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कॉफी के बीज बाहर ले जाने पर थी पाबंदी, फिर भारत कैसे पहुंचे ये 7 बीज? दिलचस्प है सूफी बाबा की कहानी

Published: Fri, 18 Sep 2026 12:26 PM (IST)

कॉफी भारत कैसे पहुंची, इसकी कहानी काफी दिलचस्प है। कॉफी की खोज 9वीं सदी में इथियोपिया में हुई थी।

मजेदार तरीके से भारत पहुंची कॉफी (Picture Courtesy: Freepik)

मजेदार तरीके से भारत पहुंची कॉफी (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सुबह का आलस मिटाने या शाम की थकान दूर करने के लिए आज लाखों लोग कॉफी का सहारा लेते हैं। एक कप कॉफी पीते ही शरीर फ्रेश महसूस करने लगता है और एनर्जी आ जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं आपकी फेवरेट कॉफी भारत कैसे पहुंची? 

दरअसल, कॉफी सबसे पहले भारत में नहीं खोजी गई थी। ये किसी दूसरे देश से भारत आई है, जिसके पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है। आइए जानें कॉफी भारत कैसे पहुंची। 

बकरियों नें खाई सबसे पहले कॉफी

इस बात का कोई ऐतिहासिक सबूत नहीं है, लेकिन एक कहानी काफी मशहूर है कि इथियोपिया के पठार पर एक चरवाहे काल्डी ने देखा कि एक खास पेड़ की लाल चेरी खाने के बाद उसकी बकरियों में गजब की एनर्जी आ जाती थी और वे रातभर सोती भी नहीं। 

काल्डी को ये बात बहुत हैरान करने वाली लगी, तो सच्चाई जानने के लिए एक दिन उसने खुद भी उस पेड़ की लाल चेरी को खाकर देखा। चेरी खाने के बाद उसे भी काफी एनर्जी का एहसास हुआ। काल्डी ने ये बात वहां के धार्मिक गुरुओं के बताई। शाम की लंबी प्रार्थना में अक्सर नींद आने की समस्या से वे लोग परेशान रहते थे। काल्डी की बात सुनकर उन्होंने उस चेरी से एक ड्रिंक बनाई और पाया कि इसे पीते ही वे ज्यादा एनर्जेटिक और अलर्ट महसूस करने लगे। इसके बाद ये जानकारी धीरे-धीरे पूर्वी देशों में फैलने लगी।

यमन से व्यापार की शुरुआत

15वीं शताब्दी तक कॉफी का व्यावसायिक उत्पादन और व्यापार अरब देशों में शुरू हो चुका था और सबसे पहले इसे यमन में उगाया गया। 16वीं सदी आते-आते यह ईरान, मिस्त्र, सीरिया और तुर्किए जैसे देशों में भी कॉफी मशहूर हो गई। 

बाबा बुदन लाए कॉफी

भारत में कॉफी कैसे आई, इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। कहा जाता है कि लगभग 17वीं सदी में सूफी संत बाबा बुदन यमन के मोखा बंदरगाह से यात्रा कर रहे थे। उस समय अरब देशों से कॉफी के कच्चे या उगने वाले बीज बाहर ले जाने पर पाबंदी थी।  

इसके बावजूद बाबा बुदन यमन से चोरी-छिपे कॉफी के सात बीज अपने साथ भारत ले आए। उन्होंने इन बीजों को कर्नाटक के चिकमगलूर की पहाड़ियों में बोया और पहली बार भारत में कॉफी उगाई गई। 

भारत की कॉफी को मिली वैश्विक पहचान

कॉफी का स्वाद धीरे-धीरे लोगों को पसंद आने लगा, जिससे 18वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान इसे बड़े पैमाने पर व्यापार के लिए उगाई जाने लगा। बाबा बुदन के लाए 7 बीजों से भारत में कॉफी का सफर शुरू हुआ, जिससे आज अपना देश पूरी दुनिया में कॉफी का 7वां सबसे बड़ा उत्पादक बन चुका है।