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छात्र आंदोलन को लेकर सभी यूनिवर्सिटी के लिए गाइडलाइन, हिमाचल नियामक आयोग का निर्देश- नाराजगी हल्के में न लें

By Anil Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 22 Oct 2026 06:39 AM (IST)Updated: Thu, 22 Oct 2026 07:44 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग ने सभी निजी विश्वविद्यालयों को छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेने और समय पर समाधान करने के निर्देश दिए हैं।

हिमाचल नियामक आयोग ने प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को गाइडलाइन जारी की है। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल नियामक आयोग ने प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को गाइडलाइन जारी की है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. छात्रों की शिकायतों का समय पर समाधान करें विश्वविद्यालय।

  2. समन्वय समितियां सक्रिय हों, समस्या आयोग को बताएं।

  3. सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करें, अप्रिय घटना रोकें।

अनिल ठाकुर, शिमला। हिमाचल प्रदेश में प्राइवेट यूनिवर्सिटी में छात्रों की नाराजगी और शिकायतों की अनदेखी परिसर में तनाव का कारण बन सकती है। समय रहते समस्याओं का समाधान न होने पर विवाद आंदोलन का रूप ले सकता है। इसे देखते हुए हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग ने सभी निजी विश्वविद्यालयों को सतर्क रहने और छात्रों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन की आहट मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन संवाद से विवाद सुलझाने के लिए सक्रिय हो।

आयोग के सदस्य ललित कुमार ने बताया कि सभी निजी विश्वविद्यालयों को पत्र जारी कर विद्यार्थियों की समस्याओं को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए गए हैं। विश्वविद्यालयों में गठित समन्वय समितियों की नियमित बैठकें होनी चाहिए। 

यदि किसी समस्या का समाधान विश्वविद्यालय स्तर पर संभव न हो तो उसे आयोग के संज्ञान में लाया जाए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस को भी समय रहते सूचित किया जाए, ताकि अप्रिय स्थिति बनने से पहले प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

कागजों तक सीमित न रहें शिकायत निवारण समितियां

आयोग ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए गठित अनिवार्य समितियां केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्हें सक्रिय रूप से शिकायतें सुनने, समयबद्ध निपटारा करने और परिसर में सकारात्मक शैक्षणिक माहौल बनाए रखने पर ध्यान देना होगा। पड़ोसी राज्यों के विश्वविद्यालयों में हाल में सामने आई घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने यह पहल की है। हिमाचल के कुछ विश्वविद्यालयों में भी ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सोलन जिले के एक विश्वविद्यालय में छात्र की आत्महत्या के बाद परिसर का माहौल बिगड़ गया था। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आयोग विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ लगातार संवाद कर रहा है।

सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के भी निर्देश

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने भी प्रदेश के विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की जा चुकी है।

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