प्रदेश सरकार के खाते में धनराशि पहुंचेगी।
यह ऋण 18 साल के लिए है और वापसी 24 जून, 2044 को होगी। ब्याज हर साल दो बार 24 दिसंबर और 24 जून को चुकाना पड़ेगा। दीपावली से पहले कर्मचारियों को सैलरी और पेंशन देने के लिए भी सरकार को अक्सर कर्ज का सहारा लेना पड़ता है। प्रदेश सरकार की ओर से लिया जा रहा ऋण इस वित्त वर्ष 2026-27 का छठा है।
इससे पहले प्रदेश सरकार ने अप्रैल में 900 करोड़, मई में 500 करोड़, जून में दो किश्तों 400-300 कुल 700 करोड़, जुलाई में 700 करोड़ का ऋण लिया गया। जुलाई तक सरकार 2800 करोड़ ले चुकी थी। अब अक्टूबर में लिए जा रहे 600 करोड़ के ऋण को मिलाकर कुल ऋण का आंकड़ा 3400 करोड़ हो जाएगा।
पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने 41,173 करोड़ का ऋण लिया था और 32,004 करोड़ लौटाया था। सरकार पर कुल कर्ज अब 1.04 लाख करोड़ के पार है, जो इस साल 1.12 लाख करोड़ तक पहुंचेगा।
बार-बार ऋण लेने के पीछे कारण
राज्य को पहले हर साल 8-10 हजार करोड़ की रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट मिलती थी, अब बंद। सरकार हर 100 रुपये में से 80 रुपया वेतन, पेंशन और पुराने कर्ज के ब्याज में खर्च कर देती है। विकास के लिए 20 रुपये ही बचता है। इस साल सरकार को सिर्फ ब्याज के तौर पर ही 7,271 करोड़ चुकाना है।
