हनी सिंह के रैप से काफी अलग है पंजाब का असली म्यूजिक, टप्पे और जुगनी जैसे लोकगीतों में है यहां का असली स्वैग
पंजाब के लोक संगीत में शादियों की धूम से लेकर प्रेमी-प्रेमिका की नोंक-झोंक, फसल कटाई की खुशी और वीर गाथाओं सबकुछ सुनने को मिलता है।
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बहुत खास है पंजाबी लोक संगीत (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पंजाबी गानों का नाम लेते ही आपके दिमाग हनी सिंह के रैप सॉन्ग या दिलजीत दोसांझ के गाने आते होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं असली पंजाबी म्यूजिक इससे काफी अलग है। पंजाब का लोक संगीत यहां की खूबसूरती और प्रेम को बयां करता है।
यहां के लोक संगीत में शादी-ब्याह से लेकर फसलों की कटाई और प्रेमी-प्रेमिका की नोंक-झोंक की झलक मिलती है। आइए जानें पंजाब के लोक संगीतों के बारे में।
शादियों में घोड़ियां और सुहाग की धूम
पंजाब में शादी-ब्याह के मौके बिना लोक संगीत के अधूरे हैं। दुल्हन की ओर सुहाग गाए जाते हैं, जिसमें शादीशुदा जिंदगी की मंगल कामना के साथ बेटी के लिए प्यार और दुलार की झलक मिलती है। वहीं दूल्हे के यहां घोड़ियां की गूंज सुनाई देती है। इसमें दूल्हे की शादी की तैयारी और उसकी मां के प्यार और बारात की तैयारियों का जिक्र होता है।
बोलियां और टप्पे के बिना अधूरे हैं त्योहार
पंजाब के त्योहार, खासकर बैसाखी और लोहड़ी पर लोकगीत जरूर गाए जाते हैं। भांगड़ा और गिद्दा पर बोलियां गाई जाती हैं। ये छोटी-छोटी तुकबंदियां होती हैं, जो ऊंची आवाज और ढोलक की थाप पर गाई जाती हैं। बोलियां गाते समय माहौल में गजब की ऊर्जा फैल जाती है।
वहीं टप्पे पंजाब के पारंपरिक रैप बैटल हैं। इसमें दो लोग या समूह आमने-सामने बैठकर मजाकिया और काव्यात्मक ढंग से एक-दूसरे पर तंज कसते हैं और एक-दूसरे को जवाब देते हैं।
प्रेम और वियोग के गीत हैं माहिया और ढोला
पंजाब सोहणी-महीवाल और हीर-रांझा जैसी अमर प्रेम कहानियों के लिए जाना जाता है। इसलिए यहां के लोकगीतों में भी इनका जिक्र मिलता है। माहिया और ढोला दो-दो पंक्तियों में गाई जाती हैं, जिसमें प्रेमी और प्रेमिका के बीच की बातचीत का जिक्र मिलता है। इनके जरिए प्रेमी-प्रेमिका की विरह, तड़प और प्यार को बयां किया जाता है।
जुगनी में समाज की झलक
जुगनी पंजाब के लोक संगीत का काफी दिलचस्प हिस्सा है। इसमें जुगनी के नाम के एक काल्पनिक चरित्र के माध्यम से समाज, राजनीति और मानवीय स्वभाव पर कटाक्ष किया जाता है। यह गीतों के जरिए एक समाज की भावना को बयां करते हैं।
वार में सुनाई जाती हैं वीर गाथाएं
पंजाब की धरती योद्धाओं और शूरवीरों से भरपूर है। वार लोकगीतों में इन्हीं कहानियों को सुनाया जाता है। इनमें वीर योद्धाओं के बलिदान और वीरता की गाथा गाई जाती है। इन लोकगीतों को ढड जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर गाया जाता है।
