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रांची में रिम्स की जमीन घेरने में पुलिस से मांगी सुरक्षा; अतिक्रमण, विवाद और धमकियों के बीच रुका बाउंड्री का काम

Updated: Sat, 29 Aug 2026 09:42 AM (IST)

रिम्स रांची में बाउंड्री निर्माण का काम स्थानीय लोगों के विरोध, अतिक्रमण और विभिन्न विवादों के कारण रुक गया है। ...और पढ़ें

रांची में रिम्स की जमीन घेरने में पुलिस से मांगी सुरक्षा

रांची में रिम्स की जमीन घेरने में पुलिस से मांगी सुरक्षा

HighLights

  1. रिम्स बाउंड्री निर्माण स्थानीय विरोध और अतिक्रमण से रुका।

  2. सुरक्षा के लिए पुलिस और जिला प्रशासन से मदद मांगी।

  3. विभिन्न स्थानों पर जमीन विवाद और सीमांकन की समस्या।

जागरण संवाददाता, रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की जमीन को अतिक्रमण से सुरक्षित करने के लिए कराए जा रहे बाउंड्री निर्माण पर एक बार फिर सवाल खड़ा हो गया है। परिसर की जमीन की घेराबंदी के लिए चल रहे निर्माण कार्य को कई स्थानों पर स्थानीय लोगों के विरोध और अन्य अड़चनों के कारण रोकना पड़ा है। 

स्थिति यह है कि बाउंड्री निर्माण कर रही एजेंसी ने अब लिखित रूप से काम में आ रही बाधाओं की जानकारी देते हुए काम जारी रखने में असमर्थता जताई है। इसके बाद रिम्स प्रबंधन ने पुलिस और जिला प्रशासन से सुरक्षा बल उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि बाउंड्री निर्माण का काम समय पर पूरा किया जा सके।

पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध 

रिम्स के संपदा पदाधिकारी डॉ. शिव प्रिय ने बताया कि संस्थान की जमीन को सुरक्षित करने के प्रयास का कुछ जगहों पर विरोध हो रहा है। पूर्व में भी पुलिस और जिला प्रशासन से सहयोग मांगा गया था। अब निर्माण एजेंसी की ओर से लिखित रूप से समस्याएं बताई गई हैं। इसके बाद एसएसपी और उपायुक्त को पत्र भेजकर पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।

उन्होंने कहा कि रिम्स की जमीन पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा और बाउंड्री निर्माण पूरा कर परिसर को सुरक्षित करना प्राथमिकता है।

छह महीने से कई जगहों पर काम प्रभावित

बाउंड्री निर्माण एजेंसी मदन लाल बजाज कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने 25 अगस्त को झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड को पत्र देकर निर्माण के दौरान सामने आ रही बाधाओं का विस्तृत ब्योरा दिया है। 

पत्र के अनुसार रिम्स के नार्थ कैंपस में पेरामेडिकल के पास अप्रैल माह से स्थानीय लोगों ने काम रोक रखा है। यहां बाहर की सड़क को लेकर विवाद है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क कथित रूप से एक व्यक्ति द्वारा घेर ली गई है और बाउंड्री बनने से उनके घर का रास्ता बाधित हो जाएगा। एजेंसी के अनुसार मापी और समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक बाधा दूर नहीं हुई।

रिम्स की जमीन का हिस्सा अब तक साफ नहीं 

इसी तरह इमामबाड़ा के पास भी अप्रैल से काम प्रभावित है। यहां स्थानीय लोग बाउंड्री को हिल व्यू रोड की ओर करीब दो मीटर परिसर के अंदर करने की मांग कर रहे हैं। डॉक्टर्स कॉलोनी के पास मिराज रेस्टोरेंट के पास बाउंड्री का अलाइनमेंट और मार्किंग उपलब्ध नहीं होने का कारण एजेंसी ने बताया है। 

पुलिस स्टेशन के पीछे रिम्स की जमीन का हिस्सा अब तक साफ नहीं कराया जा सका है। नया टोली में स्थानीय लोगों ने मई से घर तक आने-जाने का रास्ता प्रभावित होने की बात कहते हुए काम रोक रखा है। मुख्य सड़क पर अस्थायी और स्थायी दुकानों के बाउंड्री क्षेत्र में आने की समस्या भी बताई गई है।

