मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा बनेगा इको टूरिज्म हब: डीसी और डीएफओ ने जंगलों का लिया जायजा, ड्रोन से मैपिंग
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा और आसपास के प्राकृतिक क्षेत्रों को इको टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

रामगढ़ के उपायुक्त और डीएफओ ने दुर्गम क्षेत्रों का निरीक्षण कर मैपिंग की, जिससे स्थानीय रोजगार और पलायन रोकने में मदद मिलेगी।
HighLights
नेमरा और आसपास के प्राकृतिक क्षेत्रों को इको टूरिज्म हब बनाया जाएगा।
रामगढ़ डीसी और डीएफओ ने दुर्गम क्षेत्रों का सघन निरीक्षण किया।
पर्यटन विकास से स्थानीय रोजगार बढ़ेंगे और पलायन रुकेगा।
संसू, रामगढ़ (बरलंगा)। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा और उसके आसपास के प्राकृतिक क्षेत्रों को इको टूरिज्म (Eco Tourism) केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तेजी से तलाशी जा रही हैं।
इसी क्रम में गुरुवार को रामगढ़ के उपायुक्त ऋतुराज और डीएफओ नीतीश कुमार ने पूरे इलाके का सघन निरीक्षण किया।
अधिकारियों की टीम ने गट्टी गढ़ा झरना, छापरगढ़ा, रनबुरु पहाड़, पोढ़ोकोचा और आसपास के जंगलों में करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों का जायजा लिया।
इस दौरान टीम ने कई नदी-नालों को पार किया और ड्रोन कैमरे के माध्यम से पूरे क्षेत्र की मैपिंग की। अधिकारियों ने उपरबरगा के जंगली रास्ते से नेमरा तक का सफर तय किया।
लपसिया नाला पर बने चेकडैम का भी जायजा लिया। नेमरा और इसके आसपास फैली पहाड़ियों की श्रृंखला, घने जंगल, बरकानाला, प्राकृतिक जलस्रोत और पगडंडियां प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थल साबित हो सकती हैं।
इन स्थलों को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने पर ट्रेकिंग, प्रकृति भ्रमण, पहाड़ी पर्यटन, नदी किनारे मनोरंजन स्थल और पर्यावरण अध्ययन केंद्र जैसी गतिविधियां शुरू की जा सकती हैं।
रोजगार के बढ़ेंगे अवसर और रुकेगा पलायन
दुर्गम पगडंडियों को सुरक्षित पर्यटन मार्ग में बदलकर पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। स्थानीय बरलंगा रेलवे स्टेशन की नजदीकी, स्वर्णरेखा नदी और पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे होने के कारण यहां दूसरे राज्यों से पर्यटकों के आने की संभावना है।
इससे स्थानीय स्तर पर बाजार, परिवहन, खानपान, आवास और छोटे व्यवसायों को सीधा लाभ मिलेगा। स्थानीय युवक-युवतियों के लिए गाइड, होमस्टे, होटल, भोजनालय, वाहन सेवा और हस्तशिल्प के क्षेत्र में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
इसके अलावा, महिला स्वयं सहायता समूह पारंपरिक उत्पादों और स्थानीय व्यंजनों के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत हो सकेंगे।
पर्यटन के विकास से सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ-साथ क्षेत्र से होने वाले पलायन को रोकने में भी मदद मिलेगी। स्थानीय विधायक ममता देवी के विधानसभा क्षेत्र में इस पहल को विकास की एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है।
यदि यह योजना ठोस रूपरेखा के साथ आगे बढ़ती है, तो गोला प्रखंड की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
इस दौरान अंचल अधिकारी सीताराम महतो और थाना प्रभारी अशोक कुमार सहित कई अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।