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साहिबगंज में Ganga River फिर उफान पर, प्रत्येक घंटा एक सेमी बढ़ रहा जलस्तर

Published: Fri, 04 Sep 2026 09:52 AM (IST)

Ganga River Risesः साहिबगंज में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है ...और पढ़ें

साहिबगंज में गंगा नदी में नाव चलाता नाविक। (प्रतीकात्मक फोटो)

साहिबगंज में गंगा नदी में नाव चलाता नाविक। (प्रतीकात्मक फोटो)

जागरण संवाददाता, साहिबगंज। गंगा नदी के जलस्तर में एक बार फिर से वृद्धि होने लगी है। प्रत्येक घंटा एक सेंटीमीटर पानी बढ़ रहा है। गुरुवार की शाम तीन बजे जलस्तर 27.72 मीटर मापा गया। शुक्रवार की सुबह तक इसके 27.86 मीटर तक पहुंचने का पूर्वानुमान है।

जलस्तर बढ़ने से एक बार पुन: बाढ़ का डर लोगों को सताने लगा है। दियारा क्षेत्र में बाढ़ का पानी चढ़ने से सड़क कई जगह क्षतिग्रस्त हो गयी है जिससे आने वाले लोगों काे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

घरों में पानी प्रवेश करने से लोग मचान पर सामान रख पानी घटने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि जिला प्रशासन पूर्व में ही माइकिंग कर लोगों को सुरक्षित निकल जाने की अपील कर चुकी है। प्रखंड स्तर पर अंचलाधिकारी के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चुड़ा, गुड़, सत्तू, माचिस, मोमबत्ती का वितरण जारी है।

इधर नगर परिषद क्षेत्र के कई वार्ड में पानी प्रवेश करने लगा है। नाली के माध्यम से पानी सड़क और घर के दरवाजा पर पहुंचने लगा है। हबीबपुर पाइप रोड सहित अन्य क्षेत्रों में पानी प्रवेश करने लगा है।

तीन दिनों में 80.18 एमएम बारिश

साहिबगंज जिले में एक से तीन सितंबर तक 80.18 एमएम बारिश हुई है। सबसे अधिक 141 एमएम बारिश पतना प्रखंड में और सबसे कम मंडरो और उधवा में 39 एमएम बारिश हुई है। इस तरह बरहेट व राजमहल में 91 एमएम, तालझारी 75, बोरियो में 57 और साहिबगंज में 51.08 एमएम बारिश हुई है।

बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के कारण एक सितंबर से सभी जिलाें में मानसून सक्रिय हो चुका है। साहिबगंज में भी मंगलवार से बारिश शुरू है। अभी इसके जारी रहने की उम्मीद है। झारखंड, बिहार व यूपी में भारी बारिश व कोसी का पानी गंगा नदी में आने से जलस्तर में वृद्धि हो रही है।

बाढ़ से 50 हजार परिवार होंगे प्रभावित 

जिले में बाढ़ से हर साल सदर, तालझारी, राजमहल और उधवा के गंगा तटीय क्षेत्र मिलाकर 50 हजार से अधिक परिवार प्रभावित हो जाते हैं। जान मान की काफी क्षति होती है। हर साल लोगों का बना बनाया आशियाना गंगा की गोद में समा जाता है।