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'परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने के बाद चयन प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकते', हिमाचल हाई कोर्ट ने स्पष्ट की स्थिति

By Chaitanya Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 04 Nov 2026 05:39 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी नौकरी की चयन प्रक्रिया में स्वेच्छा से भाग लेकर अनुत्तीर्ण होने वाला अभ्यर्थी बाद में इसे चुनौती नहीं दे सकता।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला परिसर। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. अनुत्तीर्ण अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया को बाद में चुनौती नहीं दे सकते।

  2. हाई कोर्ट ने असिस्टेंट इंजीनियर भर्ती मामले में यह व्यवस्था दी।

  3. उम्मीदवारों ने इंटरव्यू को एकमात्र चयन आधार बताया था।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी नौकरियों की चयन प्रक्रिया पर स्पष्ट किया है कि यदि कोई अभ्यर्थी पूरी चयन प्रक्रिया में स्वेच्छा से भाग लेता है और अंत में अनुत्तीर्ण हो जाता है तो वह बाद में मुड़कर उस चयन मानदंड या प्रक्रिया की वैधता को चुनौती नहीं दे सकता। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज ने भास्कर सहगल और अन्य द्वारा दायर याचिका को खारिज कर यह व्यवस्था दी।

असिस्टेंट इंजीनियर भर्ती का मामला

यह मामला हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 22 जुलाई 2014 को जारी विज्ञापन से जुड़ा है, जिसके तहत अनुबंध आधार पर असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल) क्लास-1 (राजपत्रित) के पदों को भरा जाना था। 2,655 अभ्यर्थियों में से स्क्रीनिंग टेस्ट के बाद 109 को इंटरव्यू के लिए बुलाया था। अंतिम परिणाम आने पर जब याचिकाकर्ताओं का चयन नहीं हुआ तो उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

चयन आधार पर उठाए थे सवाल

याचिकाकर्ताओं ने सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के आधार पर अदालत में दलील दी कि आयोग ने अंतिम चयन का एकमात्र आधार 100 अंक के इंटरव्यू को बनाया था। स्क्रीनिंग टेस्ट के अंक को अंतिम मेरिट में नहीं जोड़ा। आरोप लगाया कि इंटरव्यू के अंकों का कोई अलग से वर्गीकरण नहीं था, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ और मनमाना है, इसलिए इस भर्ती प्रक्रिया को रद कर दोबारा इंटरव्यू करवाए जाएं।

लोक सेवा आयोग का तर्क

लोक सेवा आयोग ने कोर्ट को बताया कि विज्ञापन में पहले ही साफ लिखा था कि अभ्यर्थियों की संख्या अधिक होने पर स्क्रीनिंग टेस्ट सिर्फ शार्टलिस्ट करने के लिए होगा और अंतिम चयन पूरी तरह इंटरव्यू में प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

हाई कोर्ट की टिप्पणी

हाई कोर्ट ने आयोग की इस दलील को सही माना और कहा कि याचिकाकर्ताओं ने विज्ञापन की शर्तों को अच्छी तरह जानने-समझने के बाद ही परीक्षा और इंटरव्यू में भाग लिया था। सिर्फ इसलिए कि परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा वे चयन प्रक्रिया को अवैध नहीं ठहरा सकते।

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