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'ईसाई मिशनरियों ने मतांतरण के लिए किया हर शक्ति का इस्तेमाल', रांची में पुस्तक विमोचन पर बोले इतिहासकार डॉ. दिवाकर मिंज

Published: Mon, 12 Oct 2026 12:26 AM (IST)Updated: Mon, 12 Oct 2026 02:26 AM (IST)

डा. दिवाकर मिंज ने बताया कि झारखंड में ईसाई मिशनरियों ने मतांतरण के लिए हर तरह की शक्तियों का प्रयोग ...और पढ़ें

पुस्तक विमोचन करते इतिहासकार डॉ. दिवाकर मिंज। फोटो जागरण

पुस्तक विमोचन करते इतिहासकार डॉ. दिवाकर मिंज। फोटो जागरण

HighLights

  1. मिशनरियों ने झारखंड में मतांतरण के लिए सभी शक्तियों का प्रयोग किया।

  2. फादर लिवेंस ने गुमला के चैनपुर को मतांतरण का प्रयोग स्थल बनाया।

  3. फादर बुल्के ने रामभक्त पादरी बन आदिवासियों को भ्रमित किया।

जागरण संवाददाता, रांची। इतिहास के जानकार व रांची विश्वविद्यालय में डीन रहे डा. दिवाकर मिंज ने कहा है कि झारखंड में ईसाई मिशनरियों ने मतांतरण के लिए सभी तरह की शक्तियों का प्रयोग किया। उन्होंने फादर कांस्टेंट लिवेंस और फादर कामिल बुल्के को भी इसी सोच का बताया। कहा कि फादर कांस्टेंट लिवेंस ने तो गुमला के चैनपुर को अपना प्रयोग स्थल बना दिया था। वहां के 80 प्रतिशत लोग मतांतरित हो गए। आज भी चर्च की बैठकों में चैनपुर में हुए मतांतरण का उदाहरण दिया जाता है और कहा जाता है कि उसी तरह मतांतरण का अभियान हर जगह चलाना है।

दिवाकर मिंज ने कहा कि फादर कामिल बुल्के ने तो अपने लिए रामभक्त पादरी की छद्म पहचान गढ़ी और आदिवासियों के बीच भ्रमजाल फैलाने का काम किया। उन्होंने भगवान राम को अवतारी पुरुष नहीं कहकर केवल महान पुरुष बताया था। राम की चर्चा के दौरान एकेश्वरवाद पर जोर दिया, जबकि सनातन धर्म में बहुदेववाद है।

डॉ. मिंज रविवार को पेशे से अभियंता सुनील कुमार बरनवाल द्वारा लिखित पुस्तक फादर कांस्टेंट लिबेंस : एक आलोचनात्मक शोध अध्ययन तथा फादर कामिल बुल्के : उच्च बौद्धिक जेसुइट कालनेमि के विमोचन के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन रांची के हरमू स्थित राजगुरु पार्क के सभागार में किया गया था। उन्होंने कहा कि 1885 में मतांतरण के लिए इस इलाके में चार पादरी आए और उनको दो अंग्रेज अधिकारियों ने सहयोग करना शुरू किया। प्रारंभ में सफलता नहीं मिली तो यहां के लोगों की परिस्थितियों का अध्ययन करना शुरू किया। फिर तरह-तरह के भ्रमजाल फैलाए गए और मतांतरण की शुरुआत की गई।

उन्होंने कहा कि आजकल कुछ लोग कहते हैं कि आदिवासी हिंदू नहीं हैं। वैसे लोगों से आग्रह किया कि यह भी तो कहो कि ईसाई आदिवासी नहीं है। इस अवसर पर महिला दार्शनिक परिषद की राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.राजकुमारी सिन्हा ने कहा कि आदिवासियों में ज्ञान का अकूत भंडार है। जरूरत है उनकी क्षमता को जगाने की। सांस्कृतिक रूप से वे समृद्ध हैं।

जल-जंगल और जमीन की पूजा करने वाले आदिवासी ही तो असल सनातनी है। किसी कारण से जो लोग हमारे समाज से अलग हो गए हैं, उनकी स्थिति को समझने की जरूरत है। कामिल बुल्के के बारे में वास्तविक जानकारी लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है। कैसे उन्होंने भगवान राम की आड़ में धर्म परिवर्तन को बढ़ावा दिया।

इस अवसर पर पुस्तक के लेखक सुनील बरनवाल ने कहा कि रोमन कैथोलिक मिशन के सोसाइटी फार जेसस जिसे जेसुइट भी कहते हैं, सबसे आक्रामक दस्ता है और दोनों उस दस्ते से जुड़े थे। आज स्थिति ऐसी है कि झारखंड के कई प्रखंडों में 50 से 70 प्रतिशत लोग मतांतरित हो चुके हैं। इसके लिए जनजागरण करने की जरूरत है। सभी लोगों को संपूर्ण सक्रियता के साथ लगना होगा। सुनील कुमार ने जनजातीय समाज पर कई पुस्तकें लिखी है। इस अवसर पर समाज के कई प्रमुख लोग उपस्थित थे।