हिमुडा के सीईओ सह-सचिव की नियुक्ति रद, हिमाचल हाई कोर्ट ने सीनियर अधिकारी की याचिका पर सुनाया फैसला
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने हिमुडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी-सह-सचिव की नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है। ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
हिमुडा सीईओ-सह-सचिव की नियुक्ति उच्च न्यायालय ने रद्द की।
अपात्र अधिकारी की नियुक्ति 2012 सेवा नियमों के विरुद्ध थी।
न्यायालय ने दो सप्ताह में पात्र उम्मीदवार की नई नियुक्ति का निर्देश दिया।
राज्य ब्यूरो, शिमला। उच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हिमुडा) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी-सह-सचिव के पद पर की गई नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए उसे रद कर दिया है। यह अहम फैसला न्यायाधीश ज्योत्सना रेवाल दुआ की पीठ ने सुनाया है। यह फैसला हिमुडा की मुख्य अभियंता अंजोरी कपूर द्वारा दायर एक याचिका के आधार पर आया है।
याचिकाकर्ता ने अपने से जूनियर अधिकारी सुरिंदर कुमार वशिष्ठ की सीईओ पद पर नियुक्ति को चुनौती दी थी। न्यायालय ने अपने फैसले में पाया कि प्रतिवादी नंबर 4 को मुख्य अभियंता के पद पर नियमित रूप से पदोन्नत नहीं किया गया था, बल्कि उनके अधीक्षण अभियंता के पद को केवल व्यक्तिगत उपाय के तहत अस्थायी रूप से अपग्रेड किया गया था।
सेवा नियमों के तहत नहीं थे पात्र
अदालत ने स्पष्ट किया कि 2012 के सेवा नियमों के तहत प्रतिवादी सीईओ पद के लिए पात्र नहीं थे, क्योंकि उनके पास नियमित मुख्य अभियंता के तौर पर काम करने का अनुभव नहीं था।
अंजोरी कपूर को बताया पात्र
दूसरी ओर, याचिकाकर्ता अंजोरी कपूर नियमित रूप से पदोन्नत वरिष्ठ मुख्य अभियंता होने के कारण इस पद के लिए पूरी तरह पात्र थीं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर एक अपात्र व्यक्ति को इस शीर्ष पद पर नियुक्त कर दिया गया था।
2025 की अधिसूचना खारिज
उच्च न्यायालय ने 27 मई, 2025 को जारी उस अधिसूचना को खारिज कर दिया है, जिसके तहत प्रतिवादी को हिमुडा का सीईओ नियुक्त किया गया था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रतिवादी द्वारा अब तक इस पद पर रहते हुए प्राप्त किए गए वित्तीय लाभों की उनसे वसूली नहीं की जाएगी।
सरकार को निर्देश
न्यायालय ने सरकार और संबंधित अधिकारियों (प्रतिवादियों) को निर्देश दिया है कि वे 2012 के नियमों का सख्ती से पालन करते हुए केवल पात्र उम्मीदवारों के नामों पर विचार करें (जिसमें याचिकाकर्ता भी शामिल हो) और दो सप्ताह के भीतर सीईओ-सह-सचिव के पद पर नई नियुक्ति करें।
