क्या आपने सुना है ओडिशा का 'रंगाबती' संगीत? सिर्फ रसगुल्ला नहीं, यहां की लोक धुनें भी हैं बेहद मीठी
ओडिशा का लोक संगीत यहां की समृद्ध संस्कृति को बयां करता है। ये गीत रोजमर्रा के जीवन, त्योहारों और भक्ति को पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ व्यक्त करते हैं।

कैसा है ओडिशा का लोक संगीत? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ओडिशा का नाम लेते ही आपके दिमाग में सबसे पहले जगन्नाथ मंदिर, खूबसूरत समुद्री तट और रसगुल्ले आते होंगे, लेकिन क्या आप यहां के लोक संगीत के बारे में जानते हैं? ओडिशा का लोक संगीत यहां की संस्कृति को बयां करता है।
इन गीतों में रोजमर्रा के जीवन, उत्सव, खेती और पंरपराओं का जिक्र सुनने को मिलता है। आइए जानें ओडिशा का लोक संगीत कैसा है और इसकी खासियत क्या है।
संबलपुरी संगीत
पश्चिमी ओडिशा का संबलपुरी संगीत अपनी एनर्जी और तेज लय के लिए जाना जाता है। इस शैली का सबसे बेहतरीन और मशहूर उदाहरण रंगाबती गीत है, जिसने भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई। इसे ढोल और निशान की थाप पर गाया जाता है और इसकी धुन इतनी मजेदार होती है कि सुनते ही आपके पैर भी थिरकने पर मजबूर हो जाएंगे।
दलखाई
दलखाई को सवाल-जवाब की शैली में गाया जाता है। नुआखाई और दशहरा जैसे अवसरों पर इन गीतों को खासतौर से गाया जाता है। इन गीतों में गांव के जीवन और प्रकृति की खूबसूरती का वर्णन किया जाता है। दलखाई महिलाएं गाती हैं और इसके साथ दलखाई नृत्य भी करती हैं।
दासकाठिया
दासकाठिया ओडिशा की पारंपरिक कथा वाचन और भक्ति संगीत की शैली है। इसमें गायक पौराणिक कथाओं और धार्मिक ग्रंथों को काव्यात्मक पंक्तियों और नाटकीय संवाद को संगीत के जरिए पेश करते हैं। दासकाठिया में कलाकार लकड़ी के बने एक खास वाद्य यंत्र काठिया का इस्तेमाल करते हैं, जो इस संगीत शैली की पहचान है।
केन्दरा गीत
इस गीत को भी एक खास वाद्य यंत्र केन्दारा पर गाया जाता है। ये एक तार वाला वाद्य यंत्र होता है और इस गायन शैली की खासियत है। इन गीतों को घुमंतू गायक गाते हैं और इसमें वियोग, भक्ति और लोक कथाओं के बारे में गाया जाता है।
ओडिशा के लोक संगीत की खासियत
इन गीतों को गाने के लिए पारंपरिक वाद्य यंत्र, जैसे ढोल, महुरी, नगाड़ा, मंडल और खंजरी आदि का इस्तेमाल किया जाता है। ये गीत ओडिशा की संस्कृति, रोजमर्रा के जीवन, प्रेम, भक्ति और लोगों की भावनाओं को जाहिर करते हैं। यहां का लोक संगीत इस राज्य की संस्कृति का अहम हिस्सा है।
