चाईबासा में अनोखा विरोध: 3 दिन की पदयात्रा कर बैलों के साथ DC Office पहुंचे किसान, खाद की कालाबाजारी पर रोष
पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में किसानों ने खाद की कथित कालाबाजारी और निर्धारित दर से अधिक कीमत पर यूरिया व डीएपी बेचे जाने के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया।

घोड़ाबांधा से सैकड़ों किसान अपने बैलों और बैलगाड़ियों के साथ तीन दिनों की पदयात्रा कर गुरुवार को चाईबासा स्थित उपायुक्त कार्यालय पहुंचे।
HighLights
चाईबासा में किसानों ने खाद की कालाबाजारी के खिलाफ प्रदर्शन किया।
सैकड़ों किसान बैलों के साथ तीन दिन की पदयात्रा कर पहुंचे।
सरकारी दर पर खाद उपलब्ध कराने की मांग, 15 दिन का अल्टीमेटम।
जागरण संवाददाता, चाईबासा। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में खाद की कथित कालाबाजारी और निर्धारित दरों से कई गुना अधिक कीमत पर यूरिया व डीएपी बेचे जाने के विरोध में किसानों ने अनोखा प्रदर्शन किया।
मझगांव प्रखंड के घोड़ाबांधा से सैकड़ों किसान अपने बैलों और बैलगाड़ियों के साथ तीन दिनों की पदयात्रा कर गुरुवार को चाईबासा स्थित उपायुक्त (डीसी) कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला।
निर्धारित दर से दोगुने दाम पर बिक रही खाद
झारखंड बचाओ जनसंघर्ष मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष सह मंझारी प्रखंड के जिला परिषद सदस्य माधव चंद्र कुंकल के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
कुंकल ने आरोप लगाया कि यूरिया की जिस बोरी पर सरकारी मूल्य 266.50 रुपये अंकित है, उसे स्थानीय विक्रेताओं द्वारा 470 से 500 रुपये में बेचा जा रहा है।
वहीं, 1350 रुपये अंकित मूल्य वाली डीएपी की बोरी के लिए 2300 से 2800 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। किसानों ने इसे 'उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985' का स्पष्ट उल्लंघन बताया।
कृषि विभाग पर लापरवाही का आरोप, 15 दिन का अल्टीमेटम
प्रदर्शन में शामिल रेयांश समड व अन्य किसान नेताओं ने कहा कि इससे पहले भी जिला कृषि पदाधिकारी से लिखित शिकायत की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
किसानों ने मांग की है कि उन्हें सरकारी दर पर खाद उपलब्ध कराई जाए और मुनाफाखोरी करने वाले उर्वरक विक्रेताओं के खिलाफ सख्त जांच कर कार्रवाई की जाए।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर गंभीर कदम नहीं उठाए गए, तो वे जिला कृषि कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
इस विरोध प्रदर्शन में समाजसेवी मनोज गोप, मनीष तिरिया, मनोज हेंब्रम, विजय हेंब्रम, मनोरंजन महाराणा, चंद्रमोहन चातर, साधु तिरिया, जगदीश बिरुवा, सूरज हांसदा समेत बड़ी संख्या में पुरुष व महिला किसान शामिल रहे।
