जम्मू में शुरू होने जा रहा शादियों का सीजन, 29 अक्टूबर को उदित हो रहा शुक्र तारा; जानें नवंबर-दिसंबर के शुभ मुहूर्त
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, 29 अक्टूबर को शुक्र तारा के उदय होने के बाद विवाह के शुभ मुहूर्त उपलब्ध होंगे। ...और पढ़ें

29 अक्टूबर को शुक्र तारा उदय, खुलेंगे विवाह के शुभ मुहूर्त 2026। (फाइल फोटो)
HighLights
29 अक्टूबर को शुक्र तारा का उदय होगा।
वर्ष 2026 के लिए शुभ विवाह तिथियां घोषित।
स्थानीय पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि आवश्यक।
जागरण संवाददाता, जम्मू। विवाह एवं अन्य मांगलिक संस्कारों की तैयारी कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, 29 अक्टूबर को शुक्र तारा उदित होने के बाद विवाह के शुभ मुहूर्त उपलब्ध होंगे। श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट (पंजीकृत) के अध्यक्ष और ज्योतिषाचार्य महंत रोहित शास्त्री ने वर्ष 2026 के प्रमुख विवाह मुहूर्तों की जानकारी साझा की है।
उनके अनुसार, शुक्र तारा 12 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 56 मिनट पर पश्चिम दिशा में अस्त हुआ था और 29 अक्टूबर को तड़के 3 बजकर 15 मिनट पर पूर्व दिशा में उदित होगा।
भारतीय ज्योतिष परंपरा में गुरु और शुक्र के उदय को विवाह सहित मांगलिक संस्कारों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इनके अस्त रहने की अवधि में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन और यज्ञोपवीत जैसे कार्य आमतौर पर वर्जित माने जाते हैं।
नवंबर और दिसंबर में शुभ तिथियां
वर्ष 2026 में विवाह के लिए नवंबर और दिसंबर में कई शुभ तिथियां हैं। नवंबर में 2, 3, 10, 11, 12, 13, 21, 22, 23, 25 और 26 तारीखें, जबकि दिसंबर में 2, 3, 4, 5, 11 और 12 तारीखें शुभ बताई गई हैं।
गुरु-शुक्र अस्त होने पर भी हो सकती है सगाई
महंत शास्त्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान समेत विभिन्न क्षेत्रों में मुहूर्त स्थानीय पंचांग, परंपराओं और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार तय होते हैं। इसलिए तिथि निर्धारित करने से पहले स्थानीय पंचांग से पुष्टि जरूरी है। गुरु और शुक्र के अस्त काल में सगाई जैसे कार्यक्रम शुभ मुहूर्त के अनुसार किए जा सकते हैं, इन्हें विवाह की तरह निषिद्ध नहीं माना जाता।
पुनर्विवाह और विधवा विवाह में कुछ दोषों से छूट की मान्यता
उन्होंने बताया कि पुनर्विवाह, विधवा या परित्यक्ता महिलाओं के विवाह तथा पुराने या जीर्णोद्धार किए गए भवनों में गृहप्रवेश के मामलों में कुछ दोषों से छूट की मान्यता है। नियमों की व्याख्या परंपरा और व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार होती है।
विवाह का मुहूर्त तय करते समय तिथि के साथ वार, नक्षत्र, योग, करण, लग्न, वर-वधू की कुंडली और उनकी ग्रह-दशाओं पर भी विचार करने की सलाह दी गई है।
