'पिछले दरवाजे' से UCC क्यों ला रहे? उमर अब्दुल्ला ने केंद्र को घेरा, बोले- संसद में बिल लाकर दिखाएं
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रस्तावित यूसीसी बिल को राज्यों के बजाय संसद में लाने की मांग की, ताकि ...और पढ़ें
HighLights
यूसीसी बिल को राज्यों के बजाय संसद में लाने की मांग।
भारत की विदेश नीति के लिए किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं।
चीन के साथ एलएसी स्थिति में सुधार का स्वागत किया।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को प्रस्तावित यूसीसी बिल को अलग-अलग राज्यों के जरिए लागू किए जाने के कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस संबंध में विधेयक को संसद में लाया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकार के पास इसे पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या है या नहीं।
इसके साथ ही उन्होंने मौजूदा केंद्र सरकार की विदेश नीति को सही ठहराते हुए कहा कि हमें इसके लिए किसी दूसरे मुल्क से,विदेश से प्रमाणपत्र की जरुरत नहीं है।
उमर ने राज्यों के जरिए कानून बनाने पर उठाया सवाल
श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कान्फ्रेंस इस मुद्दे पर पहले ही अपना बयान जारी कर चुकी है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कानून बनाने का अधिकार संसद का है और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों का फैसला अलग-अलग राज्यों के स्तर पर नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर आपके पास संख्या है तो इसे संसद में लाएं। अलग-अलग राज्यों के जरिए इसे क्यों लागू किया जा रहा है? उमर ने यह भी कहा कि एनडीए के सभी सहयोगी इस प्रस्ताव के समर्थन में नहीं हैं।
उमर ने सरकार को घेरा
बिहार में जनता दल यूनाइटेड द्वारा इस कदम के विरोध की खबरों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “अगर उनके अपने लोग इसके लिए तैयार नहीं हैं, तो वे इसे पूरे देश में लागू करने की बात कैसे कर सकते हैं?”
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार को विधेयक पारित कराने के लिए “पिछले दरवाजे” का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए, बल्कि इसे संसद में पेश करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि वे इसे संसद में पारित करा पाएंगे। इसलिए वे यह रास्ता अपना रहे हैं।”
UCC पर उमर का BJP पर निशाना
भाजपा पर यूसीसी का इस्तेमाल सांप्रदायिक उद्देश्यों के लिए किए जाने के आरोपों पर उमर ने कहा कि अगर इसे केवल भाजपा शासित राज्यों में लागू किया जाता है तो इसे पूरे देश के लिए सार्वभौमिक नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि पूरा देश भाजपा शासित राज्य नहीं है। कई ऐसे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं जहां भाजपा सत्ता में नहीं है। इसलिए अगर इसे केवल भाजपा शासित राज्यों में लागू किया जाता है, तो यह सार्वभौमिक नहीं है।इस तरह के मुद्दे का फैसला अलग-अलग राज्यों द्वारा नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर संसद के माध्यम से संबोधित किया जाना चाहिए।
वास्तविक नियंत्रण रेखा जिसे एलएसी कहते हैं, की स्थिति में सुधार और चीनी सैनिकों की तैनाती में कमी की खबरों पर उमर अब्दुल्ला ने इसे एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि समय के साथ नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भी स्थिति में सुधार होगा।
'दूसरे देशों से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं'
भारत की विदेश नीति को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को दूसरे देशों से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी विदेश नीति हमारी अपनी है। हम दूसरे देशों के प्रमाणपत्र क्यों तलाशते हैं?
उमर ने कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति को लेकर दूसरे देशों की प्रशंसा या आलोचना को जरूरत से ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए। देश को अपनी नीति और राष्ट्रीय हितों पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए।उन्होंने कहा कि यही हमारी विदेश नीति की सफलता है।