मंदिर के पास धार्मिक तनाव का खतरा

साउथ कैंपस यानी डीआइजी ग्राउंड की ओर भी बाउंड्री निर्माण में परेशानी है। मंदिर के पास करीब 3.75 मीटर बाउंड्री का हिस्सा अधूरा छोड़ना पड़ा है। एजेंसी के अनुसार स्थानीय लोग पूजा के लिए रास्ता मांग रहे हैं और निर्माण दोबारा शुरू करने पर धार्मिक तनाव की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका जताई गई है। 

डीआईजी आवास की ओर वर्तमान परिधि को बंद करने के लिए मौजूदा सड़क को हटाकर करीब 25 फीट बाहर की ओर नई सड़क बनाने की जरूरत बताई गई है। इसके लिए पहले सड़क स्थानांतरण और नई सड़क निर्माण की योजना तैयार करनी होगी।

मिट्टी, नाला और जलजमाव भी बड़ी बाधा

एजेंसी ने मुख्य परिसर में ब्वायज हास्टल नंबर-8 के पास जमीन को बेहद ढीली और दलदली बताया है। यहां निर्माण मशीनरी पहुंचाने के लिए मिट्टी भराई जरूरी है। साथ ही बाहर से आने वाला प्राकृतिक नाला परिसर के पीछे से बहते हुए करीब 800 मीटर क्षेत्र को प्रभावित करता है। 

एजेंसी ने इस हिस्से में आरसीसी नाला निर्माण की योजना बनाने की जरूरत बताई है। प्रशासनिक भवन के पास भी जमीन दलदली होने के कारण पहले जंगल की सफाई और मिट्टी भराई की जरूरत है। मोरहाबादी और पावर ग्रिड गेस्ट हाउस के बीच लगातार सीवरेज का पानी बहने से क्षेत्र में पहुंचना मुश्किल है। 

यहां जलनिकासी की व्यवस्था किए बिना बाउंड्री बनाना संभव नहीं बताया गया है। गेट नंबर-1 के पास भी दुकानों और मेडिकल स्टोर, खासकर बरियातू फार्मा क्षेत्र के कारण उचित सीमांकन की जरूरत बताई गई है।

डीआईजी आवास, कैलाश कोठी और मसना स्थल के पास भी समस्या

एजेंसी के पत्र में डीआईजी आवास के सामने मौजूद पार्क को हटाकर कहीं और स्थानांतरित करने की जरूरत बताई गई है। पूर्वी बाउंड्री वॉल के लिए डीआईजी आवास के पास अब तक सीमांकन और अलाइनमेंट नहीं किया गया है। कैलाश कोठी के पास भी बाउंड्री निर्माण के लिए सीमांकन उपलब्ध नहीं कराया गया है। वहीं, मसना स्थल के पास बाउंड्री निर्माण के लिए उचित दिशा-निर्देश की मांग की गई है।

बाउंड्री टूटी तो फिर बन गया रास्ता

रिम्स परिसर को अतिक्रमण से मुक्त कराने के बाद अब प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमीन की स्थायी सुरक्षा की है। कुछ स्थानों पर बाउंड्री निर्माण के बाद रास्ते के लिए उसे तोड़ने और दोबारा आवागमन शुरू करने की शिकायत भी सामने आई है। ऐसे में यदि पूरी परिधि की घेराबंदी नहीं हुई तो अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का स्थायी लाभ नहीं मिल पाएगा। 

संपदा पदाधिकारी के अनुसार प्रबंधन लगातार यह स्पष्ट कर रहा है कि संबंधित जमीन रिम्स की है और उसे सुरक्षित रखने के लिए बाउंड्री जरूरी है। एजेंसी ने बाधाओं को दूर करने, स्थानीय विवाद सुलझाने, साइट का सीमांकन उपलब्ध कराने और आवश्यक सिविल कार्य कराने के लिए रिम्स के अधिकारियों के हस्तक्षेप की मांग की है।