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दुल्हन की नहीं, दूल्हे की होती है विदाई! यहां शादी के बाद घर जमाई बनते हैं लड़के, पत्नी के घर रहने की है परंपरा

Updated: Wed, 02 Sep 2026 08:59 AM (IST)

मेघालय की खासी जनजाति में शादी के बाद दूल्हे अपनी पत्नियों के घर रहने आते हैं, जो एक सदियों पुरानी मातृसत्तात्मक परंपरा का हिस्सा है।

मेघालय की अनोखी परंपरा (AI Generated Image)

मेघालय की अनोखी परंपरा (AI Generated Image)

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संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आमतौर पर शादियों में बेटियों को अपना घर छोड़कर अपने पति के घर रहने जाना पड़ता है, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी परंपरा के बारे में बताएंगे, जिसमें लड़के अपने ससुराल रहने आते हैं। दरअसल, हम मेघालय की खासी जनजाति की परंपरा के बारे में बात कर रहे हैं। 

इस समुदाय में शादी के बाद बेटियां अपना घर नहीं छोड़तीं, बल्कि बेटों की विदाई होती है और वे अपनी पत्नियों के घर पर रहते हैं। ये परंपरा भी खासी जनजाति की सदियों से चली आ रही मातृसत्तात्मक परंपरा का हिस्सा है, जिसमें घर की मुखिया और संपत्ति की असली हकदार बेटियां बनती हैं। 

मां के नाम से चलता है वंश

आमतौर पर बच्चों के नाम के पीछे पिता का सरनेम लगता है और वो अपने पिता के वंशज कहलाते हैं, लेकिन खासी जनजाति की परंपरा इससे बिल्कुल अलग है। यहां मां के नाम से वंश चलता है। बच्चे का सरनेम माता के गोत्र या सरनेम से तय होता है। यहां बेटों को नहीं, बल्कि बेटियों को वंश बढ़ाने वाला माना जाता है। 

संपत्ति की असली वारिस होती है बेटी

खासी जनजाति में परिवार की संपत्ति और जमीन पर बेटियों का अधिकार होता है। इन समुदाय में बेटियों को सिर्फ संपत्ति नहीं मिलती, बल्कि वो परिवार की मुखिया होती हैं, अपने माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी भी उन पर होती हैं और अपने परिवार के सभी धार्मिक अनुष्ठानों की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर होती है।  

दूल्हा बनता है घर जमाई

हमारे समाज में घर जमाई को बहुत नीची दृष्टि से देखा जाता है, लेकिन खासी जनजाति की ये परंपरा है। शादी के बाद दूल्हे की विदाई होती है और वह अपनी पत्नी के घर आकर रहता है। इसलिए इस जनजाति में नियम है कि एक ही कुमबे के दो लोगों में शादी वर्जित है। 

महिलाएं संभालती हैं घर की जिम्मेदारी

खासी जनजाति की महिलाएं अपनी जिंदगी के हर फैसले खुद आगे बढ़कर लेती हैं। हालांकि, शादी-ब्याह जैसे मामलों में घर के दूसरे सदस्यों, जैसे मामा की राय ली जाती है और उनकी भूमिका भी काफी अहम होती है, लेकिन महिलाएं यहां एक्टिव रूप से हर फैसले में हिस्सा लेती हैं।