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लद्दाख में दो साल पहले ही भंग हुईं सभी LAHDC, आठ परिषदों में नए सिरे से होंगे चुनाव; क्यों लिया गया यह फैसला?

Published: Thu, 22 Oct 2026 08:18 AM (IST)

लद्दाख प्रशासन ने करगिल LAHDC को भंग कर दिया है, जिससे प्रदेश में आठ स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के चुनाव का रास्ता साफ हो गया है।

लद्दाख में होंगे फिर से चुनाव (फाइल फोटो)

लद्दाख में होंगे फिर से चुनाव (फाइल फोटो)

HighLights

  1. करगिल LAHDC को प्रशासन ने भंग किया

  2. आठ स्वायत्त परिषदों में चुनाव का मार्ग प्रशस्त

  3. प्रशासनिक पुनर्गठन और नए जिलों का गठन कारण

राज्य ब्यूरो, जम्मू। लद्दाख में प्रशासन ने बुधवार को प्रदेश में एकमात्र बची निर्वाचित लोकतांत्रिक संस्था लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद, करगिल (एलएएचडीसी) को भी भंग कर दिया।

प्रशासन ने प्रशासनिक ढांचे के पुनर्गठन, नए जिलों के गठन व एलएएचडीसी करगिल प्रमुख पदाधिकारियों सहित 10 पार्षदों के इस्तीफे को निर्णय का आधार बनाया है।

सभी स्वायत्त परिषदों में होगा चुनाव

इस कदम से लद्दाख में आठ स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के चुनाव कराने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार पूर्ववर्ती लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद, कारगिल की संरचना समाप्त कर दी गई है।

इसके तहत मुख्य कार्यकारी पार्षद, तीन कार्यकारी पार्षदों तथा छह अन्य पार्षदों के पद तत्काल प्रभाव से समाप्त हो गए हैं। इन सभी ने गत 20 अक्टूबर को इस्तीफा दिया था।

परिषद के निर्वाचित और मनोनीत सदस्य अब उसके सदस्य के रूप में अपनी शक्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। परिषद के भंग होने के बाद प्रशासनिक कामकाज और आम जनता को मिलने वाली सेवाओं में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए सभी संबंधित अधिकार, कर्तव्य और कार्य अंतरिम व्यवस्था के तहत कारगिल के उपायुक्त एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी को सौंप दिए गए हैं।

यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक संबंधित कानून और नियमों के अनुसार अलग-अलग स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों का विधिवत गठन नहीं हो जाता।

नए जिलों के बाद पुराने क्षेत्रीय सीमाओं में हुआ बदलाव

यह कार्रवाई लद्दाख के प्रशासनिक ढांचे में हो रहे व्यापक बदलावों के बीच की गई है। नए जिलों के गठन के बाद पुराने कारगिल जिले की क्षेत्रीय सीमाओं में भी बदलाव हुआ है। द्रास, जंस्कार और संकू को नए जिलों के रूप में शामिल किए जाने से कारगिल परिषद के अधिकार क्षेत्र पर भी असर पड़ा है।

इस घटनाक्रम से कुछ दिन पहले उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रख्यापित लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद संशोधन विनियमन, 2026 को अधिसूचित किया था।

नई अधिसूचना ने परिषदों के गठन से संबंधित पूर्ववर्ती अधिसूचनाओं का स्थान ले लिया है। इससे पहले दत 16 अक्टूबर को प्रशासन ने सांकू को लद्दाख का आठवां जिला घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी।

इसके साथ ही, लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद अधिनियम की धारा तीन की उपधारा एक के तहत सांकू स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद के गठन की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी।

परिषदों का कार्यकाल 2028 तक था

संकू जिले के गठन से कारगिल परिषद के क्षेत्राधिकार में बदलाव आया। कारगिल परिषद को भंग करने का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसका कार्यकाल अक्टूबर 2028 तक निर्धारित था।लेह स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद का कार्यकाल 30 अक्टूबर, 2025 को समाप्त हो चुका था।

सूत्रों के अनुसार नई अधिसूचना ने पुरानी व्यवस्था को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया है। वहीं, लेह हिंसा मामले में 10 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले प्रशासन ने वापस ले लिए हैं।

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