सिर्फ फिल्मी गाने नहीं, गरबा की थाप और डायरो की महफिल में बसता है गुजरात का असली संगीत; सुनते ही झूम उठेंगे आप
बॉलीवुड में दिखाए गए गाने नहीं हैं गुजरात का असली संगीत। यहां की संस्कृति और इंसानी भावनाओं को बयां करत है यहां का म्यूजिक।

गुजरात का असली लोक संगीत (AI Generated Image)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गुजराती म्यूजिक के नाम पर सिर्फ दीपिका पादुकोण की फिल्म राम-लीला के गाने ही जानते हैं, तो हो सकता है आपने गुजरात का असली संगीत कभी सुना ही नहीं है। यहां के लोकगीतों में शादी-ब्याह के मौकों से लेकर गरबा में देवी आराधना और प्रेम आदि का भी जिक्र मिलता है।
गुजरात के लोकगीतों में यहां की संस्कृित की झलक देखने को मिलती है। स्थानीय बोलियों और संगीत पर बने यहां के लोकगीत सुनते ही आपका मन भी नाच उठने को करेगा। आइए जानें गुजरात का लोक संगीत असल में कैसा है।
गरबा और रास
गरबा गुजरात का सबसे मशहूर लोकनृत्य और लोक संगीत है, जिसे नवरात्रि के दिनों में मां अंबा की अराधना के लिए गाया जाता है। इसमें तालियों, मंजीरों और ढोल की थाप पर भक्ति और ऊर्जा से भरपूर गीत गाए जाते हैं। फाल्गुनी पाठक और आदित्य गढ़वी जैसे कई गायकों ने गरबा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाने में अहम योगदान निभाया है।
इसी तरह रास या डांडिया भगवान श्री कृष्ण और देवी राधा की लीलाओं को बयां करने के लिए गाया जाता है। इसमें रंग-बिरंगी डांडियों के साथ लोग नृत्य करते हैं। प्रेम और भक्ति से भरपूर ये गीत ढोल और शहनाई के साथ गाए जाते हैं।
डायरो और लोकवार्ता
डायरो गुजरात की पारंपरिक महफिल शैली के समारोह होते हैं। इसमें गायक या संत रातभर बैठकर भक्ति संगीत, शूर वीरता के किस्से और दोहे सुनाते हैं। इसमें तबला, हारमोनियम और मंजीरा जैसे वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है।
लोकवार्ता कहानी सुनाने की एक बहुत पुरानी शैली है, जिसे संगीत के साथ पेश किया जाता है। इनमें ऐतिहासिक वीरों, प्रेम-कहानियों और सामाजिक प्रसंगों को दोहे और छंदों के जरिए बेहद रोचक ढंग से सुनाया जाता है।
फटाणा
गुजरात की शादियां फटाणा के बिना अधूरी हैं। ये हंसी-मजाक और मीठी छेड़छेाड़ से भरे विवाह गीत होते हैं। शादी के दौरान दूल्हा-दुल्हन के घर की महिलाएं आपस में मजाकिया अंदाज में ताने मारते हुए फटाणा गाती हैं। शादी-ब्याह के माहौल को फटाणा की गूंज और मजेदार बना देती है।
प्रभातिया
प्रभातिया सुबह के समय गाए जाने वाले भक्ति भरे गीत होते हैं। गुजराती संत-कवि नरसिंह मेहता के रचे प्रभातिया काफी मशहूर हैं। ये गीत सुबह के समय भगवान विष्णु और श्री कृष्ण की अराधना में गाए जाते हैं। इनकी धुन इतनी प्यारी होती है कि सुनकर काफी सुकून का एहसास होता है।
दोहे और छंद
गुजरात का लोक संगीत दोहों और छंद के बिना अधूरा है। दोहे दो लाइन के होते हैं और छंद चार लाइन के। इनमें वीरता, शौर्य, भक्ति और प्रेम प्रसंगों को सुनाया जाता है।
