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नचनिया डांस से बिल्कुल अलग है बिहार का ‘झूमर डांस’, बिल्कुल ठेठ देसी अंदाज में होता है ये खास लोक नृत्य

Published: Wed, 04 Nov 2026 04:37 PM (IST)

बिहार के लोक नृत्यों में झूमर नृत्य भी शामिल है। ये नृत्य बिहार के गांव और संस्कृति से जुड़ी है।

बहुत दिलचस्प है बिहार का झूमर नृत्य (AI Generated Image)

बहुत दिलचस्प है बिहार का झूमर नृत्य (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार में सिर्फ नचनिया डांस नहीं होता है। यहां कई लोक नृत्य भी किए जाते हैं, जो वहां की संस्कृति का अहम हिस्सा हैं। इन्हीं लोक नृत्यों में झूमर नृत्य भी शामिल है। ये डांस सिर्फ मनोरंजन से कहीं बढ़कर है। 

झूमर नृत्य बेहद की खास वजह से किया जाता है और इस डांस को बहुत ही दिलचस्प तरीके से किया जाता है। आइए जानें झूमर नृत्य की शुरुआत कैसे हुई और इस नृत्य की खासियत क्या है। 

क्या है झूमर नृत्य का इतिहास?

झूमर नृत्य खेती और गांव के जीवन से गहराई से जुड़ा है। ये नृत्य सिखाया नहीं जाता, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ता रहा है। सदियों से ये नृत्य बिहार की लोक संस्कृति का हिस्सा रहा है और मिथिलांचल के क्षेत्र में खासतौर से किया जाता है। 

ये नृत्य फसलों की कटाई के समय की जाती है। अच्छी फसल की खुशी में और प्रकृति का धन्यवाद करने के लिए ये नृत्य किया जाता है। इस नृत्य को सिर्फ महिलाएं करती हैं और पुरुष इसमें हिस्सा नहीं लेते। महिलाएं एक साथ गोल घेरे में खड़ी होती हैं और घूमते हुए नृत्य करती हैं। 

कैसे किया जाता है झूमर नृत्य?

ये नृत्य ठेठ देहाती अंदाज में किया जाता है। ये नृत्य अकेले नहीं किया जाता, बल्कि समूह में होता है। इसमें मिहलाएं एक गोल घेरे में खड़ी होती हैं और एक दूसरे का हाथ पकड़कर ताल से ताल मिलाकर घूमती हैं। इस नृत्य को ढोल, मंजीरा और झांज जैसे वाद्य यंत्रों की धुन पर किया जाता है। 

इसमें हाथों और पैरों की चाल एक खास ताल में चलती है। आमतौर पर इस नृत्य को सिर्फ महिलाएं ही करती हैं, लेकिन कुछ अवसरों पर पुरुष भी इस नृत्य में शामिल होते हैं और वाद्य यंत्र बजाते हैं। 

दूसरे लोक नृत्यों से हटकर झूमर किसी एक त्योहार या मौसम से नहीं जुड़ा है। त्योहार पर या फसलों की कटाई के समय महिलाएं ये नृत्य करती हैं और अपनी खुशी जाहिर करती हैं। 

क्या है झूमर नृत्य की खासियत?

ये लोक नृत्य गांव की जिंदगी की खुशी जताने और प्रकृति का धन्यवाद करने के लिए किया जाता है। इस नृत्य के दौरान महिलाएं रंग-बिरंगी साड़ियां पहनती हैं, गहने पहनती हैं और साथ मिलकर ये डांस करती हैं। ये नृत्य सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं है। ये सामाजिक एकता को भी मजबूत करता है।


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