बुकिंग के बावजूद वरिष्ठ नागरिक दंपति को नहीं मिला होटल में कमरा, फैब होटल पर 30,670 रुपये का जुर्माना
वरिष्ठ नागरिक दंपति को ऑनलाइन बुकिंग के बावजूद कमरा न देने पर फैब होटल को चाईबासा उपभोक्ता आयोग ने ₹30,670 ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर। (AI Generated Image)
HighLights
फैब होटल पर ₹30,670 का जुर्माना लगा।
वरिष्ठ दंपति को ऑनलाइन बुकिंग के बावजूद कमरा नहीं मिला।
उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में कमी माना।
जासं, चाईबासा। होटल में ऑनलाइन बुकिंग और पूरा भुगतान करने के बावजूद वरिष्ठ नागरिक दंपति को कमरा उपलब्ध न कराना फैब होटल प्रबंधन को भारी पड़ गया।
पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इसे सेवा में गंभीर कमी मानते हुए होटल प्रबंधन के दोनों विपक्षी पक्षों के खिलाफ एकपक्षीय फैसला सुनाया है।
आयोग ने होटल को बुकिंग राशि की वापसी के साथ 20 हजार रुपये मानसिक मुआवजा और 5 हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में, यानी कुल 30,670 रुपये शिकायतकर्ता को भुगतान करने का स्पष्ट आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामले के विवरण के अनुसार, चाईबासा के हिंद चौक, बड़ी बाजार निवासी रजीक अनवर ने अपने वरिष्ठ नागरिक माता-पिता (मो. बारिक और उनकी पत्नी मनीला पिंगुआ) के ठहरने के लिए कोलकाता स्थित फैब होटल गेस्ट ओ पैलेस (राजडांगा) में 10 से 12 मई 2026 के लिए ऑनलाइन कमरा बुक कराया था।
इसके लिए 5,670 रुपये का भुगतान भी एडवांस में कर दिया गया था। 10 मई 2026 की रात करीब 9 से 10 बजे के बीच जब मो. बारिक अपनी पत्नी के साथ होटल पहुंचे, तो होटल प्रबंधन ने उनके नाम की किसी भी बुकिंग से साफ इनकार कर दिया और कमरा देने से मना कर दिया।
वरिष्ठ नागरिक दंपति को दूसरे होटल की तलाश करनी पड़ी
देर रात अनजान शहर में वरिष्ठ नागरिक दंपति को दूसरे होटल की तलाश करनी पड़ी, जिससे उन्हें अत्यधिक असुविधा, मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
इस घटना से व्यथित होकर मो. बारिक ने चाईबासा जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने बुकिंग राशि की वापसी और मानसिक प्रताड़ना के एवज में 60 हजार रुपये के मुआवजे की मांग की।
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने ऑनलाइन भुगतान की रसीद, बैंक खाता विवरण और यात्रा टिकट जैसे ठोस दस्तावेज पेश किए।
आयोग ने विपक्षी पक्षों को नोटिस भेजे
शिकायतकर्ता की पत्नी ने भी मौखिक गवाही देकर घटना की पुष्टि की। आयोग की ओर से विपक्षी पक्षों को नोटिस भेजे गए, लेकिन वे न तो कोर्ट में उपस्थित हुए और न ही अपना पक्ष रखा।
इसके बाद आयोग ने साक्ष्यों के आधार पर एकपक्षीय सुनवाई पूरी की। जिला उपभोक्ता आयोग ने माना कि advance भुगतान लेने के बावजूद निर्धारित तिथि पर कमरा उपलब्ध न कराना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत सेवा में गंभीर कमी है।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि दोनों विपक्षी पक्ष संयुक्त या पृथक रूप से शिकायतकर्ता को निम्नलिखित राशि का भुगतान करेंगे:
- बुकिंग राशि की वापसी: ₹5,670
- मानसिक प्रताड़ना व असुविधा का मुआवजा: ₹20,000
- मुकदमा खर्च (वाद व्यय): ₹5,000
- कुल देय राशि: ₹30,670
आयोग ने सख्त निर्देश दिया है कि फैसले की प्रति प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर पूरी राशि का भुगतान करना अनिवार्य होगा।
तय सीमा में भुगतान न करने पर बुकिंग राशि पर केस दायर करने की तिथि से और मुआवजे की राशि पर फैसले की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी चुकाना होगा।
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नागरिकों को देर रात भटकने पर मजबूर करना गंभीर लापरवाही है। यह फैसला ऑनलाइन होटल बुकिंग में मनमानी करने वाली कंपनियों के लिए एक कड़ा संदेश है।