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रिम्स डेंटल कॉलेज को मिली बड़ी राहत, रांची यूनिवर्सिटी से बीडीएस की 63 सीटों के लिए स्थायी संबद्धता

Published: Thu, 03 Sep 2026 11:00 PM (IST)Updated: Fri, 04 Sep 2026 09:47 AM (IST)

रिम्स डेंटल कॉलेज को रांची विश्वविद्यालय से बीडीएस की 63 सीटों के लिए स्थायी संबद्धता मिल गई है, जिससे वार्षिक ...और पढ़ें

हर साल नवीनीकरण से मिलेगी मुक्ति।

हर साल नवीनीकरण से मिलेगी मुक्ति।

HighLights

  1. रिम्स डेंटल कॉलेज को बीडीएस की 63 सीटों पर स्थायी संबद्धता मिली।

  2. वार्षिक नवीनीकरण की प्रक्रिया और आर्थिक बोझ से मुक्ति मिलेगी।

  3. एमडीएस की 27 सीटों पर नामांकन प्रक्रिया पहली बार शुरू हुई।

अनुज तिवारी, रांची। रिम्स डेंटल कालेज के लिए बड़ी राहत की खबर है। रांची विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 से बीडीएस पाठ्यक्रम की 63 सीटों के लिए स्थायी संबद्धता प्रदान कर दी है। इससे कालेज प्रबंधन को अब हर वर्ष संबद्धता के नवीनीकरण की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। रांची विश्वविद्यालय की ओर से रिम्स डेंटल कालेज को बीडीएस के लिए स्थायी संबद्धता दी गई है।

स्थाई संबद्धता के लिए वर्षों से प्रयास किया जा रहा था। स्थायी संबद्धता मिलने से कालेज प्रबंधन को आर्थिक राहत भी मिलेगी। अब तक हर वर्ष संबद्धता के नवीनीकरण के लिए हर वर्ष 65 हजार रुपये की राशि जमा करनी पड़ती थी।

इसके साथ ही नवीनीकरण की औपचारिकताओं में लगने वाले समय और संसाधन की भी बचत होगी। कालेज के प्राचार्य डा. जयप्रकाश ने इसे रिम्स डेंटल कालेज और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

एमडीएस की 27 सीटों पर पहली बार चल रही नामांकन प्रक्रिया

रिम्स डेंटल कालेज में एमडीएस की 27 सीटों पर भी पहली बार नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई है। इनमें 13 सीटें राज्य कोटा और 14 सीटें आल इंडिया कोटा के लिए निर्धारित हैं। इन सीटों पर फिलहाल नामांकन की प्रक्रिया चल रही है। एमडीएस की सीटें शुरू होने से दंत चिकित्सा में विशेषज्ञता की पढ़ाई के लिए राज्य के विद्यार्थियों को अपने ही राज्य में बेहतर अवसर मिलेगा।

लगातार प्रयास का मिला परिणाम

डेंटल कालेज के प्राचार्य डा. जयप्रकाश ने बताया कि बीडीएस को स्थायी संबद्धता मिलने से कालेज को हर वर्ष नवीनीकरण कराने की बाध्यता से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि स्थायी संबद्धता कालेज के शैक्षणिक विकास और विद्यार्थियों के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है। उनकेके लगातार प्रयासों के बाद कालेज को यह उपलब्धि हासिल हुई है।

अब कालेज में बीडीएस के साथ एमडीएस की पढ़ाई और नामांकन प्रक्रिया को भी स्थायित्व मिलने से दंत चिकित्सा शिक्षा को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

स्थायी संबद्धता से क्या बदलेगा

रिम्स डेंटल कालेज को बीडीएस की 63 सीटों पर स्थायी संबद्धता मिलने से संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था को स्थिरता मिलेगी। अब हर वर्ष संबद्धता के नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत नहीं होगी। इससे प्रबंधन को कागजी प्रक्रिया के साथ-साथ नवीनीकरण शुल्क के खर्च से भी राहत मिलेगी।

रिम्स डेंटल इंस्टीट्यूट में वर्तमान में बीडीएस की 63 और एमडीएस की 27 सीटें हैं। एमडीएस की 27 सीटें नौ विशेषज्ञता वाले विभागों में तीन-तीन सीटों के रूप में निर्धारित हैं। इनमें ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलाजी, ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी, प्रोस्थोडान्टिक्स, पीरियोडोंटिक्स, कंजरवेटिव डेंटिस्ट्री एंड एंडोडोंटिक्स, पेडोडोंटिक्स, ओर्थोडॉन्टिक्स, ओरल पैथोलॉजी और पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री शामिल हैं।