रिटायरमेंट के बाद माता-पिता को कैसे रखें एक्टिव और खुश? इन आसान तरीके जो दूर करेंगे उनका अकेलापन
रिटायरमेंट के बाद माता-पिता के खालीपन और उदासी को दूर करने के लिए उन्हें एक्टिव और खुश रखना जरूरी है।

रिटायरमेंट के बाद माता-पिता को न होने दें अकेलेपन का शिकार (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। रिटायरमेंट जिंदगी का बड़ा मोड़ होता है। सालों तक का रूटीन, काम का प्रेशर, ऑफिस की जिम्मेदारियां सब अचानक से खत्म हो जाता है। शुरुआत में ये खाली समय सुकून देता है, लेकिन धीरे-धीरे खालीपन और उदासी में बदलने लगता है।
इसलिए अगर आपके पेरेंट्स अभी-अभी रिटायर हुए हैं, तो हो सकता है वो भी ऐसे ही खालीपन का सामना कर रहे हो। बच्चे अपने कामों और जिंदगी में बिजी हो जाते हैं और माता-पिता खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं। हालांकि, थोड़ी-सी मेहनत करके आप अपने पेरेंट्स को फिर से एक्टिव और खुश बना सकते हैं। आइए जानें रिटायरमेंट के बाद पेरेंट्स को एक्टिव और खुश रहने के तरीके।
नई हॉबी को बढ़ावा दें
कामकाज के चक्कर में अक्सर लोग अपनी हॉबीज को पीछे छोड़ देते हैं। रिटायरमेंट के बाद उन पीछे छूटी हॉबीज को फिर से अपनाने का समय मिल जाता है। आपके पेरेंट्स के क्या शौक हैं, इस बात पर ध्यान दें, जैसे- गार्डनिंग का शौक मन को शांति देता है और फिजिकली एक्टिव भी रखता है। अगर आपके पेरेंट्स को पढ़ने का शौक है, तो आप उन्हें कोई बुक क्लब जॉइन करवा सकते हैं। इसी तरह अगर सिलाई या कढ़ाई-बुनाई का शौक है, तो उससे भी मन को शांति मिलती है और दिमाग एक्टिव रहता है, जो बढ़ती उम्र में काफी जरूरी है।
डिजिटल लिटरेसी
आज डिटिजल दौर है और तकनीक से दूर रहने के कारण बुजुर्ग खुद को अलग-थलग महसूस करने लगते हैं। इसलिए डिजिटल लिट्रेसी जरूरी है। उन्हें स्मार्ट टीवी चलाना, वीडियो कॉल करना और सोशल मीडिया का इस्तेमाल सिखाएं। इससे वो अपने पुराने दोस्तों और रिश्तेदारों से आसानी से कनेक्ट कर पाएंगे या अपनी पसंद के गाने सुन पाएंगे या फिल्म देख पाएंगे।
सोशल कम्युनिटी से जोड़ें
अकेलापन दूर करने के लिए लोगों से मिलना-जुलना जरूरी है। उन्हें पास के पार्क में वॉक या योग ग्रुप जॉइन करने के लिए कहें। वहां वो अपनी उम्र के नए लोगों से मिल पाएंगे। कई सीनियर सिटिजन क्लब्स भी होते हैं, जहां उनके खास कार्यक्रम आयोजित हैं। अगर आपके आस-पास ऐसा कोई क्लब है, तो आप उन्हें जॉइन करने के लिए कह सकते हैं।
फैसलों में शामिल करें
उम्र के साथ माता-पिता घर की जिम्मेदारियां बच्चों को सौंप देते हैं, लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्हें एहसास दिलाना जरूरी होता है कि उनकी अहमियत आज भी वही है। इसके लिए उन्हें घर के फैसलों में शामिल करें। रोजाना उनके साथ कम से कम आधे घंटे बैठकर बात करें। उनके पुराने किस्से सुनें या अपनी कोई कहानी सुनाएं। इससे उन्हें एहसास होगा कि वे आपकी जिंदगी में अहम हैं।
